अक्टूबर में फिर ब्रिटेन पहुंचेंगे आचार्य प्रशांत, ऑक्सफोर्ड-कैम्ब्रिज समेत कई विश्वविद्यालयों में होगा संवाद
punjabkesari.in Sunday, Sep 20, 2026 - 05:07 PM (IST)
लंदन। आचार्य प्रशांत के ब्रिटेन दौरे का अगला चरण अक्टूबर 2026 में शुरू होने जा रहा है। इस दौरान ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, ससेक्स और ब्रिस्टल विश्वविद्यालय में उनके विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इन कार्यक्रमों में भारतीय दर्शन की समकालीन प्रासंगिकता के साथ जलवायु परिवर्तन, उपभोक्तावाद, पशु नैतिकता, चेतना और मानव व्यवहार जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
इससे पहले जुलाई 2026 में आचार्य प्रशांत के ब्रिटेन दौरे के पहले चरण में कई शैक्षणिक और सार्वजनिक संस्थानों में व्याख्यान तथा संवाद आयोजित किए गए थे। इन कार्यक्रमों में भारतीय दर्शन और आधुनिक समाज के सामने मौजूद चुनौतियों के बीच संबंधों पर चर्चा हुई।
कैम्ब्रिज में पूरी तरह भर गया था सभागार
पहले चरण के दौरान कैम्ब्रिज न्याय व्यापार विद्यालय के निमंत्रण पर आयोजित कार्यक्रम में कैम्ब्रिज संघ का करीब 300 सीटों वाला सभागार पूरी तरह भर गया था। कार्यक्रम से तीन दिन पहले ही इसे सभी सीटें भर जाने के कारण बंद कर दिया गया था।
अक्टूबर में आचार्य प्रशांत फिर कैम्ब्रिज जाएंगे। इस दौरान उनकी मुलाकात तुलनात्मक संज्ञान के क्षेत्र की विशेषज्ञ प्रोफेसर निकोला एस. क्लेटन और अर्थशास्त्री प्रोफेसर कॉन्स्टैंटाइन यानेलिस से होने वाली है।
ऑक्सफोर्ड में उनका पहला कार्यक्रम एक छात्र संस्था की ओर से आयोजित किया गया था। अक्टूबर में उनकी वापसी ऑक्सफोर्ड के विज्ञान के सार्वजनिक बोध के लिए सिमोनी प्रोफेसर मार्कस डू सौतॉय के निमंत्रण पर हो रही है।
हाउस ऑफ लॉर्ड्स में जलवायु संकट पर चर्चा
12 जून को आचार्य प्रशांत हाउस ऑफ लॉर्ड्स में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ की ओर से आयोजित ‘भारतीय जड़ें, वैश्विक उड़ान’ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। कार्यक्रम में श्रमिक दल के सदस्य और कृत्रिम बुद्धिमत्ता नीति प्रयोगशाला के संस्थापक लॉर्ड नागराजू ने उनका स्वागत किया। जलवायु संकट के मनोवैज्ञानिक कारणों पर चर्चा करते हुए आचार्य प्रशांत ने कहा कि पर्यावरण का विनाश केवल बाहरी कारणों से नहीं जुड़ा है, बल्कि हमारी उपभोग की आदतों और मानवीय अहंकार की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।
आयोजकों के अनुसार, मुख्य कार्यक्रम और उसके बाद हुए प्रश्नोत्तर सत्र में करीब 100 से 200 लोग शामिल हुए। एक अन्य कार्यक्रम में राष्ट्रीय भारतीय छात्र एवं पूर्व छात्र संघ ने आचार्य प्रशांत और श्रमिक दल के सदस्य लॉर्ड कृष रावल के बीच सार्वजनिक चर्चा आयोजित की। कृष रावल ‘नेतृत्व में आस्था’ संस्था के निदेशक हैं। उन्होंने हाउस ऑफ लॉर्ड्स में भगवद्गीता पर हाथ रखकर शपथ ली थी।
विद्वानों के साथ हुआ खुला संवाद
ब्रिटेन दौरे के दौरान कई कार्यक्रम शिक्षाविदों के साथ सार्वजनिक संवाद के रूप में आयोजित किए गए। इनमें आचार्य प्रशांत के विचारों पर सवाल भी उठाए गए और कुछ विद्वानों ने उनसे असहमति भी जताई। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में दार्शनिक और पशु चेतना केंद्र के निदेशक प्रोफेसर जोनाथन बर्च ने उपनिषदों और भगवद्गीता को दर्शन के इतिहास के महत्वपूर्ण ग्रंथ बताते हुए भारतीय और पश्चिमी दार्शनिक परंपराओं के बीच संवाद को महत्वपूर्ण बताया। वहीं क्वीन मैरी विश्वविद्यालय के जीवविज्ञानी प्रोफेसर लार्स चिट्का ने अहंकार के अस्तित्व को लेकर आचार्य प्रशांत के विचारों पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि वह इस बात से पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि अहंकार का अस्तित्व नहीं है।
