जिसे गणित में मिले थे सिर्फ 51 अंक उसी ने रचा इतिहास; पवन ने अंतरिक्ष में भारत को दिया नया आयाम, असफल युवाओं के लिए बना मिसाल
punjabkesari.in Saturday, Jul 18, 2026 - 05:42 PM (IST)
International Desk: भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए आज का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब Skyroot Aerospace द्वारा विकसित विक्रम-I रॉकेट ने सफलतापूर्वक अंतरिक्ष तक पहुंचकर नया रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यह भारत का पहला निजी तौर पर विकसित रॉकेट है, जिसने देश के निजी अंतरिक्ष उद्योग को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है। इस सफलता के केंद्र में हैं पवन कुमार चंदाना-एक IITian, पूर्व ISRO वैज्ञानिक और अब सफल उद्यमी। उनकी कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, क्योंकि कभी गणित में सिर्फ 51 अंक पाने वाले छात्र ने आज भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को नई ऊंचाई दी है।हैदराबाद के एक मध्यमवर्गीय परिवार में पले-बढ़े पवन बचपन से मशीनों और तकनीक को समझने में रुचि रखते थे। शुरुआत में गणित उनका मजबूत विषय नहीं था, लेकिन जिज्ञासा और लगातार मेहनत ने धीरे-धीरे विज्ञान और गणित को उनकी ताकत बना दिया।
#Watch | 🚀 'Zero delay in launch authorisation'
— Moneycontrol (@moneycontrolcom) July 18, 2026
Following Vikram-1's successful orbital mission, Skyroot Aerospace CEO Pawan Kumar Chandana hailed India's efficient regulatory ecosystem, saying the company received launch clearance without any delay—a stark contrast to the… pic.twitter.com/9LjCR0k1Kx
करीब दो दशक पहले उन्होंने IIT खड़गपुर की प्रवेश परीक्षा पहले ही प्रयास में पास की। इंजीनियरिंग के बाद उनका सपना अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने का था, जिसके चलते उन्हें ISRO में सीधे कैंपस से भर्ती मिली। ISRO में उन्होंने GSLV Mk III जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम किया और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में छह वर्षों तक रॉकेट डिजाइन और विकास का अनुभव हासिल किया। इसी दौरान उनके मन में विचार आया कि क्या भारत में निजी क्षेत्र भी विश्वस्तरीय रॉकेट बना सकता है।इसी सोच के साथ 2018 में उन्होंने साथी ISRO इंजीनियर नागा भारथ डाका के साथ Skyroot Aerospace की स्थापना की। शुरुआती दिनों में फंडिंग और भरोसा जुटाना बड़ी चुनौती थी, लेकिन कंपनी ने धीरे-धीरे भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली।
🚀🇮🇳 A call after a historic milestone!
— Moneycontrol (@moneycontrolcom) July 18, 2026
Prime Minister Narendra Modi congratulated Skyroot Aerospace over a telephone call after Vikram-1, India's first privately developed orbital-class rocket, successfully reached orbit following its launch from the Satish Dhawan Space Centre… pic.twitter.com/zUMi8gLjGp
विक्रम-I की सफलता ने साबित कर दिया कि भारतीय निजी कंपनियां भी अंतरिक्ष प्रक्षेपण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सफलता के बाद Skyroot के संस्थापकों से बात कर उन्हें बधाई दी और कहा कि उन्होंने अंतरिक्ष में नया वृक्ष रोपने के साथ अगली पीढ़ी के लिए नई जड़ें भी मजबूत की हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विक्रम-I का सफल प्रक्षेपण भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए वही महत्व रखता है, जो कभी ISRO की शुरुआती उपलब्धियों ने राष्ट्रीय स्तर पर रखा था। पवन कुमार चंदाना की यात्रा यह संदेश देती है कि कम अंक या शुरुआती असफलताएं अंतिम मंजिल तय नहीं करतीं-दृढ़ संकल्प और लगातार मेहनत किसी भी सपने को अंतरिक्ष तक पहुंचा सकती है।
