ईरान की ट्रंप को खुली धमकीः “हमारी उंगली ट्रिगर पर, एक भी गलती अमेरिका को पड़ेगी भारी !”
punjabkesari.in Saturday, Jan 31, 2026 - 07:17 PM (IST)
International Desk: ईरान के सेना प्रमुख अमीर हातमी ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वाशिंगटन ने कोई भी रणनीतिक या सैन्य “गलती” की, तो उसकी अपनी सुरक्षा के साथ-साथ इजराइल और पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता गंभीर खतरे में पड़ जाएगी। तेहरान में आयोजित एक राष्ट्रीय समारोह में बोलते हुए हातमी ने कहा कि इस समय ईरान की सशस्त्र सेनाएं पूरी तरह सतर्क और युद्धक तैयारियों की स्थिति में हैं। उन्होंने कहा, “आज इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सेनाएं पूर्ण सैन्य और रक्षात्मक तैयारियों में हैं। हम क्षेत्र में दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं। हमारी उंगली ट्रिगर पर है।”
ईरानी सेना प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि दुश्मन पक्ष ने कोई भी गलत कदम उठाया, तो इसके परिणाम केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेंगे।“ उन्होंने कहा अगर दुश्मन ने कोई भी चूक की, तो वह न केवल अपनी सुरक्षा बल्कि इजराइल और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को भी खतरे में डाल देगा”। हातमी ने उन पड़ोसी देशों का स्वागत किया, जिन्होंने यह घोषणा की है कि वे अपने क्षेत्र या हवाई क्षेत्र का उपयोग ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि ये देश समझते हैं कि ईरान के खिलाफ किसी भी अस्थिरता का मतलब पूरे पश्चिम एशिया को असुरक्षित बनाना है।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में एक “विशाल सैन्य बेड़ा” ईरान की ओर बढ़ रहा है और तेहरान के पास समझौते के लिए “समय कम बचा है।” दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने तुर्की के इस्तांबुल में कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन धमकी के साए में किसी भी तरह की वार्ता स्वीकार्य नहीं है।
इस बीच, मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलाती ने अमेरिका और ईरान से संयम बरतने और परमाणु मुद्दे पर फिर से बातचीत शुरू करने की अपील की है। मिस्र ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र की समस्याओं का सैन्य समाधान संभव नहीं है और कूटनीति व संवाद ही एकमात्र रास्ता है। यूरोपीय संघ द्वारा ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकी सूची में डालने के फैसले और अमेरिका की सैन्य तैनाती ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक गलत कदम पूरे पश्चिम एशिया को बड़े संघर्ष की ओर धकेल सकता है।
