अनिल कपूर के प्रोफेशनलिज्म से बहुत कुछ सीखने को मिला: आदित्य रावल
punjabkesari.in Wednesday, Mar 18, 2026 - 02:16 PM (IST)
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अनिल कपूर स्टारर फिल्म सूबेदार 5 मार्च को प्राइम वीडियो पर रिलीज हो चुकी है। फिल्म की कहानी काफी इंट्रस्टिंग और बांधे रखने वाली है। फिल्म सूबेदार में अनिल कपूर के अलावा राधिका मदान, सौरभ शुक्ला,आदित्य रावल, फैसल मलिक और मोना सिंह मुख्य भूमिका में हैं। इस फिल्म में आदित्य ने निगेटिव रोल प्ले किया है। उनके किरदार का नाम प्रिंस है। आदित्य रावल ने अपने किरदार और सफर के बारे में पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
आदित्य रावल
सवाल: इन दिनों आपके बैक-टू-बैक प्रोजेक्ट्स आ रहे हैं। कैसा महसूस हो रहा है?
जवाब: बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। जब आप किसी फिल्म में काम करते हैं तो तीन-चार महीने शूटिंग में निकल जाते हैं, उसके बाद कई महीने एडिटिंग और पोस्ट-प्रोडक्शन में लगते हैं। फिर जाकर फिल्म दर्शकों तक पहुंचती है। लेकिन इस बार ऐसा हुआ कि मेरे प्रोजेक्ट्स लगभग लगातार आ रहे हैं। मेरे करियर में पहली बार ऐसा हो रहा है, इसलिए थोड़ा सा “breathless” भी महसूस हो रहा है, लेकिन दर्शकों का जो प्यार मिल रहा है उससे बहुत खुशी हो रही है।
सवाल: जब आपने सूबेदार में इस किरदार के बारे में पहली बार सुना था तो आपका रिएक्शन क्या था?
जवाब: सबसे पहले तो मुझे यह जानकर ही उत्साह हो गया था कि फिल्म का निर्देशन सुरेश त्रिवेणी कर रहे हैं। मैंने उनके साथ पहले भी काम किया है इसलिए मुझे भरोसा था कि फिल्म और स्क्रिप्ट दोनों शानदार होंगी। किरदार के बारे में सुनकर लगा कि यह मुझसे काफी अलग है। लेकिन जब मैंने उसके व्यक्तित्व और सोच को समझा खासकर उसका वह रवैया कि वह परिणाम की चिंता किए बिना काम करता है तब मुझे लगा कि यह किरदार निभाना दिलचस्प होगा।
सवाल: इस फिल्म में आपको अनिल कपूर के साथ काम करने का मौका मिला। यह अनुभव कैसा रहा?
जवाब: यह मेरे लिए बहुत खास अनुभव था। अनिल कपूर एक दिग्गज अभिनेता हैं और उनके साथ काम करना अपने आप में सीखने जैसा है। मेरे पिता भी उनके साथ काम कर चुके हैं इसलिए बचपन से ही उनका नाम सुनता आया हूं। जब मुझे पता चला कि मेरे उनके साथ कई कॉन्फ्रंटेशन सीन और एक्शन सीन होंगे तो मैं बहुत उत्साहित था।
सवाल: अनिल कपूर के साथ आपका पहला शूटिंग डे कैसा रहा?
जवाब: पहले ही दिन उनका प्रोफेशनलिज्म देखकर मैं हैरान रह गया। वे समय से पहले सेट पर पहुंच गए, पूरे दिन पूरी ऊर्जा के साथ काम किया और शूट खत्म होने के बाद भी टीम के साथ जुड़े रहे। उस दिन दिवाली थी, फिर भी उन्होंने क्रू के साथ समय बिताया और अगले दिन सुबह फिर समय पर शूटिंग के लिए आ गए। उनके समर्पण से बहुत कुछ सीखने को मिला।
सवाल: ‘दलदल’ के साजिद और ‘सुबेदार’ के प्रिंस इन दोनों किरदारों में से आपके लिए कौन ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहा?
जवाब: दोनों किरदार अलग-अलग तरह से चुनौतीपूर्ण थे। साजिद के लिए काफी तैयारी करनी पड़ी क्योंकि उसमें एक अलग तरह की मानसिक और शारीरिक स्थिति को समझना था। लेकिन प्रिंस का किरदार मानसिक रूप से ज्यादा कठिन था क्योंकि उसका सोचने का तरीका बिल्कुल अलग है। वह बिना किसी परिणाम की चिंता किए फैसले लेता है और उस मानसिकता को समझना मेरे लिए चुनौतीपूर्ण था।
सवाल: आपने बचपन से अपने माता-पिता को अभिनय करते देखा है। उनसे आपने कौन-सी सबसे बड़ी सीख ली?
जवाब: मेरे पिता से मैंने लगातार आगे बढ़ते रहने की सीख ली है। उन्होंने अपने करियर में 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है और हमेशा अगले काम पर ध्यान दिया है। वहीं मेरी मां से मैंने सीखा कि जो भी काम करो, पूरे जुनून और खुशी के साथ करो। यही चीजें मेरे अभिनय में भी काम आती हैं।
सवाल: आप लिखते भी हैं। क्या लेखन का अनुभव अभिनय में मदद करता है?
जवाब: हां, बहुत मदद करता है। जब आप लिखते हैं तो आपको कहानी और किरदार की संरचना बेहतर समझ आती है। इससे आप यह भी समझ पाते हैं कि लेखक किसी सीन में क्या कहना चाहता है। कई बार इससे सीन को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने में भी मदद मिलती है।
सवाल: आजकल ओटीटी प्लेटफॉर्म का दौर है। एक अभिनेता के तौर पर आपको थिएटर और ओटीटी में क्या फर्क लगता है?
जवाब: एक अभिनेता के तौर पर मेरे लिए बहुत बड़ा फर्क नहीं होता। फर्क ज्यादा निर्देशक के नजरिए में होता है कि वह फिल्म को किस फॉर्मेट में शूट करना चाहता है। मेरे लिए सबसे अहम चीज किरदार और कहानी होती है चाहे वह बड़े पर्दे के लिए हो या ओटीटी के लिए।
सवाल: भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की कौन-सी बात आपको सबसे खास लगती है?
जवाब: भारत में गाने, नृत्य और बड़े-पैमाने की कहानियों को जिस तरह पेश किया जाता है, वह हमारी खासियत है। यह शैली दुनिया में कहीं और उस तरह नहीं मिलती।
