भगवान गणेश की सूंड में छिपे हैं कई रहस्य, क्या जानते हैं आप ?

2020-01-26T12:39:49.993

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
इस बात को तो सब जानते ही हैं कि किसी भी काम को शुरू करने से पहले भगवान गणेश जी की पूजा-अर्चना की जाती है, यानि कि ज्ञान और बुद्धि के देवता गणेश जी सभी देवताओं में प्रथम पूज्य है। ये ऐसे देवता हैं जो हर प्रसंग में जीवन को शुभ-लाभ की दिशा देते हैं। इनकी प्रतिमा को लेकर अकसर ये सवाल उठता है कि इनकी सूंड किस तरफ होनी चाहिए। 
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जब भी लोग अपने घर में उनकी प्रतिमा को लगाते हैं तो हर किसी के मन में सवाल आता वे सूंड किसी तरफ हो, क्योकि उनकी प्रतिमा सही दिशा में होने से भगवान मार्ग में आने वाली हर अड़चन को दूर करते हैं। ऐसा मान्यता है कि सीधी सूंड वाले भगवान गणेश दुर्लभ होते हैं। इनकी एक तरफ मुड़ी हुई सूंड के कारण ही गणेश जी को वक्रतुण्ड कहा जाता है। भगवान गणेश के वक्रतुंड स्वरूप भी दो प्रकार के हैं। कुछ प्रतिमाओं में गणेशजी की सूंड बाईं ओर घूमी हुई होती है तो कुछ में दाईं ओर। गणपति जी की बाईं सूंड में चंद्रमा का और दाईं में सूर्य का प्रभाव माना गया है। वहीं वास्तु के हिसाब से भी इनकी प्रतिमा को रखने के लिए दिशा निर्धारित की जाती है। चलिए आगे जानते हैं इसके बारे में विस्तार से-
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दाईं सूंड वाले गणशे
वास्तु के हिसाब से माना जाता है कि दाईं ओर घूमी हुई सूंड वाले गणेशजी बहुत हठी होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस तरह की तस्वीर घर और ऑफिस में न रखें तो ही बेहतर होता है। अगर किसी कारण इनको स्थापित करना हो तो कई धार्मिक रीतियों का पालन करना ज़रूरी होता है, इसलिए ऐसी प्रतिमा को देवालयों में स्थापित करके वहीं उनकी पूजा की जाती है। ऐसे गणेशजी का पूजन विघ्न-विनाश, शत्रु पराजय, विजय प्राप्ति, उग्र तथा शक्ति प्रदर्शन जैसे कार्यों के लिए फलदायी माना जाता है। 
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बाईं सूंड वाले गणेश
सिंहासन पर बैठे हुए गणेशजी की प्रतिमा जिनकी सूंड बाईं ओर मुड़ी  होती है, पूजा घर में रखी जानी चाहिए। इनकी पूजा से घर में सुख-शांति व समृद्धि आती है। वास्तु के हिसाब से इको रखने के लिए मंदिर का उत्तर-पूर्वी कोना सही रहता है। इस मूर्ति की स्थापना करके इसकी पूजा स्थायी कार्यों के लिए की जाती है। जैसे  शिक्षा, धन प्राप्ति, व्यवसाय, उन्नति, संतान सुख, विवाह, सृजन कार्य और पारिवारिक खुशहाली। घर के मुख्य द्वार पर भी गणेशजी की मूर्ति या तस्वीर लगाना शुभ होता है। 
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सीधी सूंड वाले गणेश
कहते हैं कि सीधी सूंड वाली मूर्ति की आराधना रिद्धि-सिद्धि, कुण्डलिनी जागरण, मोक्ष, समाधि आदि के लिए सर्वोत्तम मानी गई है। 


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