PAK : मरीजों की जान खतरे में! बिना डिग्री वाले 6 लाख डॉक्टर कर रहे इलाज
punjabkesari.in Friday, Jan 23, 2026 - 06:11 PM (IST)
नेशनल डेस्क: पाकिस्तान के गांवों और कस्बों में इलाज के नाम पर एक बेहद खतरनाक और अनदेखा संकट गहराता जा रहा है। बिना डिग्री, बिना लाइसेंस और बिना किसी निगरानी के हजारों लोग खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इस अवैध व्यवस्था का सबसे बड़ा खामियाजा गरीब और कम पढ़े-लिखे परिवारों को भुगतना पड़ रहा है, जिनके लिए यही फर्जी क्लिनिक आखिरी उम्मीद बन जाते हैं।
दक्षिणी सिंध प्रांत के हैदराबाद और उसके आसपास के इलाकों में सड़क किनारे बने छोटे-छोटे क्लिनिक आम नजर आते हैं। इन दुकानों पर न तो किसी डॉक्टर का नाम लिखा होता है और न ही कोई पंजीकरण नंबर। दिनभर यहां मरीजों की भीड़ लगी रहती है, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल होते हैं। इन क्लिनिकों को चलाने वाले कई लोग कभी अस्पतालों में सहायक या नर्स के रूप में काम कर चुके होते हैं, लेकिन डॉक्टर बनने की कानूनी योग्यता उनके पास नहीं होती।
पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक देश में छह लाख से ज्यादा फर्जी डॉक्टर सक्रिय हैं। सिंध हेल्थकेयर कमीशन ने भी इन आंकड़ों की पुष्टि की है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित अनुभव के आधार पर ये लोग गंभीर बीमारियों का इलाज करते हैं, बिना यह समझे कि दवाओं की सही मात्रा क्या होनी चाहिए या उनके साइड इफेक्ट कितने खतरनाक हो सकते हैं। गलत निदान और लापरवाही से किया गया इलाज कई बार मरीज की हालत को जानलेवा बना देता है।
इस अवैध चिकित्सा तंत्र से संक्रमण का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि इन क्लिनिकों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को सही तरीके से स्टरलाइज नहीं किया जाता। कई जगहों पर सिरिंज और अन्य चिकित्सा उपकरण बार-बार इस्तेमाल किए जाते हैं, जिससे हेपेटाइटिस और एचआईवी जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
फर्जी डॉक्टरों के गलत इलाज का सीधा असर सरकारी अस्पतालों पर भी पड़ रहा है। बड़े सरकारी और तृतीयक देखभाल अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी हालत पहले ही बिगड़ चुकी होती है। इससे पहले से संसाधनों की कमी से जूझ रहे सरकारी अस्पतालों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
स्वास्थ्य नियामक संस्थाएं मानती हैं कि उनके पास सीमित संसाधन हैं। अवैध क्लिनिक बंद करने पर कई बार अगले ही दिन उसी इलाके में नए क्लिनिक खुल जाते हैं। कमजोर कानून व्यवस्था के चलते आरोपी आसानी से जमानत पर छूट जाते हैं। कुछ क्षेत्रों में निरीक्षण टीमों को सुरक्षा खतरे का भी सामना करना पड़ता है, जिससे कार्रवाई और कठिन हो जाती है।
