सतरंगी समाज में मौजूद ऊंच-नीच,भेदभाव और शोषण जैसे मुद्दों को गहराई से दिखाती है: अंशुमन पुष्कर
punjabkesari.in Wednesday, May 20, 2026 - 12:01 PM (IST)
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। 22 मई को रिलीज होने जा रही है आरजे महवश और अंशुमन पुष्कर की सीरीज सतरंगी- बदले का खेल। इस सीरीज में आपको सिर्फ बदले की कहानी नहीं, समाज का आईना भी देखने को मिलेगा। इसमें लौंडा नाच, बदला, सत्ता, वफादारी और संघर्ष की कहानी दर्शाई गई है। सीरीज जी5 पर 22 मई को रिलीज होगी। इस सीरीज के बारे में आरजे महवश और अंशुमन पुष्कर ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
सवाल: आप एक्ट्रेस, आरजे, प्रोड्यूसर सब कुछ हैं। क्या कोई टैलेंट अभी बाकी है?
आरजे महवश: मुझे लगता है कि फिलहाल मैंने राइटिंग छोड़ दी है। बाकी तो सब कुछ कर लिया है। लेकिन सच बताऊं तो हर चीज सीखने का मजा आता है। मैं खुद को किसी एक चीज तक सीमित नहीं रखना चाहती।
सवाल: प्रोड्यूसर होने की वजह से क्या एक्टर वाली डिमांड कम हो जाती हैं?
आरजे महवश: बिल्कुल होती हैं। जब आप प्रोड्यूसर के पर्सपेक्टिव से चीजें समझने लगते हो तो खुद ही जोड़ना शुरू हो जाती है कि यहां कितना बजट जा रहा होगा, कितने लोगों की मेहनत लगी होगी। कई बार मैं अपनी डिमांड खुद ही कम कर देती हूं क्योंकि मुझे लगता है कि प्रोजेक्ट सबसे जरूरी है।
सवाल: आप इतने प्रैक्टिकल एक्टर हैं या आपकी डिमांड थोड़ी ज्यादा रहती हैं?
अंशुमन पुष्कर: नहीं, मेरी कभी ज्यादा डिमांड नहीं रहीं। मैं थिएटर बैकग्राउंड से हूं, इसलिए मुझे बेसिक चीजों में भी खुशी मिल जाती है। मेरे लिए सबसे जरूरी कैरेक्टर और उसका माहौल होता है। अगर मुझे सही माहौल मिल रहा है काम करने के लिए, तो मैं उसमें पूरी ईमानदारी से खुद को झोंक देता हूं।
सवाल: टाइटल सुनकर लगता है कि यह कोई colorful कहानी होगी, लेकिन साथ में ‘बदले का खेल’ भी जुड़ा है। आखिर सीरीज कैसी है?
अंशुमन पुष्कर: ‘सतरंगी’ सिर्फ रिवेंज ड्रामा नहीं है। इसमें इमोशन्स के कई रंग हैं। यह एक परफॉर्मर की कहानी है, जो बिहार के ‘लौंडा नाच’ जैसी दुनिया से आता है। सीरीज समाज में मौजूद ऊंच-नीच, भेदभाव और exploitation जैसे मुद्दों को भी बहुत गहराई से दिखाती है। कहानी में प्यार भी है, दर्द भी है, गुस्सा भी है और इंसाफ की लड़ाई भी। ये एक ऐसे लड़के की कहानी है जो यह सब झेलता है।
सवाल: आपका किरदार इस कहानी में किस तरह का रंग लेकर आता है?
आरजे महविश: मेरा किरदार आरती सही और गलत के बीच फर्क समझती है। उसकी लड़ाई अपने घरवालों से से पहले शुरू होती है। वह अमीर घर से आती है लेकिन समाज में हो रहे भेदभाव को भी देखती और महसूस करती है। उसकी सबसे बड़ी लड़ाई बाहर की दुनिया से कम और अपने ही घर-परिवार से ज्यादा है। इसी वजह से मैं इस कैरेक्टर से काफी रिलेट कर पाई।
सवाल: अपने किरदार के लिए आपने क्या तैयारी की?
