ट्रंप ने अब इस देश को दी खुली चेतावनी, कहा- अगर सत्ता के भीतर बैठे लोग... तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा
punjabkesari.in Friday, Jan 23, 2026 - 09:48 AM (IST)
इंटरनेशनल डेस्क: हैती की सियासत एक बार फिर उबाल पर है और इस बार अमेरिका ने खुली चेतावनी देकर माहौल और सख़्त कर दिया है। वॉशिंगटन ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर सत्ता के भीतर बैठे लोग देश को और अस्थिर करने की कोशिश करते हैं, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा।
अमेरिका ने हैती की ट्रांजिशनल प्रेसिडेंशियल काउंसिल को आगाह किया है कि वह मौजूदा सरकार की संरचना में किसी भी तरह का बदलाव न करे। हैती में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि गैर-निर्वाचित परिषद अगर अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में सरकार को बदलने की कोशिश करती है, तो इसे देश की सुरक्षा और स्थिरता के खिलाफ माना जाएगा और ऐसा कदम स्वीकार्य नहीं होगा।
अमेरिकी दूतावास ने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग ऐसी पहलों का समर्थन करेंगे, जो गिरोहों के हितों को आगे बढ़ाती हैं, वे न सिर्फ हैती बल्कि पूरे क्षेत्र और अमेरिका के हितों के विरुद्ध काम करेंगे। ऐसे मामलों में अमेरिका “उचित कार्रवाई” करने से पीछे नहीं हटेगा।
यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब ट्रांजिशनल काउंसिल के कुछ सदस्यों और मौजूदा प्रधानमंत्री एलिक्स डिडियर फिल्स-एमी के बीच मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। हालांकि इन मतभेदों की वजह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की गई है।
अमेरिकी विदेश विभाग के वेस्टर्न हेमिस्फेयर ब्यूरो ने भी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि हैती की पुरानी अस्थिरता के पीछे भ्रष्ट राजनेताओं की भूमिका रही है, जो गिरोहों का इस्तेमाल अराजकता फैलाने के लिए करते हैं और फिर उसी अराजकता को काबू करने के नाम पर सत्ता हथियाने की कोशिश करते हैं। विभाग ने कहा कि सच्ची स्थिरता केवल मतदाताओं के समर्थन से आएगी, न कि हिंसा और डर के दम पर। बयान में यहां तक कहा गया कि जो परिषद सदस्य इस रास्ते पर चल रहे हैं, वे देशभक्त नहीं बल्कि गिरोहों के साथ साठगांठ करने वाले लोग हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर हैती के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। वहीं काउंसिल के प्रमुख लॉरेंट सेंट-सिर ने बयान जारी कर कहा कि वे 7 फरवरी से पहले सरकार की स्थिरता को कमजोर करने वाले किसी भी कदम के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि समयसीमा नजदीक आने पर लिया गया कोई भी गैर-जिम्मेदार फैसला देश में भ्रम, अविश्वास और अराजकता को बढ़ा सकता है, जिसका सीधा असर पहले से पीड़ित जनता पर पड़ेगा।
हैती में यह संकट कोई नया नहीं है।
जुलाई 2021 में राष्ट्रपति जोवेनेल मोइसे की हत्या के बाद से देश लगातार राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता से जूझ रहा है। अप्रैल 2024 में कैरिबियन देशों की मध्यस्थता से ट्रांजिशनल प्रेसिडेंशियल काउंसिल का गठन किया गया था, जब गिरोह हिंसा के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री एरियल हेनरी को इस्तीफा देना पड़ा था। उस समय गिरोहों ने हवाई अड्डे बंद कर दिए थे और अहम बुनियादी ढांचे पर कब्जा कर लिया था।
इस काउंसिल का मुख्य उद्देश्य एक नए प्रधानमंत्री का चयन कर देश में स्थिरता बहाल करना था। फिल्स-एमी नवंबर 2025 में तीसरे प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किए गए थे, इससे पहले गैरी कोनिले को हटाया गया था।
काउंसिल का कार्यकाल 7 फरवरी 2026 को समाप्त होना है, लेकिन इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। आलोचकों का आरोप है कि कुछ सदस्य सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे हिंसक विरोध प्रदर्शन भड़कने का खतरा है। शुरुआत में उम्मीद थी कि 2024 में चुनाव होंगे, लेकिन गिरोह हिंसा के कारण अब पहला चरण अगस्त 2026 और दूसरा चरण दिसंबर 2026 में तय किया गया है।
स्थिति कितनी गंभीर है, इसका अंदाज़ा संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल जनवरी से नवंबर के बीच 8,100 से अधिक हत्याएं दर्ज की गईं, जबकि गिरोहों के नियंत्रण वाले इलाकों तक सीमित पहुंच के कारण वास्तविक आंकड़े इससे कहीं ज़्यादा हो सकते हैं।
अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र दोनों ने हैती के नेताओं से मतभेद भुलाकर संस्थागत निरंतरता बनाए रखने और चुनावी प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है। लेकिन मौजूदा हालात में सवाल यही है—क्या हैती राजनीतिक खींचतान से बाहर निकल पाएगा या फिर अस्थिरता का यह दौर और गहराएगा?
