ब्रिटेन का इजराइली बस्तियों पर बड़ा एक्शन, वेस्ट बैंक से आने वाले सामान पर लगाया प्रतिबंध
punjabkesari.in Tuesday, Sep 08, 2026 - 06:57 PM (IST)
London: ब्रिटेन ने मंगलवार को वेस्ट बैंक में स्थित इजराइली बस्तियों से आने वाले सामान पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया। ब्रिटिश सरकार ने कहा कि यह कदम वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार और फलस्तीनियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा के बीच उठाया गया है। विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने इसे ब्रिटेन की इजराइल नीति में अहम बदलाव बताया। यह प्रतिबंध इजराइल के सभी सामान पर लागू नहीं होगा। ब्रिटिश अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निशाना विशेष रूप से वेस्ट बैंक की इजराइली बस्तियों से जुड़े सामान और गतिविधियां हैं।
फ्रांस और कनाडा भी ब्रिटेन के साथ
ब्रिटेन के मुताबिक फ्रांस और कनाडा भी इजराइली बस्तियों से आने वाले सामान पर इसी तरह की पाबंदी लगाने में उसका साथ देंगे। वहीं डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, पोलैंड, पुर्तगाल और स्वीडन ने भविष्य में अतिरिक्त कदमों के लिए समर्थन देने की बात कही है। ब्रिटेन के अनुसार नीदरलैंड, आयरलैंड, बेल्जियम, स्पेन और नॉर्वे भी बस्तियों से जुड़े सामान पर प्रतिबंध लगा चुके हैं या इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
ब्रिटेन का'दो-राष्ट्र समाधान' पर जोर
ब्रिटेन का कहना है कि वेस्ट बैंक में इजराइली बस्तियों का लगातार विस्तार इजराइल और फलस्तीन के दो-राष्ट्र समाधान की संभावना को नुकसान पहुंचा रहा है। ब्रिटिश सरकार लंबे समय से इन बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध मानती रही है। ब्रिटेन पहले इन बस्तियों के साथ व्यापार को रोकने के बजाय कंपनियों को इससे जुड़े आर्थिक और वित्तीय कारोबार से बचने की सलाह देता था। अब सरकार ने इससे आगे बढ़कर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।
इजराइल की तीखी प्रतिक्रिया
ब्रिटेन के इस फैसले से इजराइल की प्रतिक्रिया तीखी रही। रिपोर्टों के मुताबिक इजराइली अधिकारियों ने ब्रिटेन पर राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया है और संभावित जवाबी कदमों की मांग की है। यह कदम ऐसे समय आया है जब वेस्ट बैंक में इजराइली बस्तियों के विस्तार को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है। ब्रिटेन ने इससे पहले भी बस्ती विस्तार और फलस्तीनियों के खिलाफ हिंसा से जुड़े कुछ व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं। ब्रिटेन और इजराइल के बीच कुल व्यापार करीब 6 अरब पाउंड का है, लेकिन वेस्ट बैंक की बस्तियों से होने वाला व्यापार इसका बहुत छोटा हिस्सा है। इसलिए तत्काल आर्थिक असर सीमित रहने की संभावना है। हालांकि, इस फैसले का राजनयिक और राजनीतिक महत्व काफी बड़ा माना जा रहा है।