आरजे मेहवश: मैंने ‘लौंडा नाच’ और भिखारी ठाकुर के बारे में काफी पढ़ाई की। यह समझने की कोशिश की कि इसकी शुरुआत कैसे हुई और समय के साथ इसकी छवि कैसे बदल गई। उस समय ये होता था कि औरतों को बाहर जाकर काम नहीं करने दिया जाता था क्योंकि उन्हें ऐसा लगता था कि घर की इज्जत चली जाएगी। तो मर्दों ने अपने मनोरंजन के लिए लड़की बनकर नाचना शुरू कर दिया। मैं चाहती थी कि आरती की इमपथि और उसकी सोच बिल्कुल असल लगे।
सवाल: बबलू बनने का आपका प्रोसेस क्या रहा?
अंशुमन पुष्कर: मैं बिहार से हूं, इसलिए उस माहौल को करीब से देखा है। लेकिन जब आप खुद उस किरदार को निभाते हो तो चीजें और गहराई से समझ आती हैं। खासकर परफॉर्मर वाला हिस्सा और लोगों की नजरों को महसूस करना वो अनुभव बहुत अलग था। उस दर्द और संघर्ष को महसूस करना इस किरदार की सबसे बड़ी तैयारी थी।
सवाल: आप दोनों की पर्सनैलिटी और बैकग्राउंड काफी अलग हैं। साथ काम करना कैसा रहा?
आरजे मेहवश: बहुत मजेदार रहा। मैंने अंशुमन से एक्टिंग की कई बारीकियां सीखी और इन्होंने मुझसे सोशल मीडिया की बातें सीखीं। सेट पर हम लोग बहुत मस्ती भी करते थे और काम को लेकर बराबर सीरियस भी रहते थे।
अंशुमन पुष्कर: महविश बहुत डेडिकेटेड एक्ट्रेस हैं। हम दोनों का काम करने का अप्रोच काफी सिमिलर था। पूरा सेट बहुत पॉजिटिव था और उसी वजह से परफॉर्मर भी नेचुरली निकलकर आई।
सवाल: आजकल फॉलोअर्स भी कास्टिंग का बड़ा हिस्सा बन गए हैं। आप दोनों इसे कैसे देखते हैं?
आरजे मेहवश: सोशल मीडिया बिल्कुल मदद करता है। अगर किसी एक्टर में टैलेंट भी है और ऑडियंस रीच भी, तो प्रोड्यूसर नैचुरली उसे प्रिफरेंस देगा क्योंकि उससे प्रोजेक्ट की विजिबिलिटी बढ़ती है। लेकिन सिर्फ फॉलोअर्स होने से कुछ नहीं होता, टैलेंट होना सबसे जरूरी है।
अंशुमन पुष्कर: मुझे लगता है कि फॉलोअर्स आपको एक मौका दिला सकते हैं, लेकिन ऑडियंस आपको तभी एक्सेप्ट करेगी जब आप अच्छा परफॉर्म करेंगे। अगर एक्टिंग नहीं आती तो सोशल मीडिया भी ज्यादा समय तक साथ नहीं देता। आखिर में कंटेंट और परफॉर्मेंस ही टिकते हैं।
सवाल: इंडस्ट्री आउटसाइडर होने के नाते सफर कितना चैलेंजिंग रहा?
अंशुमन पुष्कर: चैलेंजिंस तो रहे हैं, लेकिन मैं अपने सफर से खुश हूं। मैं हमेशा अलग-अलग तरह के किरदार करना चाहता हूं। सिर्फ पैसे या पॉपुलैरिटी के लिए stereotype रोल्स नहीं करना चाहता। मेरे लिए सैटिसफैक्शन ज्यादा जरूरी है।
आरजे महवश: मैं हमेशा वही मांगती हूं जो मुझे सच में चाहिए होता है। मेहनत में भरोसा है और मुझे लगता है कि अगर डेडिकेशन हो तो रास्ता धीरे-धीरे खुद बनता जाता है।
सवाल: एक लाइन में बताइए कि दर्शकों को ‘सतरंगी’ क्यों देखनी चाहिए?
आरजे महवश: इसमें प्यार, बदला, भावनाएँ, गुस्सा और मनोरंजन सब कुछ है। ये पूरा पैकेज वाली कहानी है।
अंशुमन पुष्कर: यह ऐसी दुनिया की कहानी है जिसे पहले इतने करीब से explore नहीं किया गया। समाज का सच, raw emotions और heartland की मिट्टी सब कुछ इसमें देखने को मिलेगा।
