प्यार में एक उम्मीद ऐसी भीः डॉक्टर बोले-आपका पति सिर्फ जिंदा लाश इसलिए..., पत्नी ने दिया दिल छू लेने वाला जवाब
punjabkesari.in Sunday, May 31, 2026 - 12:01 PM (IST)
International Desk: कभी-कभी जिंदगी ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है, जहां विज्ञान और भावनाओं के बीच एक लंबी लड़ाई शुरू हो जाती है। अमेरिका में एक ऐसी प्रेम कहानी सामने आई है, जिसने लाखों लोगों को भावुक कर दिया है। डॉक्टरों ने जब कोमा में पड़े आरोन विलियम्स को "सिर्फ जिंदा लाश" जैसा बताते हुए उनकी पत्नी टैबिता विलियम्स को उम्मीद छोड़ने की सलाह दी, तब उन्होंने हार मानने से इनकार कर दिया।उनके पति आरोन विलियम्स पिछले डेढ़ साल से कोमा में हैं, लेकिन टैबिता आज भी मानती हैं कि उनका पति कहीं न कहीं भीतर मौजूद है और उन्हें सुन रहा है।
अक्टूबर 2024 में एक यात्रा के दौरान अचानक आरोन को कार्डियक अरेस्ट आया। डॉक्टरों ने पांच बार प्रयास करके उनका दिल फिर से धड़काया, लेकिन इस दौरान उनके मस्तिष्क को लंबे समय तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल सकी। नतीजा यह हुआ कि वे गहरे कोमा में चले गए। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को "पर्सिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट" बताया। यह वह अवस्था होती है जिसमें मरीज की आंखें खुल सकती हैं, लेकिन वह बाहरी दुनिया से कोई स्पष्ट संपर्क नहीं कर पाता। टैबिता बताती हैं कि अस्पताल में 11 दिन बीतने के बाद डॉक्टरों ने उनसे कहा कि अब उन्हें फैसला करना होगा कि पति को कब तक लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा जाए। उनके सामने दो रास्ते थे या तो मशीनें हटाकर उन्हें अलविदा कह दें, या फिर अनिश्चित भविष्य के साथ संघर्ष जारी रखें।
टैबिता ने दूसरा रास्ता चुना
वह कहती हैं, "जब तक उम्मीद की एक किरण भी बाकी है, मैं उन्हें छोड़ नहीं सकती।" पति की हालत को समझने के लिए टैबिता ने न्यूरोलॉजी और मस्तिष्क विज्ञान पर पढ़ना शुरू किया। इसी दौरान उन्हें "कोवर्ट कॉन्शसनेस" यानी गुप्त चेतना पर हुए शोध के बारे में पता चला। इन अध्ययनों में पाया गया कि कुछ ऐसे मरीज, जो बाहर से पूरी तरह अचेत दिखाई देते हैं, वास्तव में अंदर से सब कुछ सुन और समझ रहे होते हैं। उनका दिमाग सक्रिय होता है, लेकिन शरीर प्रतिक्रिया देने में असमर्थ होता है। वैज्ञानिक इसे "कॉग्निटिव मोटर डिसोसिएशन" कहते हैं। एक शोध में डॉक्टरों ने कोमा में पड़े मरीजों से कहा कि वे कल्पना करें कि वे टेनिस खेल रहे हैं। आश्चर्यजनक रूप से उनके मस्तिष्क के वही हिस्से सक्रिय हो गए जो सामान्य व्यक्ति में टेनिस की कल्पना करते समय सक्रिय होते हैं।
उम्मीद की नई लौ
यहीं से टैबिता के भीतर उम्मीद की नई लौ जली। उन्होंने पति के साथ बातचीत के वीडियो रिकॉर्ड करने शुरू किए। कई बार वह कहतीं-मुंह खोलो बेबी" और आरोन हल्का सा मुंह खोल देते। डॉक्टर इसे केवल रिफ्लेक्स बताते हैं, लेकिन टैबिता को इन छोटी-छोटी प्रतिक्रियाओं में चेतना की झलक दिखाई देती है। आज भी वह एडवांस ब्रेन स्कैन करवाने की कोशिश कर रही हैं ताकि यह पता चल सके कि कहीं उनके पति भीतर से सचेत तो नहीं हैं। हालांकि कई डॉक्टर इस दिशा में आगे बढ़ने को तैयार नहीं हैं। इस संघर्ष के दौरान उन्हें उन परिवारों का भी समर्थन मिला जिन्होंने पहले ऐसी ही परिस्थितियों का सामना किया था।
पूरी दुनिया से लड़ूंगी
टैबिता कहती हैं, "मैं उन्हें केवल इसलिए जीवित नहीं रखना चाहती क्योंकि मैं उनसे प्यार करती हूं। मैं सिर्फ यह जानना चाहती हूं कि क्या वह अब भी वहां हैं। अगर वह भीतर से होश में हैं, तो मैं उन्हें वापस लाने के लिए पूरी दुनिया से लड़ूंगी। लेकिन अगर वह वहां नहीं हैं, तो मैं उन्हें शांति से जाने दूंगी।" आज भी वह हर दिन उनके पास बैठती हैं, उनका हाथ थामती हैं और धीरे से कहती हैं -"कल्पना करो आरोन... तुम टेनिस खेल रहे हो... मैं यहीं हूं।" यह सिर्फ एक पत्नी की कहानी नहीं, बल्कि उस उम्मीद की कहानी है जो विज्ञान के जवाब खत्म हो जाने के बाद भी सांस लेती रहती है। कभी-कभी प्यार, मशीनों और मेडिकल रिपोर्टों से भी ज्यादा देर तक जिंदा रहता है।
