Vamana Jayanti 2026: 23 सितंबर को बन रहा है अद्भुत योग, इस तरह करें वामन देव की पूजा, दूर होंगे जीवन के सारे कष्ट!
punjabkesari.in Tuesday, Sep 22, 2026 - 12:13 PM (IST)
Vamana Jayanti 2026: हिंदू धर्म में भगवान श्री हरि विष्णु के दशावतारों का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु ने अपने पांचवें अवतार के रूप में वामन रूप धारण किया था। इस पावन तिथि को देशभर में वामन जयंती या वामन द्वादशी के नाम से श्रद्धा व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

दैत्यराज बलि द्वारा देवों के पराभव के बाद ऋषि कश्यप के कहने पर माता अदिति के पुत्र प्राप्ति हेतु पयोव्रत का अनुष्ठान करती हैं। तब विष्णु जी माता अदिति के गर्भ से प्रकट होकर अवतार लेते हैं व बटुक ब्राह्मण रूप धारण करते हैं। महर्षि कश्यप ऋषियों के साथ उनका उपनयन संस्कार करते हैं। महर्षि पुलह वामन को यज्ञोपवीत, अगस्त्य मृगचर्म, मरीचि पलाश दण्ड, आंगिरस वस्त्र, सूर्य छत्र, भृगु खड़ाऊं, गुरु जनेऊ व कमण्डल, अदिति कोपीन, सरस्वती रुद्राक्ष माला व कुबेर भिक्षा पात्र भेंट करते हैं।
वामन अवतार पिता से आज्ञा लेकर बलि के पास जाते हैं। उस समय राजा बलि नर्मदा के उत्तर-तट पर अन्तिम यज्ञ कर रहे होते हैं। वामन अवतार राजा बलि से भिक्षा में तीन पग भूमि मांगते हैं। बलि दैत्यगुरु शुक्राचार्य के मना करने पर भी अपने वचन पर अडिग रहते हुए, विष्णु को तीन पग भूमि दान देते हैं। भगवान एक पग में स्वर्ग व दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लेते हैं। अब तीसरे पग हेतु राजा बलि अपना सिर भगवान के आगे कर देते हैं। वामन अवतार राजा बलि को पाताल लोक में साथ रहने का वचन देते हुए बलि का द्वारपाल बनना स्वीकार करते हैं। वामन द्वादशी के विशेष पूजन, व्रत व उपाय से निरोगी काया प्राप्त होती है, व्यावसायिक सफलता मिलती है व पारिवारिक कटुता दूर होती है।
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Vamana Jayanti Date & Shubh Muhurat वामन जयंती 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांगीय गणना के अनुसार वर्ष 2026 में वामन जयंती का पर्व 23 सितंबर 2026, बुधवार को मनाया जाएगा।
भाद्रपद शुक्ल द्वादशी तिथि प्रारंभ: 22 सितंबर 2026 को रात 09:43 बजे से
द्वादशी तिथि समाप्त: 23 सितंबर 2026 को रात 10:50 बजे तक
श्रवण नक्षत्र का संयोग: श्रवण नक्षत्र 22 सितंबर की सुबह 07:06 बजे शुरू होकर 23 सितंबर की सुबह 09:09 बजे तक रहेगा।

वामन जयंती दान
वैसे तो भगवान अपने भक्तों के वशीभूत रहते हैं तथा भक्त की पुकार पर दौड़े चले आते है परंतु व्रत आदि की महिमा सदा ही होती है। इस दिन भगवान विष्णु जी का स्मरण करते हुए तांबा, चांदी, चावल और दही का दान करना उत्तम माना जाता है। सच्चे भक्त प्रेम से अपनी सामर्थयानुसार किसी भी प्रिय वस्तु का दान करके प्रभु की असीम कृपा का पात्र बन सकता है।
वामन जयंती पूजा विधि: पूर्वमुखी होकर हरे वस्त्र पर वामन अवतार का चित्र स्थापित करके विधिवत दशोपचार पूजन करें। कांसे के दिए में गौघृत का दीप करें, चंदन से धूप करें, तुलसी पत्र चढ़ाएं, रक्त चंदन चढ़ाएं, मौसम्बी का फलहार चढ़ाएं, मिश्री का भोग लगाएं। तथा रुद्राक्ष माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें।
पूजन मंत्र: ॐ तप रूपाय विद्महे श्रृष्टिकर्ताय धीमहि तन्नो वामन प्रचोदयात्।

