Why sitting on doorstep is bad luck : चौखट पर बैठना क्यों माना जाता है अशुभ, जानें इसके पीछे की मान्यताओं का सच
punjabkesari.in Saturday, Jun 06, 2026 - 02:39 PM (IST)
Why sitting on doorstep is bad luck : आपने अक्सर देखा होगा कि जब कोई व्यक्ति घर की चौखट पर बैठ जाता है, तो बड़े-बुजुर्ग तुरंत उसे वहां से उठ जाने को कह देते हैं। बहुत से लोग इसे अपशुकन बोलते हैं तो वहीं कुछ लोग इसे घर में दरिद्रता, कलह या नकारात्मकता बढ़ाने वाला मानते हैं। लेकिन कभी सोचा है कि आखिर इस मान्यता के पीछे क्या कारण है। क्या सच में चौखट पर बैठना अपशकुन माना जाता है, या फिर इसके पीछे कोई व्यावहारिक, धार्मिक और वास्तु से जुड़ा रहस्य छिपा हुआ है। आखिर क्यों हमारे पूर्वज इस बात को लेकर इतने सजग रहते थे और बार-बार चौखट पर न बैठने की सीख देते थे। तो आइए जानते हैं चौखट से जुड़ी मान्यताओं, धार्मिक कारणों और उनके पीछे छिपे वास्तविक अर्थ के बारे में-
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर की चौखट केवल लकड़ी, पत्थर या लोहे का एक हिस्सा नहीं होती, बल्कि इसे घर की मर्यादा और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि मुख्य द्वार और उसकी चौखट से ही घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और देवी-देवताओं का प्रवेश होता है। यही कारण है कि कई घरों में चौखट की पूजा भी की जाती है और शुभ अवसरों पर उस पर रोली, हल्दी या स्वस्तिक का चिन्ह बनाया जाता है।
वास्तु शास्त्र में भी चौखट को घर के भीतर और बाहर की ऊर्जा के बीच की सीमा माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि जब कोई व्यक्ति चौखट पर बैठता है, तो वह ऊर्जा के इस प्राकृतिक प्रवाह में बाधा उत्पन्न करता है। इसी कारण बड़े-बुजुर्ग चौखट पर बैठने से मना करते हैं। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि मां लक्ष्मी का प्रवेश मुख्य द्वार से होता है। इसलिए चौखट को स्वच्छ और खाली रखना शुभ माना जाता है। इसी वजह से कई लोग चौखट पर बैठने, पैर रखने या वहां कूड़ा-कचरा जमा करने से बचते हैं।
कुछ मान्यताओं के अनुसार, चौखट पर बैठकर भोजन करना, झगड़ा करना या लंबे समय तक बातचीत करना भी शुभ नहीं माना जाता। ऐसा माना जाता है कि इससे घर की उन्नति में बाधा आ सकती है और परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद बढ़ सकते हैं। हालांकि इन बातों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन ये परंपराएं पीढ़ियों से चली आ रही हैं।
इस मान्यता के साथ एक प्रसिद्ध पौराणिक प्रसंग भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार जब भगवान विष्णु ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा और हिरण्यकश्यप के अंत के लिए नरसिंह रूप धारण किया, तब उन्होंने उसका वध ऐसी जगह किया जो न पूरी तरह घर के भीतर थी और न ही बाहर। कहा जाता है कि यह स्थान द्वार की सीमा, अर्थात चौखट के समीप था। इसी कारण कई परंपराओं में चौखट को एक विशेष और संवेदनशील स्थान माना गया है, जो घर के अंदर और बाहर के बीच की सीमा का प्रतीक है। धार्मिक दृष्टि से इसे एक संधिकाल या संक्रमण बिंदु भी कहा जाता है, जहां दो अवस्थाएं आपस में मिलती हैं। यही वजह है कि कुछ मान्यताओं में चौखट पर बैठने, अधिक देर तक रुकने या उसे बाधित करने से बचने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि यह स्थान विशेष ऊर्जा और आध्यात्मिक महत्व से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसके प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिए।
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