धर्म ग्रंथों में स्नान से जुड़े बताए गए हैं Amazing Facts, आप भी जरूर जानें

punjabkesari.in Thursday, Dec 23, 2021 - 07:13 PM (IST)

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
सर्दी हो या गर्मी माना जाता है शरीर की स्वच्छता व अच्छी सेहत के लिए रोज़ाना स्नान करना बेहद जरूरी होता। परंतु ये तो हुआ वैज्ञानिक तथ्य। धार्मिक तथ्य का क्या? क्या आप जानते हैं कि धार्मिक शास्त्रों में भी स्नान को लेकर काफी कुछ वर्णन किया गया है। नहीं? 

तो चलिए कोई बात नहीं, क्योंकि हम आपको बता देते हैं कि वहीं हमारे शास्त्रों में नहाने के बाद पूजा-पाठ करने का विधान बताया है। हिंदू धर्म के कई धर्मग्रंथों में स्नान से जुड़ी पवित्र मान्यताएं बताई गई हैं। आइए जानते ये खास बातें-  

आपको बता दें कि सुबह के स्नान को धर्मग्रंथों में चार उपनाम दिए हैं। पहले प्रकार का स्नान जो प्रातः 4 बजे से 5 बजे के बीच होता है इसे मुनि स्नान कहते है, ये नहाने के लिए सर्वोत्तम समय होता है। दूसरे प्रकार का स्नान का जिसे देव स्नान बोलते है, 5 से 6 बजे के बीच होता है, स्नान के लिए ये उत्तम समय है।  तीसरे प्रकार के स्नान का समय होता है 6 से 8 के बीच का जो की खासतौर पर मानव जाति के लिए होता है यह सामान्य समय है। इसलिए इसे मानव स्नान भी कहा जाता है। आखिरी प्रकार के स्नान को राक्षसी स्नान कहते हैं जिसमे स्नान 8 बजे के बाद होता है। इस प्रकार का स्नान हिन्दू धर्म में निषेद है।

तो चलिए अब आपको बताते हैं कि अलग-अलग समय पर स्नान करने के क्या-क्या फायदे होते हैं। सबसे पहले बात करते हैं मुनि स्नान। इस समय किया गया स्नान घर में सुख,शांति,समृद्धि, विद्या, बल, आरोग्य, चेतना, प्रदान करता है। तो वहीं देव स्नान यश, कीर्ति,धन, वैभव,सुख, शांति, संतोष प्रदान करता है। और मानव स्नान काम में सफलता, भाग्य, अच्छे कर्मों की सूझ, परिवार में एकता प्रदान करता है और आख़िरी स्नान यानि राक्षसी स्नान के कोई भी लाभ नहीं है बल्कि इससे दरिद्रता,  हानि, क्लेश, धन हानि, परेशानी ही हाथ लगती है।

तो चलिए अब आपको बताते हैं स्नान से जुड़ी कुछ रोचक बातें-

आपने देखा होगा पुराने जमाने में सभी सूरज निकलने से पहले स्नान करते थे। खासकर घर की स्त्री चाहे मां के रूप में हो,पत्नी के रूप में या बहन के रूप में हो। क्योंकि ऐसा करने से धन और वैभवलक्ष्मी घर में सदैव वास करती हैं।

स्नान करते समय ध्यान रखें कि पहले सिर पर पानी डाले फिर पूरे शरीर पर, ऐसा करने से सिर और शरीर की गर्मी पैरों के ज़रिये निकलती है। तो वहीं स्नान करने से शारीरिक के साथ साथ मानसिक और आत्मिक स्वछता और शांति प्राप्त होती है।

और यदि आँखों की रोशनी बढ़ानी हो तो स्नान के समय मुँह में पानी भर लें और फिर आँखों को एक पानी से भरे टब में बिना पलक झपकाएं डूबो कर रखें। शरीर पर स्वच्छ और ताजा पानी डालने से ना सिर्फ आपको आत्मिक बल्कि शारीरिक शक्तियों को भी बल मिलता है। ऐसा करने से आपकी मांसपेशियां और मस्तिष्क की नसें मजबूत रहती है।

स्नान के बाद सूर्य को जल चढाने मात्र से व्यक्ति के मान सम्मान में वृद्धि होती है। जल अर्पित करते समय उस जल में सूर्य देव के दर्शन करने से आँखों की रोशनी बढ़ती है। इससे त्वचा में भी निखार आता है। शास्त्र के अनुसार स्नान से थकावट तथा तनाव दूर होते हैं, मन सदैव प्रसन्न रहता है और व्यक्ति ताजा और तंदरुस्त महसूस करता है। हर दिन नहाने से पहले दोनों पैरों के अंगूठों में सरसों का तेल लगाने से बुढ़ापे तक नेत्रों की ज्योति कमजोर नहीं होती है।
 


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Content Writer

Jyoti

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