ईरान ने व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी को मां बनने की दी बधाई, साथ ही ताना भी मारा, कहा-‘जब भी बेटी को गले लगाएं तो...
punjabkesari.in Monday, May 11, 2026 - 02:24 PM (IST)
Washington: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक नया कूटनीतिक और भावनात्मक विवाद सामने आया है। ईरान ने व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी करोलाइन लेविट (Karoline Leavitt) को मां बनने पर बधाई तो दी, लेकिन साथ ही अमेरिका पर बच्चों की हत्या का गंभीर आरोप भी लगाया। दरअसल, करोलाइन लेविट ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी नवजात बेटी के जन्म की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी का नाम “Viviana” रखा गया है और परिवार बेहद खुश है।
Congratulations to you. Children are innocent and lovable. Those 168 children that your boss killed in the school in Minab, and you justified, were also children. When you kiss your baby, think of the mothers of those children. https://t.co/uhypZFhRRf
— IRI Embassy in Armenia (@iraninyerevan) May 9, 2026
इसके बाद आर्मेनिया में स्थित ईरानी दूतावास ने X पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि बच्चे मासूम होते हैं और मीनाब स्कूल में मारे गए 168 बच्चे भी किसी के प्यारे बच्चे थे। ईरानी पोस्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश पर हुए हमले में उन बच्चों की जान गई। ईरानी दूतावास ने लिखा, “जब आप अपनी बेटी को प्यार करें, तब उन माताओं का दर्द भी याद करें जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया।” ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, 28 फरवरी को मीनाब इलाके के एक स्कूल पर हुए हमले में 165 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल थे।
On May 1st, Viviana aka “Vivi” joined our family, and our hearts instantly exploded with love. 💕
— Karoline Leavitt (@karolineleavitt) May 7, 2026
She is perfect and healthy, and her big brother is joyfully adjusting to life with his new baby sister. We are enjoying every moment in our blissful newborn bubble.
Thank you to… pic.twitter.com/wM1P1zEGsa
तेहरान इस हमले के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराता है। हालांकि अमेरिका की तरफ से इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है और इसे ईरान की “भावनात्मक कूटनीति” के तौर पर देखा जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस तरह के संदेशों के जरिए वैश्विक सहानुभूति हासिल करने और अमेरिका पर नैतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
