बिना ऑक्सीजन माउंट एल्ब्रस पर 24 घंटे! रोहताश खिलेरी ने रचा विश्व इतिहास, भारत का नाम किया रोशन
punjabkesari.in Tuesday, Jan 27, 2026 - 02:06 AM (IST)
इंटरनेशनल डेस्कः भारत के लिए यह बेहद गर्व का पल है। भारतीय पर्वतारोही रोहताश खिलेरी ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जो आज तक दुनिया में कोई नहीं कर पाया। उन्होंने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस पर बिना ऑक्सीजन के पूरे 24 घंटे बिताकर विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। ऐसा करने वाले वे दुनिया के पहले इंसान बन गए हैं।
माउंट एल्ब्रस: जहां जानलेवा है मौसम
माउंट एल्ब्रस रूस की काकेशस पर्वतमाला में स्थित है। इसकी ऊंचाई 18,510 फीट है और यह न सिर्फ यूरोप की सबसे ऊंची चोटी है, बल्कि दुनिया की सेवन समिट्स (सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियां) में भी शामिल है।
यह पर्वत अपने भयानक ग्लेशियरों, तेज तूफानी हवाओं और बेहद कम तापमान के लिए जाना जाता है।
WORLD RECORD | First human to stay 24 hours on Europe’s highest peak — without oxygen. 🚩
— Bishnoi (@rohtashkhileri) January 20, 2026
“24 Hours on the Top of Europe! 🏔️❄️”
Ye post likhna aasaan nahi hai…
kyunki isme 8 saal ka dard, intezaar aur ek pagalpan bhara sapna juda hai. Aaj main duniya ka pehla insaan bana,… pic.twitter.com/jSVSMXip3k
सोशल मीडिया पर साझा की उपलब्धि
रोहताश खिलेरी ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक पोस्ट के जरिए दी। उन्होंने बताया कि बिना ऑक्सीजन के शिखर पर 24 घंटे रुकना कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि यह 8 साल की मेहनत, दर्द, इंतजार और जुनून का नतीजा है।
उन्होंने लिखा, “विश्व रिकॉर्ड | यूरोप की सबसे ऊंची चोटी पर बिना ऑक्सीजन के 24 घंटे रहने वाला पहला इंसान। ‘यूरोप की चोटी पर 24 घंटे!’ यह पोस्ट लिखना आसान नहीं है, क्योंकि इसके पीछे 8 साल का दर्द, इंतजार और एक पागलपन भरा सपना छुपा है।”
जानलेवा ठंड में अकेले जमे रहे
खिलेरी ने बताया कि वे अकेले ही चढ़े और अकेले ही शिखर पर रुके। इतनी खतरनाक ठंड में कोई भी उनके साथ रुकने को तैयार नहीं था। उन्होंने लिखा:“मैं अकेला ही चढ़ गया और अकेला ही रुका। इस हड्डियां तोड़ देने वाली ठंड में कोई भी मेरे साथ रुकने को तैयार नहीं था।”
मौसम की हालत बेहद खतरनाक
माउंट एल्ब्रस पर मौसम उस समय बेहद भयावह था:
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हवा की रफ्तार: 50–60 किमी प्रति घंटा
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तापमान: -40 डिग्री सेल्सियस
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विंड चिल: -50 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे
ऐसे हालात में बिना ऑक्सीजन जिंदा रहना ही अपने आप में असाधारण है।
यह पहली कोशिश नहीं थी
रोहताश खिलेरी ने बताया कि यह उनका पहला प्रयास नहीं था। उन्होंने 2018 से पहले कई बार चढ़ाई की कोशिश की, लेकिन कभी खराब मौसम तो कभी आपात हालात के कारण उन्हें लौटना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
‘पहाड़ ने उंगलियां ले लीं, सपना नहीं’
इस सफर की भारी कीमत भी उन्हें चुकानी पड़ी। पहले के प्रयासों में उन्हें फ्रॉस्टबाइट हो गया था, जिसके कारण उनकी दो उंगलियां कट गईं। उन्होंने भावुक होकर लिखा: “फ्रॉस्टबाइट में मेरी दो उंगलियां चली गईं, लेकिन मेरा सपना नहीं टूटा।”
24 घंटे का प्रवास सबसे बड़ी परीक्षा
खिलेरी ने बताया कि शिखर पर 24 घंटे रहना उनके जीवन की सबसे कठिन परीक्षा थी। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय एवरेस्ट पर किए गए प्रशिक्षण, वर्षों की मेहनत और अपनों के समर्थन को दिया।
शिखर से लहराया तिरंगा
अपनी पोस्ट के साथ उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें भारी बर्फबारी, तेज हवाएं और शिखर पर लहराता हुआ भारतीय तिरंगा दिखाई दे रहा है। वीडियो में वे नीचे उतरते हुए यह चेतावनी भी देते नजर आते हैं कि मौसम और ज्यादा खराब होने वाला है। उनकी भौहें और मूंछें बर्फ से जमी हुई साफ दिखाई देती हैं।
सोशल मीडिया पर गर्व और सम्मान
इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। हजारों लोग उनकी हिम्मत और जज्बे की तारीफ कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा: “हम आपके जोश और धैर्य को सलाम करते हैं। हर भारतीय को आप पर गर्व होना चाहिए।” दूसरे ने कहा: “भाई, आज पूरा देश आप पर गर्व कर रहा है।”
माउंट एल्ब्रस पर भारतीयों की बढ़ती उपलब्धियां
रोहताश खिलेरी की यह उपलब्धि माउंट एल्ब्रस पर भारतीयों की बढ़ती कामयाबियों की कड़ी में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ती है:
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जून 2025: पंजाब के 6 साल के तेघबीर सिंह सबसे कम उम्र में एल्ब्रस फतह करने वाले बने (उम्र: 6 साल 9 महीने 4 दिन)
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2025: नरेंद्र यादव एल्ब्रस पर तीन बार चढ़ाई करने वाले पहले भारतीय बने
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15 अगस्त 2024: अंकित मलिक ने शिखर पर 78 मीटर लंबा भारतीय झंडा फहराया, जो किसी एकल पर्वतारोही द्वारा फहराया गया सबसे बड़ा तिरंगा था
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अगस्त 2021: महाराष्ट्र के शरद कुलकर्णी 59 वर्ष की उम्र में एल्ब्रस पर चढ़ने वाले सबसे उम्रदराज भारतीय बने
