इंडो-पैसिफिक में यूरोपीय संघ के सैन्य फोकस से टेंशन में चीन

2021-06-19T13:37:07.35

पेरिस: इंडो-पैसिफिक में यूरोपीय संघ के सैन्य फोकस बढ़ाने पर चीन की टेंशन बढ़ गई है।  फ्रांस में एक चीनी राजनयिक ने हाल ही में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर यूरोपीय देशों के सैन्य ध्यान बढ़ाने  पर चिंता व्यक्त  करते हुए कहा कि यूरोपीय देशों  का  अब  एकमात्र उद्देश्य चीन को निशाना बनाना है।

 

फ्रांसीसी अखबार ल'ओपिनियन के साथ एक साक्षात्कार में राजदूत लू शाय ने कहा कि यूरोपीय देशों को हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ काम करना चाहिए। लू ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के हवाले से कहा, "हमें उम्मीद है कि यूरोपीय संघ और फ्रांस की इंडो-पैसिफिक रणनीति चीन के खिलाफ रणनीति के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग को बढ़ावा दे ।" उन्होंने कहा कि "दुर्भाग्य से अब तक चीन का केवल सैन्य पक्ष देखा गया है जबकि फ्रांस को आर्थिक और व्यापार सहयोग पर अधिक ध्यान देना चाहिए। " 

 

लू  की ये टिप्पणी  ग्रुप ऑफ सेवन (G7) द्वारा एक संयुक्त बयान जारी करने के कुछ दिनों बाद आई है, जिसमें उन्होंने पूर्वी और दक्षिण चीन समुद्र की स्थिति के बारे में गंभीर चिंता जताई थी।  G7 नेताओं ने इंडो-पैसिफिक में यथास्थिति को बदलने और तनाव बढ़ाने के किसी भी एकतरफा प्रयास का भी विरोध किया था। जानकारी के अनुसार यूरोपीय संघ का इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी पेपर यह स्पष्ट करता है कि यूरोप इस क्षेत्र में अपने प्रभाव को गहरा करने के लिए दृढ़ है।  इंडो-पैसिफिक में यूरोप की इस  दृढ़ता के पीछे  विदेशों में चीन की बढ़ती मुखरता और घर में बढ़ता दमन प्रमुख  कारण है।

 


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Content Writer

Tanuja

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