अमेरिका-इजराइल में ईरान लेकर बढ़ रहे मतभेद; ट्रंप ने चली नई चाल, नेतन्याहू पर ही लगा दिया दांव

punjabkesari.in Tuesday, Jun 02, 2026 - 01:15 PM (IST)

Washington: मध्य पूर्व की राजनीति में एक नया मोड़ आता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यह दावा कि उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बेरूत पर बड़े हमले से रोक दिया, केवल एक सैन्य फैसले की कहानी नहीं है। कई विश्लेषक इसे ईरान को लेकर अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते मतभेदों के संकेत के रूप में देख रहे हैं।

 

ट्रंप की प्राथमिकता 
व्हाइट हाउस की मौजूदा रणनीति का केंद्र ईरान के साथ किसी प्रकार का समझौता और क्षेत्रीय तनाव को सीमित रखना है। अमेरिका की चिंता यह है कि इजराइल का लेबनान या ईरान समर्थित समूहों पर बड़ा हमला  ईरान-अमेरिका वार्ता को पूरी तरह पटरी से उतार सकता है। तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजारों को झटका दे सकता है और पूरे मध्य पूर्व को बड़े युद्ध में धकेल सकता है। इसी वजह से ट्रंप लगातार कूटनीतिक रास्ता खुला रखना चाहते हैं।

 

नेतन्याहू की सोच अलग  
दूसरी ओर नेतन्याहू और उनकी सरकार का मानना है कि  ईरान क्षेत्र में सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा है। हिजबुल्ला, हमास और अन्य समूहों पर दबाव कम करना इजराइल के लिए जोखिम भरा होगा। सैन्य कार्रवाई ही ईरान समर्थित नेटवर्क को कमजोर करने का सबसे प्रभावी तरीका है। यही कारण है कि इजराइल लेबनान और गाजा में सैन्य अभियान जारी रखने के पक्ष में दिखाई देता है।

 

बेरूत हमला रोकना सिर्फ सैन्य फैसला नहीं
ट्रंप का नेतन्याहू को फोन करना और हमले को टालने का दावा एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार यह संदेश तीन स्तरों पर था 

ईरान को संकेतः अमेरिका अभी भी बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहता है।
अरब देशों को संदेशः वाशिंगटन क्षेत्रीय युद्ध नहीं चाहता।
इजराइल को चेतावनीः अमेरिकी रणनीति से अलग जाकर कदम उठाना आसान नहीं होगा।

 

क्या ट्रंप ने नेतन्याहू पर दबाव बनाया?
रिपोर्टों के अनुसार दोनों नेताओं के बीच बातचीत काफी तनावपूर्ण रही। यदि यह सही है, तो यह दिखाता है कि अमेरिका और इजराइल के रिश्ते मजबूत होने के बावजूद दोनों देशों की प्राथमिकताएं हर मुद्दे पर एक जैसी नहीं हैं। ट्रंप जानते हैं कि यदि ईरान के साथ टकराव और बढ़ा तो तेल की कीमतें उछल सकती हैं जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है और अमेरिका भी सीधे संकट में खिंच सकता है।

 

भारत के लिए क्यों अहम यह घटनाक्रम?
भारत की नजर से देखें तो यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भर है। होर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत के व्यापार से जुड़ी है। क्षेत्रीय युद्ध बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों पर भी असर पड़ सकता है।पहली बार ऐसा लग रहा है कि ईरान मुद्दे पर अमेरिका और इजराइल के लक्ष्य पूरी तरह समान नहीं हैं। ट्रंप जहां तनाव कम करके कूटनीतिक सफलता चाहते हैं, वहीं नेतन्याहू ईरान समर्थित ताकतों के खिलाफ सैन्य दबाव बनाए रखने के पक्ष में दिख रहे हैं। यही वजह है कि बेरूत पर हमला टालने की घटना को सिर्फ एक सैन्य निर्णय नहीं, बल्कि अमेरिका-इजराइल संबंधों में उभरते रणनीतिक मतभेदों की झलक माना जा रहा है।

 


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Content Writer

Tanuja

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