Vidyashankara Temple : वास्तुकला और विज्ञान का अद्भुत मेल है 12 खम्भों वाला विद्याशंकर मंदिर
punjabkesari.in Sunday, Apr 05, 2026 - 03:59 PM (IST)
Vidyashankara Temple : कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले में तुंगा नदी के तट पर स्थित शृंगेरी का विद्याशंकर मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि भारतीय स्थापत्य कला, दर्शन और ज्योतिष का संगम भी है। यह वही स्थान है जहां आदि शंकराचार्य ने दक्षिण भारत में अपने चार प्रमुख मठों में से एक शृंगेरी शारदा पीठ की स्थापना की थी। कहा जाता है कि यही वह भूमि है जहां उन्होंने अद्वैत वेदांत के सिद्धांतों का प्रचार किया था। 14वीं शताब्दी में बना यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसे गुरु विद्यातीर्थ की स्मृति में बनाया गया था। मंदिर के गर्भगृह में विद्याशंकर लिंग स्थापित है, जबकि इसके चारों ओर ब्रह्मा, विष्णु, महेश और देवी दुर्गा के छोटे-छोटे मंदिर बने हैं।

अनूठी स्थापत्य शैली में बना मंदिर
द्रविड़ और होयसल शैली के मेल से बना यह मंदिर वास्तुकला की दृष्टि से भी बेमिसाल है। मंदिर का ऊंचा प्रांगण और विस्तृत शिल्प-कृति हिन्दू पुराण, दशावतार और अन्य देवताओं को दर्शाती हैं।

मंदिर की विशेषता
मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसके 12 स्तंभ (पिलर) हैं, जिन पर 12 राशियों के चिह्न उकेरे गए हैं। खगोलशास्त्र के अद्भुत सिद्धांतों पर आधारित इन स्तंभों पर सूर्य की किरणें हर महीने अलग-अलग राशि पर पड़ती हैं। यही वजह है कि इसे ‘सूर्य विज्ञान का मंदिर’ भी कहा जाता है। मंदिर के अंदर जमीन पर बनी रेखाएं एक बिंदु पर मिलकर एक गोला बनाती हैं, जो खंभों से पड़ने वाली परछाइयों को दर्शाती हैं। यह विशेषता मंदिर के डिजाइन के खगोलीय महत्व को और भी ज्यादा उभारती है, क्योंकि यह एक धूप-घड़ी (सनडायल) की तरह काम करती है, जो सूरज की स्थिति के आधार पर समय बताती है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में स्थापित विद्याशंकर लिंग श्री विद्यातीर्थ की समाधि के ऊपर रखा गया है। श्री विद्यातीर्थ, विद्यारण्य के गुरु थे, जिन्होंने विजयनगर साम्राज्य की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी। यह साम्राज्य दक्षिण भारत में मुस्लिम आक्रमणों के दौर में हिंदू परंपराओं और मंदिरों की रक्षा करने में बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ था।

मंदिर का विमान या शिखर, गर्भगृह के ऊपर भव्यता से खड़ा है। यह शिखर, महापद्म और स्तूपी से सजा हुआ है, जो विजयनगर वास्तुकला की भव्यता को प्रदर्शित करता है। मंदिर के निचले हिस्से को जानवरों, पौराणिक कहानियों और हिंदू धर्म के देवी-देवताओं, जिनमें शिव, विष्णु और दुर्गा शामिल हैं, की आकृतियों से बहुत ही बारीकी से तराशा गया है। विद्याशंकर मंदिर केवल पूजा-पाठ का स्थान ही नहीं, बल्कि ज्ञान और संस्कृति का भी मु य केंद्र है। यह आध्यात्मिकता और विज्ञान के सामंजस्यपूर्ण मेल का प्रतीक बनकर खड़ा है। मंदिर का डिजाइन 14वीं सदी के दौरान भारतीय खगोल विज्ञान और वास्तुकला की उन्नत स्थिति को दर्शाता है और आज भी यह वास्तुकारों, इतिहासकारों और आम दर्शकों की प्रशंसा का पात्र बना हुआ है।

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