सोना-चांदी नहीं... इस देश में खीरे की कीमतों में आया बंपर उछाल, जानिए वजह

punjabkesari.in Wednesday, Feb 18, 2026 - 03:12 PM (IST)

नेशनल डेस्क :  रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बीच अब रूस में एक नई समस्या सामने आई है। सोने और चांदी की कीमतों की तरह ही सब्जियों के दामों में भी भारी उछाल देखने को मिल रहा है। विशेषकर खीरे की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी ने आम लोगों की जेब पर बड़ा असर डाला है। सोशल मीडिया पर लोग खीरे की तुलना लग्जरी और कीमती चीजों से कर रहे हैं और इसे मजाकिया अंदाज में 'नया सोना' बता रहे हैं।

खीरे की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस में खीरे की कीमत दिसंबर से दोगुनी होकर लगभग 300 रूबल प्रति किलोग्राम (करीब 356 रुपये) तक पहुंच गई है। कुछ खीरे तो इससे भी दो-तीन गुना महंगे बिक रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी की शुरुआत तक खीरे की कीमतें मीट और अन्य आयातित फलों जैसे केले के बराबर या उससे भी ज्यादा हो गई हैं। इस उछाल के कारण लोग सोशल मीडिया पर महंगी सब्जियों की तस्वीरें डाल रहे हैं और डार्क ह्यूमर के जरिए खीरे को लग्जरी आइटम बता रहे हैं।

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सरकार और राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस बढ़ोतरी का मुद्दा सिर्फ मार्केट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। जस्ट रशिया पार्टी के लीडर सर्गेई मिरोनाव ने सरकार पर निशाना साधा और कहा कि आम लोगों को रोजमर्रा की जरूरी चीजों के लिए भी मुश्किल हो रही है। उन्होंने सरकार के सीजनल फैक्टर्स वाले बयान की आलोचना की।

क्यों बढ़ी खीरे की कीमतें?

1. युद्ध और महंगाई : रूस की अर्थव्यवस्था युद्ध पर केंद्रित होने के कारण नॉन-मिलिट्री सेक्टर में कीमतों में तेजी आई।

2. मजदूरों की कमी : पहले ग्रीनहाउस उद्योग को सब्सिडी मिलती थी, लेकिन युद्ध और ड्राफ्टिंग के कारण लेबर की भारी कमी हुई।

3. टैक्स में बढ़ोतरी : 1 जनवरी 2026 से वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) 20% से बढ़ाकर 22% कर दिया गया, जिससे कंज्यूमर प्राइस पर दबाव बढ़ा।

4. मौसमी उतार-चढ़ाव : कृषि मंत्रालय ने इसका कारण सर्दियों के मौसम को बताया, लेकिन मौजूदा कीमतों की तेजी सामान्य मौसमी बदलाव से कहीं अधिक है।

भविष्य की उम्मीद

रिटेलर्स का मानना है कि जैसे ही मौसम गर्म होगा, खीरे की कीमतें कम हो सकती हैं। फिलहाल आम लोग महंगी सब्जियों और खीरे की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं, और सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।


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Content Editor

Mehak

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