ग्रीनलैंड पर ट्रंप की धमकी से भड़के डेनमार्क के सैनिकः बोले-अमेरिका के लिए सबसे ज्यादा शहादत दी, फिर भी अपमान !
punjabkesari.in Saturday, Jan 31, 2026 - 07:30 PM (IST)
International Desk: ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप प्रशासन की आक्रामक बयानबाज़ी के खिलाफ डेनमार्क के सैकड़ों युद्ध-वयोवृद्धों ने शनिवार को कोपेनहेगन स्थित अमेरिकी दूतावास के बाहर मौन प्रदर्शन किया। इनमें वे सैनिक भी शामिल थे, जिन्होंने अफगानिस्तान और इराक जैसे युद्ध क्षेत्रों में अमेरिकी सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी थी। प्रदर्शनकारी सबसे पहले शहीद डेनिश सैनिकों के स्मारक पर एकत्र हुए और फिर मार्च करते हुए अमेरिकी दूतावास पहुंचे। वहां उन्होंने पांच मिनट डेनमार्क की सेना, वायुसेना, नौसेना, आपदा प्रबंधन एजेंसी और पुलिस के सम्मान में एक-एक मिनट का मौन।
Thousands and thousands of Danish veterans, their families, and supporters are standing together in Copenhagen, protesting Trump’s deeply disrespectful statements and his mockery of the sacrifices made by Danish men and women who fought in U.S. wars. ❤️ pic.twitter.com/oexmSfzHDR
— Pelle Dragsted (@pelledragsted) January 31, 2026
डेनिश वेटरन्स एंड वेटरन सपोर्ट संगठन ने बयान में कहा, “डेनमार्क हमेशा अमेरिका के साथ खड़ा रहा है। जब-जब अमेरिका ने दुनिया के संकट क्षेत्रों में बुलाया, हम पहुंचे। लेकिन ट्रंप प्रशासन अब जानबूझकर हमारे साथ किए गए सैन्य सहयोग और बलिदानों को नज़रअंदाज़ कर रहा है। यह हमारे लिए अपमानजनक और पीड़ादायक है।” वयोवृद्धों का गुस्सा इस बात को लेकर भी है कि व्हाइट हाउस की बयानबाज़ी ग्रीनलैंड के आत्मनिर्णय के अधिकार को नकारती है। डेनमार्क, नाटो का सहयोगी देश है और ग्रीनलैंड उसका स्वायत्त क्षेत्र है। इसके बावजूद ट्रंप द्वारा यह कहना कि डेनमार्क आर्कटिक क्षेत्र में पश्चिमी सुरक्षा हितों की रक्षा करने में असमर्थ है, सैनिकों को गहरे तक आहत कर गया।
डेनमार्क ने अफगानिस्तान में 44 सैनिक खोए जो गठबंधन सेनाओं में जनसंख्या के अनुपात में सबसे अधिक हताहतों में से एक है। वहीं इराक में भी आठ डेनिश सैनिक मारे गए थे।तनाव उस समय और बढ़ गया, जब मंगलवार को अमेरिकी दूतावास के सामने लगाए गए 44 डेनिश झंडों, जो अफगानिस्तान में शहीद हुए हर सैनिक की याद में थे, को दूतावास कर्मचारियों ने हटा दिया। बाद में अमेरिकी विदेश विभाग ने सफाई दी कि प्रदर्शन के बाद छोड़ी गई वस्तुओं को हटाना सामान्य प्रक्रिया है और झंडे वापस लौटा दिए गए हैं।हालांकि, डेनिश वयोवृद्धों का कहना है कि यह केवल झंडों का मामला नहीं, बल्कि सम्मान और बलिदान की पहचान का सवाल है।
