इन देशों में लग्जरी बन चुका है कंडोम और गर्भनिरोधक दवाएं, जानें कहां है यह सबसे महंगे?

punjabkesari.in Wednesday, Jan 07, 2026 - 04:31 PM (IST)

Craze For Luxury Condoms: दशकों तक 'वन चाइल्ड पॉलिसी' (One Child Policy) को सख्ती से लागू करने वाला चीन अब अपनी बूढ़ी होती आबादी और गिरती जन्म दर से घबराया हुआ है। शी जिनपिंग सरकार ने अब देश में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए एक ऐसा कदम उठाया है जिसने दुनिया को चौंका दिया है। 1 जनवरी 2026 से चीन ने गर्भनिरोधक दवाओं और उपकरणों पर मिलने वाली टैक्स छूट को खत्म कर दिया है।

चीन का नया फैसला: अब महंगा होगा सुरक्षित यौन संबंध

चीन सरकार ने जनसंख्या असंतुलन को रोकने के लिए गर्भनिरोधक साधनों पर 13 प्रतिशत वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) लगा दिया है। सरकार चाहती है कि युवा पीढ़ी कम गर्भनिरोधक साधनों का इस्तेमाल करे और ज्यादा बच्चे पैदा करे। अब कंडोम, गर्भनिरोधक गोलियां और अन्य सुरक्षा उपकरणों की कीमतों में भारी उछाल आएगा। इससे पहले चीन में इन चीजों पर टैक्स में बड़ी राहत दी जाती थी।

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वेनेजुएला: जहां कंडोम की कीमत ₹60,000 तक है

चीन तो अब टैक्स लगा रहा है लेकिन दुनिया में एक देश ऐसा भी है जहां कंडोम खरीदना किसी लग्जरी कार खरीदने जैसा है। वेनेजुएला में आर्थिक संकट के कारण हालात भयावह हैं। यहां कंडोम के एक पैकेट की कीमत भारतीय रुपयों में 60,000 रुपये तक पहुंच जाती है। बेकाबू महंगाई (Hyperinflation) और विदेशी मुद्रा की कमी। चूंकि यहां गर्भपात (Abortion) पूरी तरह गैरकानूनी है इसलिए लोग जेल जाने के डर से अपनी आधी सैलरी देकर भी कंडोम खरीदना मजबूरी समझते हैं।

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दुनिया के अन्य हिस्सों में क्या हैं हालात?

गर्भनिरोधक साधनों की उपलब्धता और कीमत हर देश की प्राथमिकता पर निर्भर करती है:

  • एशिया और अफ्रीका: भारत जैसे देशों में एचआईवी (HIV) और अनचाही प्रेग्नेंसी रोकने के लिए सरकारें मुफ्त या बेहद सस्ते कंडोम बांटती हैं।

  • यूरोप और अमेरिका: यहां जन स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाती है, इसलिए ये साधन आसानी से और कम दाम पर उपलब्ध हैं।

  • सप्लाई चेन की समस्या: कई अफ्रीकी देशों में टैक्स और खराब सप्लाई चेन की वजह से ये आज भी आम आदमी की पहुंच से बाहर हैं।

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कंडोम का बढ़ता ग्लोबल मार्केट

सुरक्षित यौन संबंधों के प्रति बढ़ती जागरूकता ने इसके वैश्विक बाजार को नई ऊंचाई दी है:

  • 2022 का बाजार: लगभग 8.38 बिलियन अमेरिकी डॉलर।

  • 2030 का अनुमान: करीब 13.06 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद।


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Content Editor

Rohini Oberoi

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