बांग्लादेश बना चीनी साइबर ठगों का नया ठिकाना; 6 गिरफ्तार व 300 से ज्यादा संदिग्ध फरार, हजारों iPhone बरामद
punjabkesari.in Tuesday, Sep 08, 2026 - 06:26 PM (IST)
Dhaka: बांग्लादेश के मशहूर पर्यटन क्षेत्र कॉक्स बाजार में पुलिस की एक कार्रवाई ने देश में तेजी से फैल रहे अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने एक होटल पर छापा मारकर करीब 1,938 iPhone, दर्जनों कंप्यूटर और लैपटॉप बरामद किए हैं। जांचकर्ताओं का मानना है कि यहां बड़े पैमाने पर ऑनलाइन धोखाधड़ी का नेटवर्क चलाया जा रहा था। 4 सितंबर को मामले में गिरफ्तार पांच चीनी नागरिकों और एक ताइवानी नागरिक को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क से जुड़े करीब 250 से 300 अन्य लोग, जिनमें ज्यादातर चीनी और ताइवानी नागरिक बताए जा रहे हैं, अभी फरार हैं। पुलिस की जांच में सामने आया कि कॉक्स बाजार के मरीन ड्राइव इलाके में स्थित Marina Beach Villas Resort के एक हॉल को बाकायदा कंप्यूटर सेंटर में बदल दिया गया था।
यहां से पुलिस को करीब 1,938 iPhone, 50 मॉनिटर, 44 CPU, 30 कीबोर्ड, दो लैपटॉप, दो प्रिंटर और 24 कनेक्शन बोर्ड मिले। इतने बड़े पैमाने पर मोबाइल और कंप्यूटर उपकरण मिलने से जांचकर्ताओं को शक है कि इस जगह से एक साथ बड़ी संख्या में ऑनलाइन अकाउंट और डिजिटल पहचानें संचालित की जा रही थीं।शुरुआत में पुलिस को ऑनलाइन जुए का शक था। लेकिन अब Counter Terrorism and Transnational Crime (CTTC) यूनिट निवेश धोखाधड़ी समेत कई साइबर अपराधों की जांच कर रही है। जांच में फर्जी मार्केट एनालिसिस, नकली निवेश ऑफर और क्लोन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल का शक सामने आया है। जांचकर्ताओं को 'एग्जिट फ्रॉड' की भी आशंका है। इसमें ठग पहले लोगों को किसी फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने के लिए तैयार करते हैं और जब पर्याप्त रकम जमा हो जाती है तो पूरा प्लेटफॉर्म गायब कर दिया जाता है। यह तरीका एशिया में तेजी से फैल रहे 'पिग-बुचरिंग स्कैम' से मिलता-जुलता है।
ऐसे मामलों में ठग पहले पीड़ित का भरोसा जीतते हैं और फिर धीरे-धीरे उसे फर्जी निवेश में बड़ी रकम लगाने के लिए तैयार करते हैं। पुलिस को परिसर से दो चीनी झंडे, चीनी पुलिस रैंक का बैज और पुलिस चिन्ह वाली टाई भी मिली है। जांचकर्ताओं को शक है कि इनका इस्तेमाल चीनी नागरिकों को निशाना बनाने वाले ऐसे फ्रॉड में किया जा सकता था, जिसमें ठग खुद को पुलिस या कानून लागू करने वाली एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ितों से पैसे ऐंठते हैं। हालांकि, इस पहलू की भी अभी जांच चल रही है। जांच में यह भी सामने आया कि नेटवर्क कथित तौर पर केवल एक जगह तक सीमित नहीं था। पुलिस के अनुसार, Dream Holiday Resort और Orchid Blue समेत कई अन्य संपत्तियों और 'Ilyas Brothers' के नाम से पहचानी जाने वाली एक इमारत में भी इस समूह के लोग रह रहे थे। बताया जा रहा है कि मार्च से बड़ी संख्या में चीनी और ताइवानी नागरिक इन जगहों पर रह रहे थे। पुलिस अभी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनमें से कितने लोग वास्तव में साइबर अपराध में शामिल थे।
पुलिस के मुताबिक मुख्य संपत्ति को अप्रैल में एक चीनी नागरिक ने कथित तौर पर 'बाबोर अली' नाम के फर्जी नाम से किराए पर लिया था। एक अन्य व्यक्ति ने खुद को 'Jin Shin Construction' नाम की कंपनी का प्रतिनिधि बताया, लेकिन जांचकर्ताओं को ऐसी कंपनी के अस्तित्व का प्रमाण नहीं मिला। पुलिस का कहना है कि विदेशी नागरिकों से जुड़े जरूरी पासपोर्ट और वीजा दस्तावेज स्थानीय पुलिस को उपलब्ध नहीं कराए गए थे। इससे पहले दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में ऑनलाइन स्कैम नेटवर्क अब छोटे-मोटे साइबर फ्रॉड से आगे बढ़कर मानव तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी निवेश और संगठित अपराध का बड़ा नेटवर्क बन चुके हैं। म्यांमार और कंबोडिया इसके बड़े उदाहरण हैं। वहां बड़े-बड़े स्कैम सेंटर बनाए गए, जहां लोगों को नौकरी का झांसा देकर लाया गया और कई मामलों में उन्हें जबरन साइबर ठगी करने के लिए मजबूर किया गया।
