खुलासाः यूक्रेन युद्ध में रूस को मदद पहुंचा रहा चीन, प्रतिबंधित रूसी कंपनी को भेजी 46 टन विस्फोटक ड्रोन सामग्री
punjabkesari.in Monday, Sep 07, 2026 - 02:38 PM (IST)
Washington: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच चीन और रूस के सैन्य सहयोग को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। Politico की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की एक सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी ने रूस की एक प्रतिबंधित इकाई को ड्रोन बनाने में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण सामग्री की सप्लाई की। रिपोर्ट में रूसी शिपिंग दस्तावेजों के हवाले से दावा किया गया है कि इस सप्लाई में 46 टन कार्बन-फाइबर प्रीकर्सर शामिल था। पश्चिमी सरकारों ने भी इन दस्तावेजों की जांच की है।रिपोर्ट के अनुसार, चीनी कंपनी ने इस खेप को रूस की परमाणु ऊर्जा कंपनी Rosatom की एक सहायक कंपनी तक पहुंचाया। पश्चिमी देशों ने इस रूसी इकाई को प्रतिबंधों के दायरे में रखा हुआ है।
बताया गया है कि यह सामग्री रूस के तातारस्तान क्षेत्र में स्थित Alabuga-Volokno सुविधा तक पहुंची, जहां उच्च गुणवत्ता वाले कार्बन-फाइबर का उत्पादन किया जाता है। कार्बन-फाइबर का इस्तेमाल ड्रोन के ढांचे और दूसरे हल्के लेकिन मजबूत हिस्सों को बनाने में किया जा सकता है। अमेरिका स्थित Institute for Science and International Security के प्रमुख डेविड अलब्राइट ने Politico को बताया कि इतनी मात्रा में भेजी गई सामग्री से लगभग 1,300 विस्फोटक ड्रोन के लिए स्ट्रक्चरल फ्रेम और ईंधन टैंक को मजबूत करने वाले हिस्से तैयार किए जा सकते हैं। हालांकि, यह अनुमान है और इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरी सामग्री से वास्तव में इतने ड्रोन बनाए गए हैं।
कस्टम दस्तावेजों में घपलेबाजी
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सामग्री को दो 40-फुट कंटेनरों में भेजा गया था। शिपमेंट में इस्तेमाल की गई कस्टम श्रेणियां कथित तौर पर ऐसी थीं, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर नागरिक सिंथेटिक फाइबर के लिए किया जाता है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की पूर्व अधिकारी केरी बिट्सॉफ के मुताबिक, संवेदनशील सामग्री को किसी सामान्य श्रेणी के तहत भेजना संभावित तौर पर उसकी असली प्रकृति छिपाने की कोशिश हो सकती है। Politico के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की Select Committee on China ने दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि की है। यूक्रेनी अधिकारियों ने भी इन दस्तावेजों को वास्तविक बताया है। यूक्रेन के USCC प्रमुख सर्ही कुजान ने कहा कि दस्तावेज इस बात का सबूत देते हैं कि चीनी सरकारी नियंत्रण वाली कंपनियां रूस के हथियार निर्माण तक पहुंचने वाली कच्चे माल की सप्लाई चेन में शामिल हैं।
चीन के इंकार पर उठे सवाल
रिपोर्ट में कुछ पूर्व अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने चीन के उन दावों पर सवाल उठाए हैं, जिनमें वह रूस को सैन्य सहायता देने से इनकार करता रहा है। पूर्व CIA अधिकारी डेनिस वाइल्डर ने तर्क दिया कि इतनी बड़ी मात्रा में किसी सरकारी कंपनी की गतिविधि का चीनी सरकार की जानकारी के बिना होना मुश्किल है। हालांकि, इस रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों पर चीन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से मिले घटकों और कच्चे माल का इस्तेमाल रूस के ड्रोन उत्पादन में किया जा रहा है। यूक्रेन में पहले भी गिराए गए रूसी ड्रोन के मलबे में चीनी निर्मित घटक मिलने की खबरें सामने आती रही हैं। लेकिन इस मामले को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दस्तावेज कथित तौर पर एक चीनी सरकारी कंपनी से रूसी सैन्य-औद्योगिक तंत्र से जुड़ी इकाई तक सीधे सप्लाई की कड़ी दिखाते हैं।
अमेरिका बढ़ा सकता दबाव
अमेरिकी विशेषज्ञ डेविड अलब्राइट के मुताबिक, यदि दस्तावेजों से यह साबित होता है कि चीनी कंपनी ने प्रतिबंधित रूसी इकाई को संवेदनशील सामग्री की सप्लाई की, तो अमेरिका उसके खिलाफ प्रतिबंध लगाने पर विचार कर सकता है। पूर्व अमेरिकी उप विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल ने भी कहा कि कई चीनी कंपनियां dual-use technology के जरिए रूस की रक्षा उत्पादन क्षमता को बनाए रखने में मदद कर रही हैं। अगर ये आरोप आधिकारिक जांच में पुष्ट होते हैं, तो इससे रूस-चीन आर्थिक और तकनीकी सहयोग के साथ-साथ अमेरिका-चीन संबंधों पर भी नया दबाव पड़ सकता है।
