Exclusive Interview: बेहतर बनने की भूख आज भी बरकरार, गोलमाल ने दिलाई घर-घर पहचान- तुषार कपूर
punjabkesari.in Tuesday, Jun 16, 2026 - 11:14 AM (IST)
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अभिनेता तुषार कपूर के फिल्म इंडस्ट्री में 25 साल पूरे हो चुके हैं। तुषार ने अपने 25 साल के फिल्मी करियर में कई रोल अदा किए जिसने उनके फैंस को खूब एंटरटेन किया। तुषार कपूर अब हाल ही में वेलकम टू जंगल और गोलमाल 5 में नजर आने वाले हैं। इसी बीच एकटर ने अपने करियर के शुरुआती दिनों से लेकर आज के डिजिटल दौर तक के बदलावों पर खुल कर बात की... इसी को लेकर तुषार कपूर ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश..
सवाल: सबसे पहले 25 शानदार साल पूरे करने के लिए बहुत-बहुत बधाई। जश्न तो आपने मना ही लिया होगा?
तुषार कपूर: जी हां, कल ही छोटा-सा सेलिब्रेशन हुआ। दरअसल मेरे दोस्तों के साथ नहीं, बल्कि पैपराजी ने मेरे लिए केक लेकर आए थे। उन्होंने केक कटवाया और उसी तरह यह खास मौका सेलिब्रेट हुआ। बहुत अच्छा लगा।
सवाल: आपने इंडस्ट्री को करीब से बदलते हुए देखा है। जब आपने शुरुआत की थी तब और आज में क्या सबसे बड़ा बदलाव देखते हैं?
तुषार कपूर: जब मैंने शुरुआत की थी तब इंडस्ट्री काफी छोटी थी। पैपराजी भी बहुत कम हुआ करते थे। सिर्फ कुछ लोग ही स्टार्स की तस्वीरें लिया करते थे। आज सब कुछ डिजिटल हो गया है। प्रमोशन के तरीके बदल गए हैं सोशल मीडिया आ गया है लेकिन फिर भी पारंपरिक मार्केटिंग की अहमियत खत्म नहीं हुई है। आज भी अच्छी तस्वीरें, टेलीविजन प्रमोशन, अखबार और दूसरे माध्यम जरूरी हैं। बदलाव जरूर आया है, लेकिन कुछ चीजें हमेशा बनी रहती हैं।
सवाल: साल 2001 में आपकी पहली फिल्म आई थी और अब 2026 है। आपके भीतर क्या बदला है और क्या अब भी वैसा ही है?
तुषार कपूर: मेरे अंदर जो चीज बिल्कुल नहीं बदली वह है लगातार बेहतर बनने की भूख। कोशिश करते रहना और आगे बढ़ते रहना, यह आज भी वैसा ही है। जहां तक बदलाव की बात है, मैं मानसिक रूप से कहीं ज्यादा मजबूत हो गया हूं। उम्र के साथ परिपक्वता आई है, आत्मविश्वास बढ़ा है। मैं पिता बना हूं, जिंदगी को अलग नजरिए से देखता हूं। पहले बहुत-सी चीजों के बारे में ज्यादा सोचता था, लेकिन अब मैं काफी संतुलित हो गया हूं। मैंने देखा है कि कुछ लोग 20-25 साल बाद भी बिल्कुल नहीं बदलते, लेकिन मेरे भीतर समय के साथ एक सकारात्मक विकास हुआ है।
सवाल: आपकी शुरुआत रोमांटिक और कॉलेज बॉय इमेज से हुई। क्या कभी लगा कि आप एक खास तरह की भूमिकाओं तक सीमित हो रहे हैं?
तुषार कपूर: नहीं, मुझे कभी ऐसा नहीं लगा। 80 और 90 के दशक में अभिनेता इतनी ज्यादा रणनीति नहीं बनाते थे। जो अच्छा काम मिलता था, वह करते थे। बाद में मल्टीप्लेक्स कल्चर आया और यह चर्चा शुरू हुई कि खुद को लगातार रीइन्वेंट करना चाहिए, अलग-अलग तरह के किरदार करने चाहिए। लेकिन मेरा मानना था कि अगर दर्शक मुझे किसी खास तरह की भूमिका में पसंद कर रहे हैं तो मुझे उन्हें खुश करना चाहिए। मैं किसी को कुछ साबित करने के लिए फिल्में नहीं कर रहा था। मेरा मकसद था कि फिल्म अच्छी हो और दर्शकों को पसंद आए।
सवाल: फिर ‘खाकी’, ‘शोर इन द सिटी’ जैसी फिल्मों में आपने बिल्कुल अलग तरह के किरदार निभाए। क्या ये आपके लिए टर्निंग पॉइंट रहे?
