नेपाल में तिब्बती शरणार्थियों पर चीन की ‘डिजिटल नजर’, रिपोर्ट ने बजाई खतरे की घंटी

punjabkesari.in Saturday, Jan 17, 2026 - 06:08 PM (IST)

International Desk: नेपाल में चीनी निगरानी तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत हुए निवेश और दोनों देशों के बीच बढ़ते सुरक्षा सहयोग ने ऐसी परिस्थितियां बना दी हैं, जिनमें नेपाल में रह रहे तिब्बती शरणार्थी अभूतपूर्व स्तर की निगरानी और नियंत्रण का सामना कर रहे हैं।

 

ऑनलाइन मैगज़ीन Bitterwinter.org में प्रकाशित लेख में शोधकर्ता तेनज़िन डाल्हा लिखते हैं कि काठमांडू में तिब्बती समुदायों पर लगाए गए चीनी सर्विलांस कैमरे सिर्फ एक कमजोर समुदाय को ही खतरे में नहीं डालते, बल्कि यह दिखाते हैं कि कैसे तकनीक को स्वतंत्रता, गरिमा और संप्रभुता को कमजोर करने के लिए हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, चीनी निर्मित निगरानी कैमरे खासतौर पर उन इलाकों में लगाए गए हैं जहां तिब्बती आबादी अधिक है जैसे बौद्ध मठ, सांस्कृतिक केंद्र और शरणार्थी बस्तियां। इन कैमरों के जरिए तिब्बतियों की धार्मिक गतिविधियों, सभाओं और राजनीतिक गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी संभव हो गई है।

 

सबसे गंभीर चिंता यह है कि इस निगरानी से जुटाया गया डेटा सीधे या नेपाल-चीन के बीच सूचना साझा करने के समझौतों के जरिए चीनी सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंच सकता है। डाल्हा के अनुसार, इसके असर केवल तिब्बती समुदाय तक सीमित नहीं हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यही कैमरे और फेशियल रिकग्निशन सिस्टम भविष्य में राजनीतिक असहमति को दबाने, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की गतिविधियों पर नजर रखने और नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी का विस्तृत डेटाबेस बनाने में भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

 

नेपाल में मजबूत डेटा सुरक्षा कानूनों, पारदर्शिता और स्वतंत्र निगरानी तंत्र की कमी के कारण यह सर्विलांस सिस्टम लगभग बिना किसी जवाबदेही के काम कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीनी तकनीकी कंपनियां लोकतांत्रिक देशों की कंपनियों की तरह सरकार से स्वतंत्र नहीं होतीं। लेख में यह भी बताया गया है कि दुनिया भर में चीनी निगरानी तकनीक के निर्यात पर प्रतिक्रिया असमान और कमजोर रही है। जहां अमेरिका ने हुआवेई जैसी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं और ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा जैसे सहयोगियों को भी सतर्क किया है, वहीं कई विकासशील देश कम लागत और BRI के तहत मिलने वाली फंडिंग के कारण चीनी तकनीक को अपनाते जा रहे हैं।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Tanuja

Related News