'1970 जैसा संकट फिर आ रहा है...' सिंगापुर के PM ने दुनिया को दी बड़ी चेतावनी

punjabkesari.in Friday, May 15, 2026 - 05:54 AM (IST)

सिंगापुर/नई दिल्ली: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर जारी संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि यह नाकेबंदी लंबे समय तक जारी रही, तो दुनिया 1970 के दशक जैसे तेल संकट के मुहाने पर खड़ी होगी। उन्होंने आशंका जताई है कि आने वाले दिनों में ईंधन की भारी किल्लत, आसमान छूती महंगाई और भीषण आर्थिक मंदी (Stagflation) का सामना करना पड़ सकता है।

दो महीने से बंद है 'समंदर की लाइफलाइन', एशिया पर सबसे ज्यादा मार
खाड़ी संकट पर अपने संबोधन में वोंग ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पिछले दो महीने से अधिक समय से बंद है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि खाड़ी देशों से होने वाले आयात पर निर्भर एशियाई अर्थव्यवस्थाएं इस संकट से सबसे ज्यादा और बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। पिछले दो महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50% का जबरदस्त उछाल आया है, जिससे तेल आयातक देशों पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ गया है।

सिर्फ तेल ही नहीं, थाली और तरक्की पर भी होगा हमला
प्रधानमंत्री वोंग ने आगाह किया कि यह रुकावट केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी। इसके घातक परिणाम अन्य क्षेत्रों में भी दिखने लगे हैं:

  • हवाई सफर और उद्योग: एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें कम कर दी हैं और फैक्ट्रियों में उत्पादन में देरी की खबरें आ रही हैं।
  • जरूरी सामान: उर्वरक (Fertilizer), खाद्य पदार्थ और अन्य आवश्यक वस्तुओं की भी भारी कमी होने की आशंका है।
  • स्टैगफ्लेशन का खतरा: वोंग ने पुराने दिनों की याद दिलाते हुए कहा कि दुनिया एक बार फिर 'स्टैगफ्लेशन' (महंगाई और मंदी का एक साथ होना) की चपेट में आ सकती है, जो व्यवसायों और श्रमिकों के लिए बेहद कष्टदायक होगा।

रातों-रात नहीं सुधरेंगे हालात, सामान्य होने में लगेंगे महीने
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यदि आज यह समुद्री मार्ग खुल भी जाए, तो भी स्थिति सामान्य होने में कई महीने लग जाएंगे। वोंग के अनुसार, बंदरगाहों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) को भारी नुकसान पहुंचा है और समुद्री रास्तों से मलबे को साफ करना होगा। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए दोबारा बीमा उपलब्ध कराना और विश्वास बहाल करना एक लंबी प्रक्रिया होगी, जो रातों-रात संभव नहीं है।


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Content Writer

Pardeep

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