तुषार कपूर: बिल्कुल। ‘खाकी’ मेरे करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट थी। उसके बाद ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ और ‘शोर इन द सिटी’ जैसी फिल्मों ने भी मुझे अभिनेता के तौर पर अलग पहचान दी। लेकिन सच कहूं तो उस समय मैंने कभी यह सोचकर फिल्में नहीं कीं कि मैं अपनी इमेज बदल रहा हूं या कोई नया प्रयोग कर रहा हूं। मुझे स्क्रिप्ट अच्छी लगी और मैंने फिल्म कर ली। यह सब बहुत स्वाभाविक तरीके से हुआ।
सवाल: जब आप पीछे मुड़कर देखते हैं, तो कौन-सी फिल्में या पल आपको सबसे ज्यादा संतुष्टि देते हैं?
तुषार कपूर: ‘खाकी’ निश्चित रूप से उनमें से एक है। ‘क्या कूल हैं हम’ भी मेरे लिए बहुत खास रही। लेकिन अगर एक फ्रेंचाइजी का नाम लेना हो, जिसने मुझे घर-घर पहुंचाया, तो वह ‘गोलमाल’ है। मैं पूरे विनम्रता के साथ कह सकता हूं कि ‘गोलमाल’ ने मुझे परिवारों और बच्चों के बीच एक अलग पहचान दी। जब कोई परिवार एयरपोर्ट पर आकर कहता है कि उन्हें मेरा काम पसंद है, तब मुझे लगता है कि मेरी मेहनत सफल हुई है। मेरे लिए यही सबसे बड़ी उपलब्धि है।
सवाल: आगे चलकर क्या आप फिर से हॉरर, थ्रिलर या सुपरनैचुरल जैसी शैलियों में काम करना चाहेंगे?
तुषार कपूर: बिल्कुल। मैंने पहले भी ‘कुछ तो है’ जैसी फिल्में की हैं, जो हॉरर और थ्रिलर जॉनर की थीं। मुझे ऐसे विषय पसंद हैं। लेकिन अगर किसी फिल्म को दोबारा बनाना हो तो मैं ‘ढोल’ का नाम लूंगा। वह फिल्म आज भी लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय है। टीवी और इंटरनेट पर लगातार देखी जाती है। लोग आज भी उसके डायलॉग और सीन दोहराते हैं। मुझे लगता है कि ‘ढोल’ एक ऐसी फिल्म है, जिसे फिर से बनाया जा सकता है।
सवाल: आपने निर्माता के रूप में भी काम किया है। क्या आगे और प्रोडक्शन करने का विचार है?
तुषार कपूर: मैंने ‘लक्ष्मी’ को प्रोड्यूस किया था और उस अनुभव से मुझे समझ आया कि प्रोडक्शन एक फुल-टाइम जिम्मेदारी है। एक निर्माता को हर विभाग, हर समस्या और हर चुनौती को संभालना पड़ता है। अभिनेता का काम खत्म होने के बाद वह दूसरे प्रोजेक्ट में चला जाता है, लेकिन निर्माता फिल्म के साथ अंत तक जुड़ा रहता है। इसलिए मैं तभी प्रोडक्शन करूंगा जब मुझे लगेगा कि मैं उसे पूरा समय और न्याय दे सकता हूं। फिलहाल मेरा मुख्य फोकस अभिनय पर है।
सवाल: 25 साल के सफर में किन लोगों से पेशेवर रिश्ते दोस्ती में बदल गए?
