13 साल के लड़के ने बचाई पूरे परिवार की जान, 4 घंटे तैरकर उफनते समंदर से जीती जंग

punjabkesari.in Wednesday, Feb 04, 2026 - 06:33 PM (IST)

नेशनल डेस्क : पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के समुद्री तट पर एक 13 वर्षीय किशोर ने वह कर दिखाया, जो बड़े-बड़े अनुभवी तैराकों के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं। तेज हवाओं, ऊंची लहरों और ठंडे पानी के बीच इस बच्चे ने चार घंटे तक लगातार तैरकर न सिर्फ तट तक पहुंच बनाई, बल्कि अपनी सूझबूझ से पूरे परिवार की जान बचा ली। आज उसकी बहादुरी की चर्चा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में हो रही है। यह घटना तब हुई, जब पर्थ का एक परिवार समुद्र में घूमने निकला था। शुक्रवार सुबह होटल से किराए पर ली गई कयाक और पैडलबोर्ड्स पर सैर शुरू हुई, लेकिन कुछ ही घंटों में मौसम ने करवट ले ली। दोपहर होते-होते तेज हवाओं और उग्र लहरों ने समुद्र को खतरनाक बना दिया और पूरा परिवार खुले पानी में बहने लगा।

मदद लाने की जिम्मेदारी 13 साल के कंधों पर

स्थिति बिगड़ती देख मां जोआन एपलबी ने सबसे बड़े बेटे ऑस्टिन एपलबी से तट तक पहुंचकर मदद बुलाने को कहा। यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन हालात ने यही रास्ता छोड़ा।
ऑस्टिन बिना किसी सुरक्षा साधन के उफनते समुद्र में कूद पड़ा। लगभग चार किलोमीटर तक उसने जान की परवाह किए बिना तैराकी की। रास्ते में उसके पास मौजूद इन्फ्लेटेबल कयाक में पानी भरने लगा, तो उसे छोड़ना पड़ा। लाइफ जैकेट भी तैरने में बाधा बन रही थी, इसलिए उसे उतार दिया।

“बस तैरते रहो”- यही मंत्र बना सहारा

ऑस्टिन ने बाद में बताया कि लहरें बेहद ऊंची और डरावनी थीं। उसके दिमाग में सिर्फ एक ही बात चल रही थी- “रुकना नहीं है, बस तैरते रहना है।” चार घंटे की मशक्कत के बाद जब वह किसी तरह तट तक पहुंचा, तो थकान के कारण वहीं रेत पर गिर पड़ा। इसके बावजूद उसने हिम्मत जुटाकर तुरंत अधिकारियों को सूचना दी।

10 घंटे बाद मिला परिवार, ठंड से कांपते मिले बच्चे

ऑस्टिन के अलर्ट के बाद पुलिस और राहत-बचाव टीमें सक्रिय हुईं। करीब साढ़े आठ बजे शाम को हेलीकॉप्टर ने समुद्र में बह रहे परिवार को खोज निकाला। मां जोआन (47), बेटा ब्यू (12) और बेटी ग्रेस (8) तट से लगभग 14 किलोमीटर दूर थे और करीब 10 घंटे से पानी में फंसे हुए थे। ठंड और थकान से तीनों कांप रहे थे, ब्यू के पैर सुन्न हो चुके थे। पुलिस इंस्पेक्टर जेम्स ब्रैडली ने कहा, “इस 13 साल के लड़के की हिम्मत और जज्बे की जितनी तारीफ की जाए, कम है। उसी के साहस ने उसके परिवार को दोबारा जिंदगी दी।”

मां बोलीं- मेरे तीनों बच्चे जिंदा हैं, यही सबसे बड़ी जीत

मां जोआन ने कहा कि उस वक्त उनके पास सबसे बड़े बेटे को मदद के लिए भेजने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। “हम बच्चों को अकेला नहीं छोड़ सकते थे। हमने उम्मीद नहीं छोड़ी, खुद को संभाले रखा, गाने गाए, हिम्मत बनाए रखी।” ऑस्टिन ने इसे अपने जीवन का सबसे कठिन फैसला बताया, लेकिन कहा कि वह दोबारा भी वही करता।

चारों परिवार के सदस्यों की मेडिकल जांच की गई। सौभाग्य से किसी को भी अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ी। यह कहानी अब सिर्फ एक हादसे की नहीं, बल्कि साहस, जिम्मेदारी और अदम्य हौसले की मिसाल बन चुकी है।


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News Editor

Parveen Kumar

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