VIDEO:बांके बिहारी मंदिर में सेवायतों से बदसलूकी, प्रशासनिक अधिकारियों ने मुख्य गोस्वामी के कपड़े फाडे़ ! देश-विदेशों के भक्तों में आक्रोश

punjabkesari.in Sunday, Jan 25, 2026 - 05:31 PM (IST)

International Desk: उत्तर प्रदेश के वृंदावन में विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में रविवार को  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दर्शन कार्यक्रम के दौरान उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब प्रशासनिक अधिकारियों ने मंदिर के  सेवायत गोस्वामियों के साथ  दुर्व्यवहार किया।  प्रशासनिक अधिकारियों ने सेवायत गोस्वामियों  को मंदिर से बाहर निकालने के लिए अभद्र व्यवहार किया व विरोध करने पर मुख्य सेवायत अनंत  गोस्वामी के साथ धक्का मुक्की की और उनके कपड़े तक फाड़ दिए। सेवायतों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी अचानक मंदिर परिसर में पहुंचे और सुरक्षा का हवाला देते हुए उन्हें जबरन बाहर निकालने लगे। विरोध करने पर मुख्य सेवायत अनंत (जौनी) गोस्वामी के साथ धक्का-मुक्की की गई और उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए। आरोप है कि कई सेवायतों को एक कमरे में बंद करने की भी कोशिश की गई।

 

सेवायत रजत गोस्वामी ने बताया कि सभी गोस्वामी रोज़ की तरह मंदिर सेवा के लिए उपस्थित थे और मुख्यमंत्री योगी से सामान्य रूप से मिलना चाहते थे। उनका न तो कोई ज्ञापन देने का इरादा था और न ही वे किसी विरोध की तैयारी में थे। इसके बावजूद प्रशासन ने उनके परिवारों और महिलाओं के साथ भी कठोर व्यवहार किया। सेवायत समाज का कहना है कि यह घटना बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर परियोजना विवाद से अलग नहीं है। लंबे समय से गोस्वामी समाज इस प्रस्तावित कॉरिडोर का विरोध कर रहा है। उनका तर्क है कि यह परियोजना मंदिर की परंपरागत व्यवस्था, सेवायत अधिकारों और श्री बांके बिहारी जी की निज सेवा प्रणाली को नुकसान पहुंचाएगी।सेवायतों का आरोप है कि प्रशासन लगातार दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि कॉरिडोर योजना को बिना सहमति लागू किया जा सके।

PunjabKesari

रविवार की घटना को वे उसी दबाव की एक कड़ी बता रहे हैं। वृंदावन के विश्वविख्यात श्री बांके बिहारी मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दर्शन से पहले सेवायत गोस्वामियों के साथ हुई कथित बदसलूकी की खबर ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के कृष्ण भक्तों के हृदय को झकझोर कर रख दिया है। अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं ने इस घटना पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया है। सोशल मीडिया, भक्त समूहों और मंदिर ट्रस्टों के माध्यम से भक्तों ने इसे “आस्था पर प्रशासनिक हमला” करार दिया है।विदेशी भक्तों का कहना है कि बांके बिहारी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भक्ति, परंपरा और जीवंत सेवा परंपरा का केंद्र है, जिसे सदियों से गोस्वामी परिवार निभाता आ रहा है। ऐसे में सेवायतों के साथ धक्का-मुक्की, कपड़े फाड़ने और उन्हें मंदिर से बाहर निकालने की खबरें अत्यंत पीड़ादायक हैं।

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

A post shared by Bankey bihari temple (@bankey_bihari_temple)

न्यूयॉर्क में रहने वाले एक कृष्ण भक्त ने भावुक संदेश में कहा, “हम हजारों मील दूर रहकर भी बांके बिहारी जी को अपने हृदय में बसाए हुए हैं। अगर वृंदावन में सेवायत सुरक्षित नहीं हैं, तो हमारी भक्ति भी असहाय महसूस करती है।” यूरोप के कई भक्त संगठनों ने सवाल उठाया कि क्या बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर योजना के नाम पर मंदिर की मूल आत्मा, निज सेवा प्रणाली और गोस्वामी अधिकारों को समाप्त किया जा रहा है। उनका कहना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन वह आस्था को कुचलकर नहीं होना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं ने यह भी चिंता जताई कि कॉरिडोर परियोजना के कारण मंदिर को धीरे-धीरे एक “प्रबंधित पर्यटन स्थल” में बदला जा रहा है, जबकि बांके बिहारी जी की परंपरा गोपनीयता, सहजता और भक्त-भगवान के निजी संबंध पर आधारित है।

PunjabKesari

ब्रिटेन स्थित एक भक्त समूह ने अपने बयान में कहा, “जब गोस्वामी रोते हैं, तो वृंदावन की गलियां रोती हैं और जब वृंदावन रोता है, तो दुनिया का हर कृष्ण भक्त आहत होता है।”इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या योगी सरकार की आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था भारत की आध्यात्मिक विरासत की संवेदनशीलता को समझ पा रही है या नहीं। दुनिया भर के भक्तों ने एक स्वर में अपील की है कि बांके बिहारी मंदिर में संवाद, सम्मान और परंपरा को प्राथमिकता दी जाए, न कि बल, डर और नियंत्रण को।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Tanuja

Related News