Sita Divine Saree Story: सीता माता ने 1 ही साड़ी में बिताए थे 14 साल, जानें इस चमत्कारी वस्त्र का रहस्य
punjabkesari.in Wednesday, Feb 11, 2026 - 09:59 AM (IST)
Sita Divine Saree Story: रामायण काल की अनेक कथाएं आज भी लोगों की आस्था, विश्वास और प्रेरणा का आधार हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत रहस्यमयी और चमत्कारी कथा माता सीता की दिव्य साड़ी से जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वनवास के दौरान माता सीता ने 14 वर्षों का कठिन जीवन जिस वस्त्र में बिताया, वह कोई साधारण साड़ी नहीं, बल्कि एक दिव्य और अक्षय वस्त्र था।
अक्सर लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि राजमहल में पली-बढ़ी माता सीता ने वन के कठिन, असहज और तपस्वी जीवन को किन वस्त्रों में बिताया? आखिर वह कौन-सी साड़ी थी, जो वर्षों तक न मैली हुई और न ही कभी फटी?

रामायण की अनसुनी कथा
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, जब प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता वनवास के शुरुआती दिनों में दंडकारण्य पहुंचे, तब उन्होंने ऋषि अत्रि के आश्रम में कुछ समय विश्राम किया। यहां ऋषि अत्रि की धर्मपत्नी माता अनसुइया ने माता सीता को अपनी पुत्री समान स्नेह दिया।
विदाई के समय माता अनसुइया ने सीता जी को कुछ दिव्य उपहार दिए, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण थी एक पीले रंग की दिव्य साड़ी। यह साड़ी माता अनसुइया की तपोशक्ति और पतिव्रत धर्म से अभिमंत्रित थी।

क्या थी माता सीता की दिव्य साड़ी की खासियत?
धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं के अनुसार, इस साड़ी में कई अद्भुत गुण थे—
हमेशा स्वच्छ रहने वाला वस्त्र
यह साड़ी कभी मैली नहीं होती थी। धूल, मिट्टी, पसीना या जंगल की कठिन परिस्थितियां भी इसे अपवित्र नहीं कर पाती थीं।

अक्षय और अटूट साड़ी
14 वर्षों के लंबे वनवास के बावजूद यह साड़ी न कभी फटी और न ही घिसी। इसे अक्षय वस्त्र माना जाता है।
अग्निदेव से जुड़ा रहस्य
पौराणिक मान्यता के अनुसार, यह वस्त्र अग्निदेव द्वारा निर्मित था। माता अनसुइया ने भविष्य में आने वाली कठिन परीक्षाओं, विशेषकर अग्नि परीक्षा, को ध्यान में रखकर यह दिव्य साड़ी माता सीता को प्रदान की थी।
हर कठिन समय में माता सीता के साथ रही दिव्य साड़ी
मान्यता है कि रावण द्वारा हरण के समय अशोक वाटिका में निवास के दौरान और अंत में लंका विजय के बाद प्रभु श्रीराम के समक्ष उपस्थित होते समय माता सीता ने यही दिव्य साड़ी धारण की हुई थी। पीले रंग की यह साड़ी शुभता, तेज और सात्विक शक्ति का प्रतीक मानी जाती है।
आस्था और प्रतीकात्मक महत्व
माता सीता की दिव्य साड़ी नारी के धैर्य, पवित्रता, सहनशीलता और धर्म का प्रतीक मानी जाती है। यह कथा बताती है कि सच्ची शक्ति बाहरी वैभव में नहीं, बल्कि आत्मिक बल और धर्म पालन में निहित होती है।

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