World Rivers Day 2026 : कितनी पुरानी हैं धरती की नदियां? विश्व नदी दिवस पर जानें पानी की धाराओं से जुड़े अनसुने राज
punjabkesari.in Sunday, Sep 27, 2026 - 11:33 AM (IST)
World Rivers Day 2026 : सोचिए, अगर धरती पर नदियां न होतीं तो क्या होता? खेतों को पानी कहां से मिलता, जंगलों और जानवरों को पानी कैसे मिलता और इंसानों की जिंदगी कैसी होती? नदियां सिर्फ पानी की धाराएं नहीं हैं, वे धरती पर जीवन की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। हर साल सितम्बर के चौथे रविवार को ‘विश्व नदी दिवस’ मनाया जाता है। इसका उद्देश्य नदियों के महत्व को समझना और उन्हें साफ-सुथरा व सुरक्षित रखने के लिए लोगों को जागरूक करना है।

नदी आखिर होती क्या है?
पहाड़ों, झरनों, ग्लेशियरों या जमीन के अंदर से निकलने वाला पानी जब एक निश्चित रास्ते से बहता हुआ आगे बढ़ता है, तो नदी बनती है। छोटी धाराएं और नाले मिलकर बड़ी नदी का रूप ले सकते हैं। आखिर में कई नदियां समुद्र, झील या किसी दूसरी नदी में जाकर मिल जाती हैं। नदियां हमेशा एक जैसी नहीं दिखतीं। कहीं वे पतली और शांत होती हैं, तो कहीं चौड़ी और तेज बहने वाली। बारिश, मौसम, पहाड़ और जमीन का ढलान नदी के बहाव को प्रभावित करते हैं।
नदियों के बारे में रोचक तथ्य
नदियों में बहुत कम पानी होता है, फिर भी उनका महत्व बहुत बड़ा है। धरती पर मौजूद पानी का 96 प्रतिशत से अधिक हिस्सा समुद्रों और महासागरों में है और खारा है। कुल पानी का केवल लगभग 2.5 प्रतिशत ही मीठा पानी है। धरती के कुल पानी का केवल लगभग 0.006 प्रतिशत हिस्सा नदियों में मौजूद है। इतनी छोटी मात्रा के बावजूद नदियां इंसानों के लिए मीठे पानी का एक बेहद महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

नदी अकेली नहीं होती
कई छोटी नदियां और धाराएं मिलकर बड़ी नदी को पानी देती हैं। इन्हें नदी की सहायक नदियां कहा जाता है। यानी एक बड़ी नदी के पीछे पानी की छोटी-छोटी धाराओं का पूरा नैटवर्क काम करता है। गंगा भारत की प्रमुख नदियों में से एक है। गंगा के साथ यमुना, ब्रह्मपुत्र और सिंधु भी भारत और आसपास के क्षेत्रों की महत्वपूर्ण नदियां हैं। ये प्रकृति, खेती, शहरों और करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़ी हैं। नदी सिर्फ इंसानों के काम नहीं आती। मछलियां, कछुए, मगरमच्छ, पक्षी, कीड़े और कई दूसरे जीव नदियों तथा उनके आसपास के वातावरण पर निर्भर रहते हैं। नदी के किनारे उगने वाले पेड़-पौधे भी अनेक जीवों को भोजन और रहने की जगह देते हैं।
नदी की शुरुआत हमेशा बड़ी नहीं होती
किसी विशाल नदी की शुरुआत कभी-कभी एक छोटी-सी धारा या पहाड़ से निकलने वाले झरने के रूप में होती है। रास्ते में दूसरी धाराएं मिलती जाती हैं और नदी बड़ी होती जाती है। हर नदी का पानी समुद्र तक नहीं पहुंचता। कुछ नदियां समुद्र में मिलने के बजाय झीलों, दलदली इलाकों या जमीन के अंदर खत्म हो जाती हैं। इसलिए हर नदी की यात्रा एक जैसी नहीं होती।
दुनिया में कुल कितनी नदियां हैं?
इसका कोई एक पक्का जवाब नहीं है क्योंकि वैज्ञानिकों के लिए यह तय करना भी हमेशा आसान नहीं होता कि किसी छोटी बहती जलधारा को नदी, स्ट्रीम या क्रीक कब कहा जाए। इसलिए दुनिया की नदियों की सटीक संख्या बताना मुश्किल है। इतना जरूर कहा जा सकता है कि बड़ी नदियों के साथ छोटी धाराओं को मिलाएं तो धरती पर बहने वाली जलधाराओं की संख्या बहुत बड़ी- दसियों हजार से लेकर लाखों तक हो सकती है।
शनि के चांद ‘टाइटन’ पर बहती हैं अनूठी नदियां!
टाइटन, शनि ग्रह का सबसे बड़ा चंद्रमा है और इसे सौरमंडल की सबसे रोमांचक दुनिया में से एक माना जाता है। यहां ‘नदियां, झीलें और समुद्र’ मौजूद हैं, लेकिन इनमें पानी नहीं भरा है। इसके बजाय, इनमें ‘मीथेन और एथेन’ जैसे तरल पदार्थ पाए जाते हैं, जो टाइटन पर कुछ उसी तरह बहते हैं, जैसे पृथ्वी पर पानी बहता है। नासा के ‘कैसिनी मिशन’ ने टाइटन की सतह पर नदी जैसी धाराओं और झीलों की तस्वीरें भी ली हैं।
इस नदी दिवस पर आप क्या कर सकते हैं?
नदी को साफ रखना सिर्फ सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। बच्चे भी छोटी-छोटी कोशिशों से मदद कर सकते हैं। पानी को बेवजह बर्बाद न करें, प्लास्टिक और कूड़ा खुले में न फेंकें और नदी या नाले के किनारे पिकनिक मनाते समय अपना कचरा वापस लेकर आएं। तो अगली बार जब आपको कोई नदी दिखाई दे, तो उसे सिर्फ बहता हुआ पानी समझकर आगे न बढ़ जाएं। उसके पीछे छिपी पूरी दुनिया को याद करें। नदी बहती है, जीवन को आगे बढ़ाती है और उसकी साफ धारा हमारी जिम्मेदारी है।

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