एक हिंदू होने के नाते मुझे शर्मिंदगी महसूस हुई... 2019 के अयोध्या फैसले पर Swara Bhasker हुई दुखी, कहा- मुस्लिम दोस्तों से मांगी माफी
punjabkesari.in Thursday, Sep 17, 2026 - 03:49 PM (IST)
Swara Bhasker on Ram Mandir : एक्ट्रेस स्वरा भास्कर एक बात फिर अपने पुराने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह 2019 के राम जन्मभूमि- अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया साझा करती दिखाई दे रही हैं। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद लंबे समय तक देश के संवेदनशील मुद्दों में रहा है। वायरल वीडियो में स्वरा उस समय के अपने अनुभव और फैसले को लेकर व्यक्त की गई भावनाओं के बारे में बात करती नजर आती हैं। उनके बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं और बहस देखने को मिल रही हैं।
आमिर खान से लेकर सलमान खान तक सारे मुस्लमान दोस्तों से मांगी माफी
वायरल वीडियो में स्वरा भास्कर 2019 में आए राम जन्मभूमि फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करती नजर आ रही हैं। उन्होंने बताया कि उस समय वह काफी परेशान और निराश थीं और उन्हें अदालत का फैसला सही नहीं लगा था। स्वरा के मुताबिक, उन्होंने अपने फोनबुक में मौजूद मुस्लिम दोस्तों और परिचितों, जिनमें आमिर खान, शाहरुख खान, सलमान खान और फहाद अहमद जैसे नाम शामिल थे को मैसेज किया था। उन्होंने अपने संदेश में फैसले से असहमति जताते हुए कहा था कि उन्हें इस पर दुःख है और एक हिंदू होने के नाते वह शर्मिंदगी महसूस कर रही थीं।
SWARA felt sorry for the Ram Janmabhoomi verdict. We feel sorry for Swara. She saw a court order. We saw Ram. Only Punyatmas can see Him. https://t.co/zaJDX4GCS9
— Āyudhika (@Ayudhika1310) September 16, 2026
सोशल मीडिया शुरू हुई नई कंट्रोवर्सी
स्वरा भास्कर के इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दो अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाना न्यायपालिका के निर्णय पर आपत्ति जताने जैसा है। उनका तर्क है कि अयोध्या मामले में फैसला उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सुनाया गया था।
वहीं दूसरी ओर कुछ लोग स्वरा के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का समर्थन कर रहे हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को किसी भी न्यायिक फैसले पर अपनी व्यक्तिगत राय रखने या उससे असहमति जताने का अधिकार, भले ही उसकी राय बहुसंख्यक लोगों की सोच से अलग क्यों न हो।
