रणदीप हुड्डा की दमदार वापसी: Inspector Avinash 2 में फिर दिखा पुलिस का रियल और कड़क अंदाज़

punjabkesari.in Saturday, May 16, 2026 - 02:32 PM (IST)

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पुलिस की बहादुरी और उनके संघर्षों पर आधारित कहानियों ने हमेशा दर्शकों को आकर्षित किया है, और ऐसी ही एक चर्चित वेब सीरीज है Inspector Avinash Season 2। सीरीज ने अपने पहले सीजन के बाद अब और ज्यादा इंटेंस और ग्रिपिंग कहानी के साथ वापसी की है। नीरज पाठक इसके निर्देशक हैं। रणदीप हुड्डा इस सीरीज में पुलिस अधिकारी अविनाश मिश्रा की भूमिका निभा रहे हैं, सीरीज का दूसरा सीजन 15 मई से JioHotstar पर स्ट्रीम हो रही है। सीरीज के बारे में स्टारकास्ट ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...

रणदीप हुड्डा

सवाल: आपने अपने करियर में कई पुलिस अधिकारियों के किरदार निभाए हैं। समय के साथ आपकी समझ में क्या बदलाव आया?
मेरे लिए सबसे जरूरी बात हमेशा यह रही कि हर पुलिसवाले के पीछे एक इंसान होता है। सिर्फ यूनिफॉर्म पहन लेना किसी किरदार को खास नहीं बनाता। मैं हमेशा उस इंसान की मानसिकता, उसकी जिंदगी और उसके संघर्ष को समझने की कोशिश करता हूं।

मैंने पहली बार फिल्म ‘Risk’ में पुलिस अधिकारी का रोल निभाया था। उस दौरान मैंने असली पुलिस अफसर दया नायक के साथ काफी समय बिताया था। लेकिन Inspector Avinash मेरे लिए अलग अनुभव रहा क्योंकि अविनाश मिश्रा खुद में एक संस्था जैसे हैं। उनका अपराधियों से बातचीत करने का तरीका बेहद अलग है। ऊपर से शांत दिखाई देने वाले अविनाश अंदर से बेहद मजबूत इंसान हैं।

उनके साथ समय बिताने के बाद मुझे समझ आया कि पुलिसइंग सिर्फ डंडे या ताकत का नाम नहीं है। इसमें साम, दाम, दंड, भेद सबका इस्तेमाल करना पड़ता है। एक पुलिसवाले की निजी जिंदगी भी काफी प्रभावित होती है।

सवाल: सोशल मीडिया पर लोग आपको criminally underrated कहते हैं। आप इस टैग को कैसे देखते हैं?
मुझे underrated कहलाने में कोई दिक्कत नहीं है। Overrated कहलाने से बेहतर है underrated होना। मैं इस बात के लिए आभारी हूं कि लोग महसूस करते हैं कि मेरे अंदर अभी और भी बहुत कुछ बाकी है। मेरे लिए सबसे बड़ी बात यह है कि आज भी फिल्ममेकर मेरे पास ऐसे किरदार लेकर आते हैं जो मैंने पहले कभी नहीं किए। यही चीज मुझे लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। अहम भूमिकाओं में कई बार कलाकार एक mold में फंस जाते हैं। लेकिन मुझे अलग-अलग तरह के किरदार निभाने का मौका मिला और यही मेरे करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

नीरज पाठक

सवाल: इतनी बड़ी स्टारकास्ट को एक साथ लाना कितना चुनौतीपूर्ण था? 
यह शो काफी बड़ा था और इसमें बहुत सारे किरदार थे। कहानी अलग-अलग मामलों और अपराधों पर आधारित है, इसलिए हर केस में नए लोग जुड़ते जाते हैं। कुल मिलाकर लगभग 150 से ज्यादा किरदार इस सीरीज का हिस्सा बने।

