Ramayan Katha : अंगद क्यों नहीं गए माता सीता की खोज में ? जानें छिपा हुआ रहस्य

punjabkesari.in Tuesday, Jan 27, 2026 - 03:20 PM (IST)

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Ramayan Katha : रामचरितमानस के अनुसार, माता सीता की खोज करते हुए जामवंत, अंगद और हनुमान जी समुद्र तट तक पहुंचे। वहीं से लंका की दूरी थी, जिसे पार करके किसी वीर को रावण की नगरी में जाकर माता सीता का पता लगाना था और फिर सुरक्षित लौटकर सूचना देनी थी। यह कार्य अत्यंत कठिन और जोखिम भरा था, इसलिए सभी वानर वीर इस पर गंभीरता से विचार करने लगे।

Ramayan Katha

जामवंत ने सभी से प्रश्न किया कि कौन इस चुनौतीपूर्ण कार्य को करने का साहस रखता है। तभी अंगद आगे आए और बोले कि वे समुद्र पार कर सकते हैं लेकिन उन्हें अपने लौटने को लेकर संदेह है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का डर है कि कहीं लंका में रावण के पुत्र अक्षयकुमार से सामना न हो जाए।

अंगद ने बताया कि वे और अक्षयकुमार पहले देवगुरु बृहस्पति के आश्रम में साथ पढ़ते थे। उस समय दोनों के बीच अक्सर मतभेद हो जाते थे। एक बार विवाद बढ़ने पर अक्षयकुमार ने गुरु से शिकायत कर दी। गुरु ने अंगद को समझाया लेकिन अंगद ने अपनी गलती नहीं सुधारी। जब दोबारा झगड़ा हुआ, तो गुरु ने क्रोधित होकर उन्हें श्राप दे दिया कि यदि भविष्य में फिर अक्षयकुमार से संघर्ष हुआ, तो उनका जीवन संकट में पड़ जाएगा।

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इसी कारण अंगद को भय था कि यदि लंका में उनका सामना अक्षयकुमार से हो गया, तो वे लौट नहीं पाएंगे। साथ ही, जामवंत भी जानते थे कि अंगद वानर सेना के युवराज हैं, और युवराज को दूत बनाकर भेजना उचित नहीं होगा।

अंगद की बात सुनकर जामवंत ने हनुमान जी की ओर देखा और उन्हें उनकी अपार शक्ति और सामर्थ्य की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि यह कार्य केवल वही कर सकते हैं। हनुमान जी ने भी बिना किसी संदेह के यह जिम्मेदारी स्वीकार कर ली।

इसके बाद हनुमान जी ने पूर्ण विश्वास और साहस के साथ लंका जाने का संकल्प लिया और माता सीता की खोज में सफल हुए।

इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में संदेह और भय के बजाय आत्मविश्वास और श्रद्धा रखनी चाहिए। जब हम अपनी क्षमताओं पर भरोसा करते हैं, तभी हम कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त कर सकते हैं।
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Content Editor

Prachi Sharma

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