ट्रंप की धमकी: ग्रीनलैंड चाहिए ही चाहिए, अमेरिका का समर्थन न करने वालों को भुगतना पड़ेगा अंजाम
punjabkesari.in Saturday, Jan 17, 2026 - 02:34 PM (IST)
Washington: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका के नियंत्रण का समर्थन न करने वाले देशों को वह शुल्क लगाकर दंडित कर सकते हैं। अमेरिकी संसद के द्विदलीय प्रतिधिनमंडल ने ट्रंप से डेनमार्क के साथ तनाव कम करने का अनुरोध किया है, जिसके बाद ट्रंप ने यह बात कही। ट्रंप महीनों से ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण होने की बात कहते आ रहे हैं, जिसपर फिलहाल डेनमार्क का नियंत्रण है।
President Trump says he may punish countries with tariffs if they don’t back the US's control of Greenland, reiterating that Washington needs the world's largest island for national security https://t.co/ouxENvaQn8
— TRT World (@trtworld) January 16, 2026
ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका के नियंत्रण के अलावा कुछ भी स्वीकार्य नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुक्रवार को अपने कार्यालय व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम में बताया कि उन्होंने औषधियों के मामले में यूरोपीय देशों को किस तरह धमकाया था। उन्होंने कहा, “मैं ग्रीनलैंड के लिए भी ऐसा कर सकता हूं। मैं ग्रीनलैंड के मामले पर समर्थन न देने वाले देशों पर शुल्क लगा सकता हूं। हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है। इसलिए मैं ऐसा कर सकता हूं।” इससे पहले उन्होंने इस मुद्दे पर दबाव बनाने के लिए शुल्क लगाने की बात नहीं कही थी।
अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड इतना अहम क्यों ?
- ग्रीनलैंड सिर्फ बर्फ का द्वीप नहीं है, बल्कि इसका सैन्य और रणनीतिक महत्व है।
- यह आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है इसलिए यहां से रूस और चीन की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है।
- अमेरिका की मिसाइल डिफेंस और रडार सिस्टम के लिए बेहद अहम है।
- अमेरिका यहां भविष्य के समुद्री रास्ते देखता है।
- बर्फ पिघलने से नए शिपिंग रूट्स खुल रहे हैं जो वैश्विक व्यापार को बदल सकते हैं
- ग्रीनलैंड दुर्लभ खनिज और संसाधनों का भंडार है।
- इसके रेयर अर्थ मिनरल्स तेल, गैस और रणनीतिक धातुओं पर अमेरिका, चीन और रूस की नजर है।
ट्रंप की धमकी
पहले ट्रंप सिर्फ बयान दे रहे थे, लेकिन अब उन्होंने सीधी धमकी दी है “अगर देश ग्रीनलैंड पर अमेरिका का समर्थन नहीं करते, तो मैं उन पर टैरिफ लगा सकता हूं। मैंने दवाओं के मामले में यूरोप को ऐसे ही झुकाया था।” यानी अब यह सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, आर्थिक दबाव और व्यापार युद्ध की चेतावनी है।
डेनमार्क की प्रतिक्रिया
ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन है। डेनमार्क ने साफ कर दिया है कि वह ग्रीनलैंड नहीं बेचेगा और वहां NATO की स्थायी सैन्य मौजूदगी बढ़ाएगा। यह सिर्फ ग्रीनलैंड का मुद्दा नहीं है। यह अमेरिका की वैश्विक दबदबा नीति, आर्कटिक पर नियंत्रण की लड़ाई, और भविष्य की सैन्य-आर्थिक प्रतिस्पर्धा का मुद्दा है।
