Khamenei Net Worth: खामेनेई की मौत के बाद चर्चा में उनका कुबेर का खजाना, जानें कितनी थी ईरान के सुप्रीम लीडर की ताकत और दौलत?

punjabkesari.in Sunday, Mar 01, 2026 - 05:07 PM (IST)

Khamenei Net Worth : अमेरिका और इजरायल के भीषण हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबरों ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। 1989 से ईरान की सत्ता के शीर्ष पर काबिज खामेनेई न केवल एक धार्मिक और राजनीतिक शक्ति थे बल्कि वे दुनिया के सबसे गुप्त और शक्तिशाली वित्तीय नेटवर्क के नियंत्रक भी माने जाते थे।

कितनी थी खामेनेई की ताकत और दौलत?

सार्वजनिक जीवन में खामेनेई खुद को एक सादा जीवन जीने वाला धर्मगुरु बताते थे लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया और जांच एजेंसियों के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। 2013 की एक प्रसिद्ध जांच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि खामेनेई लगभग 95 बिलियन डॉलर (करीब 8.5 लाख करोड़ रुपये) की संपत्ति को नियंत्रित करते थे। हालिया रिपोर्टों में यह आंकड़ा बढ़कर 200 बिलियन डॉलर के पार बताया जा रहा है। अगर यह सच है तो वे दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की सूची में शामिल हो सकते थे।

कमाई का गुप्त जरिया: क्या है 'सेताद' (Setad)?

खामेनेई की संपत्ति उनके निजी बैंक खाते में नहीं बल्कि 'सेताद' (Setad Ejraiye Emam) नामक एक विशाल संगठन के जरिए चलती थी।

  1. जब्त संपत्तियों से शुरुआत: 1979 की ईरानी क्रांति के बाद जो संपत्तियां जब्त की गईं उन्हें इस संगठन के तहत लाया गया।

  2. सीधा नियंत्रण: यह संगठन ईरान की संसद या किसी एजेंसी को जवाबदेह नहीं था इसका रिमोट सीधे सुप्रीम लीडर के दफ्तर (बेय्त-ए-रहबरी) के पास था।

  3. हर सेक्टर में दखल: सेताद की जड़ें ईरान के तेल, गैस, बैंकिंग, टेलीकॉम, रियल एस्टेट और कृषि जैसे हर बड़े क्षेत्र में फैली हुई हैं।

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सादगी बनाम अरबों का साम्राज्य

खामेनेई के समर्थकों का हमेशा से दावा रहा है कि वे एक साधारण घर में रहते थे और उनके पास कोई निजी संपत्ति नहीं थी। हालांकि विदेशी विश्लेषकों का तर्क है कि 'स्वामित्व' (Ownership) और 'नियंत्रण' (Control) में फर्क होता है। भले ही कागजों पर संपत्ति उनके नाम न हो, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से पर उनका एकाधिकार था।

अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

तेल और गैस ईरान की रीढ़ हैं। सेताद के जरिए इन क्षेत्रों में निवेश ने खामेनेई के दफ्तर को इतनी वित्तीय ताकत दी कि वे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद देश की सत्ता और अपनी नीतियों को दशकों तक प्रभावी रूप से चलाने में सक्षम रहे।


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Content Editor

Rohini Oberoi

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