Takhat Sachkhand Sri Hazur Sahib: नांदेड़ की धरती पर नया इतिहास रचते हुए 350वीं शहादत शताब्दी समारोह आयोजित
punjabkesari.in Monday, Jan 26, 2026 - 09:27 AM (IST)
चौक मेहता (पाल, कैप्टन): ‘हिंद दी चादर’ श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की 350वीं शहादत शताब्दी को समर्पित तख्त श्री हजूर साहिब नांदेड़ में मनाए जा रहे 2 दिवसीय शताब्दी समारोह के दूसरे दिन भी शब्द कीर्तन का सिलसिला लगातार जारी रहा और कई जानी-मानी धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने इसमें हिस्सा लिया और ‘हिंद दी चादर’ श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी, भाई सती दास, भाई मति दास और भाई दयाला जी की बेमिसाल शहादत को श्रद्धांजलि और सम्मान दिया। इस दौरान सचखंड श्री हजूर साहिब ‘केसरिया’ रंग से सजा दिखाई दिया।
दमदमी टकसाल के चीफ संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा व तख्त श्री हजूर साहिब के जत्थेदार, संत बाबा कुलवंत सिंह की लीडरशिप में महाराष्ट्र के सी.एम. देवेंद्र फडणवीस की मदद से नांदेड़ के मोदी मैदान वाघला में सजाए गए पंडाल में आज भाई गुरलाल सिंह हजूरी रागी दमदमी टकसाल, सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के हजूरी रागी भाई ओंकार सिंह व भाई कुलदीप सिंह, पंथ के प्रसिद्ध कीर्तनिए भाई चमनजीत सिंह लाल और भाई बलप्रीत सिंह लुधियाना से अपने ग्रुप के साथ शामिल हुए।
इस दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरु साहिब के साथ भाई मति दास, भाई सती दास और भाई दयाला जी की शहादत और भाई लखी शाह वंजारा की हिम्मत को नमन करते हुए कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी सिर्फ सिख धर्म के ही नहीं, बल्कि सभी भारतीय धर्मों के रक्षक थे, जिसके लिए उन्हें ‘हिंद की चादर’ कहा जाता है।
इस दौरान महाराष्ट्र के डिप्टी चीफ मिनिस्टर अजीत दादा पवार, आंध्र प्रदेश के डिप्टी चीफ मिनिस्टर पवन कल्याण, दिल्ली के कैबिनेट मिनिस्टर मनजिंदर सिंह सिरसा, विजय सतबीर सिंह चेयरमैन तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब नांदेड़, महाराष्ट्र के चीफ मिनिस्टर रिलीफ फंड इंचार्ज रामेश्वर नाइक वगैरह ने भी गुरु साहिब को श्रद्धांजलि देते हुए संगत के सामने अपने विचार रखे।
इस दौरान दमदमी टकसाल के चीफ संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा ने कहा कि औरंगजेब ने गुरु साहिब और भाई मति दास, भाई सती दास और भाई दयाला जी पर कई जुल्म और अत्याचार किए, लेकिन गुरु साहिब ने कट्टरपंथियों को नजरअंदाज करके धार्मिक आजादी और इंसानी हक की बराबरी के लिए अपनी जान कुर्बान करके धर्म की रक्षा की।
उन्होंने कहा कि अगर महाराष्ट्र और पंजाब भारत के नक्शे पर नहीं होते तो आज भारत का रूप कुछ और ही होता। इन दोनों राज्यों की धरती पर पैदा हुए महान गुरुओं, पैगंबरों और बहादुर योद्धाओं ने जहां धर्म और सच्चाई के लिए अपनी जान कुर्बान की, वहीं पंजाब और महाराष्ट्र राज्य आजादी की लड़ाई में सबसे आगे रहे हैं।
दमदमी टकसाल चीफ ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को राज्य स्तर पर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की दो दिन की शहीदी शताब्दी मनाने और श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी वर्षगांठ के मौके पर सिख शहादत (1500-1765) को राज्य के सिलेबस में शामिल करने के लिए ऑर्डिनेंस लागू करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने तख्त श्री हजूर साहिब बोर्ड की सेवाओं के लिए जत्थेदार संत बाबा कुलवंत सिंह और समारोह में शामिल सभी लोगों और संगत का शुक्रिया अदा किया और गण्यमान्य लोगों को सम्मानित किया।
बाबा खालसा और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र राज्य में रहने वाले लुबाना, सिंधी, बंजारा, सिकलीगर और दूसरे समुदायों, जो सिख समुदाय का एक अहम हिस्सा हैं और हजूर खालसा को मिले बड़े सपोर्ट के लिए धन्यवाद दिया। ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा ने तख्त श्री हजूर साहिब के जत्थेदार संत बाबा कुलवंत सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को विशेष सम्मान से सम्मानित किया।
शहीदी शताब्दी समारोह में जत्थेदार बाबा बलबीर सिंह 96 करोड़ बुड्ढा दल के प्रमुख, बाबा जोगा सिंह, संत बाबा राम सिंह, कश्मीर सिंह हैड ग्रंथी तख्त श्री हजूर साहिब, उप हैड ग्रंथी ज्ञानी गुरमीत सिंह, जत्थेदार बाबा जोतिंदर सिंह, संत बाबा बलविंदर सिंह गुरुद्वारा लंगर साहिब वाले, ज्ञानी सुखविंदर सिंह ग्रंथी तख्त श्री हजूर साहिब, सांसद अजीत गोपचरे, बाबू सिंह महाराज, अशोक चौहान महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन, जसकीरत सिंह, त्रिलोक सिंह उल्लास नगर विधायक दशमेर राठौड़, विधायक जया चौहान, संत राम सिंह महाराज लुबाना समाज आदि मौजूद थे।
