वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा: द्वार की दिशा और समृद्धि का है गुप्त कनेक्शन, जानें, अंदर खुलते दरवाजे क्यों बदलते हैं घर की किस्मत?
punjabkesari.in Saturday, Jul 18, 2026 - 09:05 AM (IST)
Main Door Vastu: घर का मुख्य द्वार केवल लकड़ी या लोहे का एक ढांचा नहीं होता, बल्कि यह वह प्रवेश द्वार है जहां से खुशहाली, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा आपके जीवन में कदम रखती है। अक्सर लोग घर बनवाते समय दरवाजों के डिजाइन पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन उनके खुलने की दिशा और वास्तु के वैज्ञानिक महत्व को नजरअंदाज कर देते हैं। क्या आप जानते हैं कि अंदर की ओर खुलने वाला दरवाजा आपकी तिजोरी और सुरक्षा दोनों को मजबूत करता है? आज के इस विशेष लेख में हम आधुनिक वास्तुकला और प्राचीन वास्तुशास्त्र के उस तालमेल को समझेंगे, जो आपके घर के हर कोने को ऊर्जावान बना सकता है।

कुछ विद्वानों द्वारा यह जानकारी दी जाती है कि घर का मुख्य दरवाजा या अन्य दरवाजे अंदर की ओर ही खुलना चाहिए। इसके पीछे का मुख्य कारण ऊर्जा का प्रवाह और सुरक्षा है, उनके अनुसार मुख्य द्वार से सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती है। जब दरवाजा अंदर खुलता है, तो वह ऊर्जा को अंदर खींचता है और समेटता है। इसके विपरीत, बाहर खुलने वाला दरवाजा ऊर्जा को बाहर की तरफ धकेलता है। अंदर खुलने वाले दरवाजे के कब्जे अंदर की तरफ होते हैं, जिससे सुरक्षा मजबूत रहती है। बाहर खुलने वाले दरवाजे के कब्जे बाहर होने से सुरक्षा कमजोर होती है।
वास्तुशास्त्र के अनुसार यदि घर के अंदर जगह की कमी हो और अंदर दरवाजा खोलना संभव न हो, तो इसे बाहर भी खोला जा सकता है। इसे वास्तु दोष नहीं माना जाता, क्योंकि व्यावहारिक सुविधा को वास्तु में प्राथमिकता दी जाती है। हां यह जरूर है कि बाहर दरवाजा खुलने से बरामदा, लॉबी या कॉमन एरिया ब्लॉक होता है, जिससे आने-जाने वालों को चोट लगने का डर रहता है।

बाथरूम और टॉयलेट- व्यावहारिक और साइंटिफिक तौर पर टॉयलेट का दरवाजा भी अंदर की ओर ही खुलना चाहिए। अगर टॉयलेट का दरवाजा बाहर खुलेगा, तो अंदर की दूषित हवा और ऊर्जा सीधे लिविंग रूम या लॉबी में फैल जाएगी। दरवाजा अंदर खुलने से वह नकारात्मकता टॉयलेट के अंदर ही सीमित रहती है और एग्जॉस्ट फैन के जरिए बाहर निकल जाती है।
किचन- किचन का दरवाजा भी अंदर की तरफ खुलना बेहतर है, ताकि भोजन की सकारात्मक ऊर्जा और खुशबू घर के अन्य हिस्सों में अचानक से फैलने के बजाय किचन में नियंत्रित रहे।
स्लाइडिंग डोर- आजकल आर्किटेक्चर में बदलाव के कारण घरों में स्लाइडिंग और स्विंग डोर भी लगाए जा रहे हैं। स्लाइडिंग डोर न अंदर खुलते हैं न बाहर, बल्कि दीवार के समानांतर सरकते हैं। छोटे घरों या बालकनी के लिए ये बेहतरीन हैं। वास्तु के अनुसार इसमें कोई दोष नहीं है, बशर्ते इनकी चैनल ट्रैक साफ-सुथरी हो और ये खुलते समय आवाज न करें।
स्विंग डोर अर्थात् डबल एक्शन डोर- जो दरवाजा दोनों तरफ (अंदर और बाहर) खुलता है और स्प्रिंग के कारण अपने आप बंद हो जाता है, उसे कुछ पारंपरिक विद्वान गलत मानते हैं। लेकिन इससे भी कोई वास्तु दोष नहीं होता। यह केवल सुविधा और कमर्शियल स्पेस के लिए अधिक उपयुक्त है। मुख्य द्वार पर इसे लगाने से बचना चाहिए क्योंकि यह हमेशा स्थिर नहीं रहता, लेकिन अंदर के कमरों में इसे लगाया जा सकता है।
सिंगल डोर बनाम डबल डोर- मुख्य द्वार, हॉल या ड्राइंग रूम के लिए दो पल्लों का दरवाजा सबसे उत्तम और भव्य माना जाता है। यह स्वागत की भावना को दर्शाता है। बेडरूम, किचन, बाथरूम और अन्य छोटे कमरों के लिए एक पल्ले का दरवाजा बिल्कुल सही है।
मैन गेट- मुख्य द्वार पर भी जगह की कमी के कारण सिंगल पल्ला लगाया जाए, तो इससे वास्तु पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। आजकल लगभग सभी घरों में और मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में एक पल्ले के ही द्वार लगाये जा रहे हैं। ऊर्जा के प्रवाह के लिए दरवाजे का साफ-सुथरा और सुचारू रूप से खुलना ज्यादा जरूरी है, न कि पल्लों की संख्या।
दरवाजे का आकार- दरवाजे की चैड़ाई और ऊंचाई भवन के कुल साइज और अनुपात के अनुसार होनी चाहिए। मुख्य नियम यह है कि मुख्य द्वार घर के अन्य सभी दरवाजों से आकार में बड़ा और ऊंचा होना चाहिए, ताकि वह ऊर्जा का मुख्य स्रोत बन सके। अंदर के कमरों के दरवाजे मुख्य द्वार से छोटे हो सकते हैं, इसमें कोई दोष नहीं है।
वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा
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