विश्वविद्यालय कॉलेज लंदन में संज्ञानात्मक तंत्रिका वैज्ञानिक प्रोफेसर स्टीव फ्लेमिंग ने ‘अहम्’ और आधुनिक मन दर्शन के बीच कई समानताओं का उल्लेख किया। उन्होंने आचार्य प्रशांत के विचारों की तुलना दार्शनिक डैनियल डेनेट की ‘उपयोगकर्ता भ्रम’ की अवधारणा से की। आयोजकों के अनुसार, इस कार्यक्रम में करीब 200 लोग शामिल हुए, जिनमें मुख्य रूप से शोधकर्ता और विद्यार्थी थे।
कैम्ब्रिज में ‘स्व’ और समाज पर चर्चा
कैम्ब्रिज न्याय व्यापार विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम का संचालन संकाय के उपाध्यक्ष और भारत एवं वैश्विक व्यापार केंद्र के निदेशक प्रोफेसर जयदीप प्रभु ने किया। बाद में प्रोफेसर प्रभु ने आचार्य प्रशांत के ‘स्व की व्यापक शिक्षा’ से जुड़े कार्य को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसका संबंध केवल व्यक्तिगत आध्यात्मिक जीवन से नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, व्यापार और समाज के भविष्य से भी है।
पशु नैतिकता और शाकाहारी जीवन पर भी चर्चा
आचार्य प्रशांत ने पशु संरक्षण संस्था की अध्यक्ष मिमी बेखेची के साथ भी संवाद किया। आयोजकों के अनुसार, इस कार्यक्रम में करीब 150 से 200 लोग शामिल हुए। उन्होंने पशु संरक्षण संस्था की अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्वा जोशीपुरा और मनोवैज्ञानिक डॉ. मेलानी जॉय से भी मुलाकात की। जॉय पशुओं के प्रति मनुष्य के व्यवहार पर चर्चित पुस्तक की लेखिका हैं।
इसके अलावा पर्यावरणीय चुनौतियों और जलवायु कार्रवाई पर ‘ग्रीन लंदनर’ के संस्थापक गौतीएर होएल के साथ भी सार्वजनिक संवाद हुआ। इसमें करीब 100 से 150 लोगों के शामिल होने की जानकारी दी गई।
आचार्य प्रशांत ने अद्वैत शिक्षक रूपर्ट स्पाइरा और ब्रिटिश जीवविज्ञानी डॉ. रूपर्ट शेल्ड्रेक के साथ निजी बातचीत भी की। शेल्ड्रेक के साथ करीब दो घंटे तक हुई बातचीत में वैज्ञानिक भौतिकवाद की सीमाओं और चेतना की प्रकृति पर चर्चा हुई।
अक्टूबर में कई विशेषज्ञों से होगी बातचीत
अक्टूबर में होने वाले कार्यक्रमों में चेतना, संज्ञान, तंत्रिका विज्ञान और सामाजिक व्यवहार के क्षेत्र में काम करने वाले कई विशेषज्ञ शामिल होंगे। ऑक्सफोर्ड में प्रोफेसर मार्कस डू सौतॉय, ससेक्स में तंत्रिका वैज्ञानिक प्रोफेसर अनिल सेठ और ब्रिस्टल में मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर माइकल बैनिसी के साथ संवाद प्रस्तावित है।
कैम्ब्रिज में प्रोफेसर निकोला एस. क्लेटन और प्रोफेसर कॉन्स्टैंटाइन यानेलिस के साथ मुलाकात होगी। वहीं लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में प्रोफेसर थॉमस कुरेन और विश्वविद्यालय कॉलेज लंदन में प्रोफेसर तातियाना फुमासोली भी चर्चा में शामिल होंगी। इन आगामी संवादों में वेदान्त में ‘अहम्’ और ‘स्व’ से जुड़े विचारों को आधुनिक चेतना विज्ञान, संज्ञान विज्ञान और तंत्रिका विज्ञान के संदर्भ में चर्चा का विषय बनाया जाएगा।
भारतीय दर्शन और आधुनिक विज्ञान के बीच संवाद पर जोर
आचार्य प्रशांत लंबे समय से अद्वैत वेदान्त को केवल आध्यात्मिक विचार के बजाय मनुष्य के मन और व्यवहार को समझने के एक व्यावहारिक दृष्टिकोण के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं। ब्रिटेन दौरे में भी उन्होंने अहंकार, उपभोग, पर्यावरण और पशु नैतिकता जैसे विषयों को इसी दृष्टिकोण से जोड़ा। अक्टूबर में होने वाले कार्यक्रमों में विशेषज्ञों के साथ होने वाले संवाद इस चर्चा को चेतना, संज्ञान और मानव व्यवहार के वैज्ञानिक अध्ययन तक ले जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय दार्शनिक विचारों और आधुनिक वैज्ञानिक शोध के बीच संवाद की संभावनाओं पर चर्चा आगे बढ़ने की उम्मीद है।