मेरे दिमाग में शुरुआत से साफ था कि किस किरदार के लिए किस तरह का अभिनेता चाहिए। अच्छी बात यह रही कि जिन कलाकारों को हमने सबसे पहले सोचा था, लगभग सभी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बन गए।

मैंने सभी से ईमानदारी के साथ बात की कि हमारा बजट सीमित है, लेकिन किरदार बेहद मजबूत हैं। शायद उसी भरोसे की वजह से मुझे मेरी ड्रीम कास्ट मिल गई।

सवाल: लोग रणदीप को mainstream cinema में ज्यादा देखना चाहते हैं। आप क्या सोचते हैं?
लोग उन्हें underrated इसलिए कहते हैं क्योंकि वो उन्हें और ज्यादा बड़े और मेनस्ट्रीम किरदारों में देखना चाहते हैं। मेरी हमेशा कोशिश रही है कि रणदीप जैसे कलाकार कमर्शियल सिनेमा में भी बड़े स्तर पर नजर आएं। इंस्पेक्टर अविनाश उसी बैलेंस को बनाने की कोशिश है, जहां कहानी में realism भी हो और mass appeal भी। जिस तरह दर्शक इस शो का इंतजार कर रहे थे, उससे साफ है कि लोग रणदीप को इस तरह के किरदारों में और देखना चाहते हैं।

रजनीश दुग्गल

सवाल: आपने हॉरर, पीरियड ड्रामा, रोमांटिक और पौराणिक किरदार तक निभाए हैं। अब अपने करियर को कैसे देखते हैं?
मुझे लगता है कि अभी बहुत कुछ करना बाकी है। मैं खुद को सिर्फ एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं रखना चाहता। अब दर्शक भी अलग-अलग तरह के रोल्स में कलाकारों को स्वीकार कर रहे हैं और यह बदलाव अच्छा है।

इंस्पेक्टर अविनाश मेरे पास एक दिलचस्प तरीके से आया। उस वक्त मैं एक दूसरी फिल्म की शूटिंग से लौटा था और मेरा पूरा लुक बिल्कुल अलग था। दाढ़ी और लंबे बाल थे। जब मुझे पता चला कि पुलिस अधिकारी का रोल है तो पहले थोड़ा अजीब लगा, लेकिन अगले ही दिन मैंने अपना पूरा लुक बदल लिया। मुझे यह किरदार इसलिए भी खास लगा क्योंकि इसमें ईमानदार पुलिस अफसर का एक अलग पक्ष दिखाया गया है। रणदीप के साथ स्क्रीन शेयर करना भी शानदार अनुभव रहा।

फ्रेडी दारूवाला

सवाल: क्या इस शो में कोई ऐसा सीन था जिसने आपको सबसे ज्यादा चुनौती दी?
जी हां, जयपुर में शूट किया गया एक प्रेस कॉन्फ्रेंस वाला सीन मेरे लिए बेहद खास था। उस सीन में मेरे किरदार को एक गंभीर घटना पर सफाई देनी होती है। स्क्रिप्ट में डेढ़ पन्ने के डायलॉग लिखे हुए थे, लेकिन शूटिंग के दौरान महसूस हुआ कि वो संवाद उतने प्रभावी नहीं लग रहे। फिर निर्देशक नीरज सर, राइटर्स राहुल और उत्कर्ष के साथ बैठकर हमने उसी वक्त पूरे डायलॉग दोबारा तैयार किए।

सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मुझे सिर्फ डायलॉग बोलने नहीं थे, बल्कि उन्हें महसूस भी करना था। नीरज सर ने उस सीन को बहुत वास्तविक तरीके से शूट किया।  जब सीन खत्म हुआ तो वहां मौजूद लोग तालियां बजाने लगे। क्योंकि वो hired crowd था, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया पूरी तरह असली थी। मेरे लिए वो पल बेहद खास था।


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Content Editor

Mansi

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