तुषार कपूर: मेरे कई अच्छे दोस्त इंडस्ट्री से हैं। आफताब शिवदासानी, रितेश देशमुख, करीना कपूर, ईशा देओल जैसे लोग मेरे निजी जीवन का हिस्सा हैं। इन लोगों से मेरा रिश्ता सिर्फ काम तक सीमित नहीं है। हम निजी जिंदगी में भी मिलते हैं, बात करते हैं और एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते हैं। यही रिश्ते इस इंडस्ट्री को खास बनाते हैं।
सवाल: क्या आपको लगता है कि पहले फिल्मों को लेकर ज्यादा उत्साह और उत्सव जैसा माहौल होता था?
तुषार कपूर: हां, बिल्कुल। जब मैंने शुरुआत की थी, तब एक फिल्म की रिलीज अपने आप में बड़ा आयोजन होती थी। दो-दो महीने तक प्रमोशन चलता था। लोग इंतजार करते थे कि ट्रेलर कब आएगा, पोस्टर कब आएगा और फिल्म कब रिलीज होगी। आज चीजें ज्यादा व्यवस्थित और तेज हो गई हैं, जो अच्छी बात है। लेकिन उस दौर की जो सादगी, शांति और एक फिल्म पर केंद्रित उत्साह था, उसकी कमी महसूस होती है। उस समय पूरी इंडस्ट्री किसी फिल्म की रिलीज को मिलकर सेलिब्रेट करती थी। प्रीमियर में सभी पहुंचते थे। वह माहौल आज काफी कम हो गया है।
सवाल: एक पिता के रूप में आप कितने सख्त या कितने कूल हैं?
तुषार कपूर: मैं काफी कूल पिता हूं। मैं अपने बेटे पर कोई दबाव नहीं डालता। उसे फिल्मों में खास दिलचस्पी नहीं है। उसे फुटबॉल और दूसरी गतिविधियां ज्यादा पसंद हैं, और मुझे यह अच्छा लगता है। मैं चाहता हूं कि वह वही करे जो उसे पसंद हो। मैं सिर्फ इतना देखता हूं कि वह अनुशासित रहे, सक्रिय रहे और जिम्मेदार बने। बाकी उसके फैसलों में मैं उसे पूरी आजादी देता हूं।
सवाल: आपकी आने वाली फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ को लेकर क्या कहना चाहेंगे?
तुषार कपूर: मैंने अभी तक फिल्म का फाइनल वर्जन नहीं देखा है, लेकिन इस फिल्म से मुझे बहुत उम्मीदें हैं। हम पिछले ढाई-तीन साल से इस प्रोजेक्ट के साथ जुड़े हुए हैं। इतने बड़े कलाकारों की मौजूदगी के कारण फिल्म को पूरा होने में समय लगा, लेकिन सभी ने बहुत मेहनत की है। अब हमारी सबसे बड़ी इच्छा यही है कि दर्शक फिल्म को पसंद करें और यह बड़ी सफलता हासिल करे।
सवाल: इतने बड़े कलाकारों के साथ शूटिंग करना कितना चुनौतीपूर्ण था?
तुषार कपूर: चुनौतीपूर्ण कम और मजेदार ज्यादा था। सेट पर पुराने और नए कलाकारों का शानदार मेल था। हम सभी एक-दूसरे के साथ खूब बातचीत करते थे और माहौल बहुत सकारात्मक था। काम इतना आनंददायक था कि समय कैसे निकल गया पता ही नहीं चला।
सवाल: अब ‘गोलमाल 5’ का भी इंतजार है। इस बार दर्शकों को क्या नया देखने को मिलेगा?
तुषार कपूर: इसका जवाब तो रोहित शेट्टी बेहतर दे सकते हैं, लेकिन मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि हमारी कोशिश इस बार फिल्म को पांच गुना बड़ा, मजेदार और मनोरंजक बनाने की है। हम सभी चाहते हैं कि ‘गोलमाल 5’ फ्रेंचाइजी को एक नए स्तर पर ले जाए। हम पूरी मेहनत कर रहे हैं और उम्मीद है कि दर्शकों का प्यार हमें फिर मिलेगा।
सवाल: इसके अलावा और क्या प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं?
तुषार कपूर: ‘गोलमाल 5’ के अलावा ‘वेलकम टू द जंगल’ है। कुछ और प्रोजेक्ट्स पर बातचीत चल रही है, लेकिन अभी कुछ भी फाइनल नहीं हुआ है। सही समय आने पर उनके बारे में जरूर बताऊंगा।
