विश्व में इस देश की मज़ेदार अनोखी पहलः राष्ट्रपति चुनाव में पहली बार बच्चों ने भी किया मतदान ! सीखा लोकतंत्र का पाठ
punjabkesari.in Monday, Feb 09, 2026 - 11:05 AM (IST)
International Desk: पुर्तगाल में रविवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों पर एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला। अपने माता-पिता के साथ एक मतदान केंद्र पर पहुंचे बच्चों को भी ''मतदान'' करने का मौका दिया गया, हालांकि उनके मतपत्रों पर असली उम्मीदवारों के नाम नहीं थे। बच्चों के लिए बनाए गए खास मतपत्रों पर 'सुपर मारियो' और 'रोब्लॉक्स' जैसे लोकप्रिय काल्पनिक किरदारों के नाम थे। अभिभावकों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस कवायद से बच्चों को लोकतंत्र के बारे में सीखने का मौका मिलेगा। राजधानी लिस्बन के एक मतदान केंद्र ने बच्चों के लिए यह अनोखी पहल की, ताकि लोकतंत्र का पहला पाठ किताबों से नहीं बल्कि अनुभव से सिखाया जा सके।
Esto e explotación infantil y nadie lo dice. https://t.co/reBVT8h3eX
— Petronila (@CariaMandela) February 9, 2026
माना जा रहा है कि पुर्तगाल में चुनाव के दौरान पहली बार ऐसा प्रयोग किया गया और दुनिया के किसी अन्य देश में अभी ऐसा नहीं किया गया है। बच्चों के लिए बनाए गए मतपत्र पर लिखा था, ''अपने पसंदीदा किरदार को वोट दीजिए।'' आठ वर्षीय आर्तुर की मां कैटरीना बारबोसा ने इसे अपने बेटे के लिए सीखने का अच्छा अनुभव बताया। उन्होंने कहा, ''मैं हमेशा उसे साथ लाती हूं ताकि उसे प्रोत्साहन मिले। मैं चाहती हूं कि जब वह 18 साल का हो, तो घर पर सोफे पर बैठा न रहे बल्कि वोट डालने जरूर आए। यह मजेदार है क्योंकि इस तरह उसे भी लगता है कि वह मतदान कर रहा है और नागरिक के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है।''
The Portuguese voted in a presidential runoff to choose between moderate Socialist António José Seguro and far-right leader André Ventura, with opinion surveys pointing to a landslide victory for Seguro https://t.co/Ioqu92TZBm pic.twitter.com/OhY8Q4RuIN
— Reuters (@Reuters) February 8, 2026
आर्तुर ने बताया कि वह मतपत्र पर मौजूद सभी किरदारों को पहचानता है। नौ वर्षीय जोआओ और 11 साल की कैरोलिना के पिता जोआओ डियास ने भी बच्चों को वोट डालने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, ''बच्चों के लिए जरूरी है कि वे छोटी उम्र से ही जिम्मेदारी समझना शुरू करें, ताकि जब वे बड़े हों तो अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझ सकें।''
