UK राजनीति में Shocking ऐलान:ब्रिटिश दूतावास पर हमले का दोषी आंतकी लड़ेगा चुनाव ! बोला-‘अल्लाह की मदद से जीतूंगा भी'
punjabkesari.in Thursday, Jan 29, 2026 - 05:12 PM (IST)
London: ब्रिटेन की राजनीति में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यमन में ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास, एक चर्च और एक होटल को उड़ाने की साजिश के लिए पांच साल जेल की सजा काट चुका एक दोषी आतंकी अब बर्मिंघम सिटी काउंसिल का चुनाव लड़ रहा है। टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन की स्थानीय राजनीति में एक बेहद विवादित घटनाक्रम सामने आया है। आतंकी साजिश में शामिल रहने के कारण जेल की सजा काट चुका शाहिद बट (60) अब बर्मिंघम सिटी काउंसिल का चुनाव लड़ने जा रहा है। वह खुद को “प्रो-गाजा उम्मीदवार” के तौर पर पेश कर रहा है।
🇬🇧 A convicted terrorist who was jailed for 5 years for conspiring to bomb the British consulate, a church, and a hotel in Yemen is now running for Birmingham city council.
— Mario Nawfal (@MarioNawfal) January 29, 2026
He's running in a district where almost two-thirds of residents have Pakistani background and thinks he's… pic.twitter.com/evoGXBoBxv
शाहिद बट को अतीत में हथियारबंद आतंकी साजिश से जुड़े मामले में जेल भेजा गया था। हालांकि अब उसने दावा किया है कि उसने अपने जीवन के शुरुआती दौर में “गंभीर गलतियां” की थीं, जिनका उसे पछतावा है। बट का कहना है कि वह अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए लोगों की सेवा करना चाहता है।उसने दावा किया है कि वह “अल्लाह की मदद से” चुनाव जीतेगा। वह स्पार्कहिल इलाके से चुनाव लड़ रहा है, जहां लगभग दो-तिहाई आबादी पाकिस्तानी पृष्ठभूमि से जुड़ी बताई जाती है। यही वजह है कि उसकी उम्मीदवारी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी बहस शुरू हो गई है।
आलोचकों का कहना है कि यह मामला ब्रिटेन की उम्मीदवारों की जांच (वेटिंग) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सोशल मीडिया पर भी लोग पूछ रहे हैं कि एक सजायाफ्ता आतंकी को चुनाव लड़ने की अनुमति कैसे दी जा सकती है।फिलहाल, यह मामला ब्रिटेन में सुरक्षा, राजनीति और लोकतंत्र के टकराव का प्रतीक बनता जा रहा है और आने वाले चुनावों में इस पर बहस और तेज होने की संभावना है। इस घटनाक्रम ने ब्रिटेन में चुनावी उम्मीदवारों की जांच (वेटिंग) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग हैरानी जता रहे हैं कि एक सजायाफ्ता आतंकी को स्थानीय चुनाव लड़ने की अनुमति कैसे मिली।
