वैज्ञानिकों का भयावह अलर्टः दुनिया भर की नदियों का घुट रहा दम, सबसे ज्यादा संकट में गंगा !
punjabkesari.in Saturday, May 16, 2026 - 12:53 PM (IST)
International Desk: दुनियाभर में बढ़ते जलवायु परिवर्तन ने अब नदियों के अस्तित्व पर भी बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में खुलासा हुआ है कि पृथ्वी का तापमान बढ़ने के कारण नदियों में ऑक्सीजन की मात्रा लगातार घट रही है, जिससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों के जीवन पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। यह अध्ययन चीन के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया, जिसमें उपग्रहों और कृत्रिम मेधा (AI) की मदद से वर्ष 1985 से दुनिया की 21,000 से अधिक नदियों के ऑक्सीजन स्तर का विश्लेषण किया गया। यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Science Advances में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के अनुसार, पिछले चार दशकों में दुनियाभर की नदियों में ऑक्सीजन का स्तर औसतन 2.1 प्रतिशत तक घट चुका है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह गिरावट भले छोटी दिखे, लेकिन इसका असर बेहद खतरनाक हो सकता है। यदि यही रफ्तार जारी रही तो इस सदी के अंत तक भारत, पूर्वी अमेरिका और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की कई नदियां इतनी ऑक्सीजन खो देंगी कि वहां मछलियों का जीवित रहना मुश्किल हो जाएगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक, गर्म पानी में ऑक्सीजन कम घुलती है। जलवायु परिवर्तन के कारण नदियों का पानी लगातार गर्म हो रहा है, जिससे ऑक्सीजन वातावरण में निकल जाती है। इसके अलावा उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग, शहरों का गंदा पानी, बांध निर्माण और जल प्रवाह में बदलाव भी संकट को बढ़ा रहे हैं। शोध में पाया गया कि इस समस्या का लगभग 63 प्रतिशत कारण पानी का गर्म होना है।
गंगा पर सबसे बड़ा खतरा
अध्ययन में भारत की गंगा नदी (Ganga River) को लेकर सबसे गंभीर चेतावनी दी गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस सदी की शुरुआत में गंगा में ऑक्सीजन की कमी वैश्विक औसत से 20 गुना तेज गति से दर्ज की गई। यदि कार्बन उत्सर्जन इसी तरह बढ़ता रहा तो भारत समेत कई क्षेत्रों की नदियां अपनी लगभग 10 प्रतिशत ऑक्सीजन खो सकती हैं। इससे बड़े पैमाने पर मछलियों की मौत, जैव विविधता में गिरावट और पानी की गुणवत्ता खराब होने का खतरा बढ़ जाएगा। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि भविष्य में कई नदियां “डेड ज़ोन” यानी जीवनविहीन क्षेत्र बन सकती हैं, जहां ऑक्सीजन इतनी कम होगी कि जलीय जीवन लगभग खत्म हो जाएगा।
ऐसी स्थिति पहले से Gulf of Mexico, Chesapeake Bay और Lake Erie जैसे क्षेत्रों में देखी जा चुकी है। अध्ययन के प्रमुख लेखक Chi Guan ने कहा कि डीऑक्सीजनेशन धीमी प्रक्रिया जरूर है, लेकिन लंबे समय तक जारी रहने पर यह नदियों के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर सकती है। वहीं Duke University की पारिस्थितिकीविद Emily Bernhardt ने कहा कि नदियों का बढ़ता तापमान पहले से मौजूद प्रदूषण को और खतरनाक बना रहा है। उनके अनुसार, अब प्रदूषण नियंत्रण पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।
