Shri Premanand Ji Maharaj : रिश्तों पर प्रेमानंद महाराज का बड़ा बयान, सुनकर सोचने पर मजबूर हो जाएंगे आप
punjabkesari.in Thursday, Feb 19, 2026 - 12:35 PM (IST)
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Shri Premanand Ji Maharaj : आज के दौर में जिसे लोग “प्यार” कह रहे हैं, वह वास्तव में अक्सर इच्छाओं और स्वार्थ पर टिका संबंध बनकर रह गया है। प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज ने अपने एक हालिया प्रवचन में आधुनिक रिश्तों की इसी सच्चाई को उजागर किया।
उन्होंने कहा कि आज अधिकतर संबंध अपेक्षाओं के आधार पर बनते हैं। लोग कहते तो हैं “मैं तुमसे प्यार करता हूं”, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना होती है—तुम मेरी जरूरतें पूरी करो, मेरी भावनाओं को समझो और मेरे अनुसार चलो। जब किसी रिश्ते में मांग और शर्तें शामिल हो जाती हैं, तो वह प्रेम नहीं, बल्कि आसक्ति और मोह होता है।
महाराज के अनुसार सच्चा प्रेम निस्वार्थ और बिना शर्त होता है। उसमें अधिकार या नियंत्रण की भावना नहीं होती। प्रेम का अर्थ है सामने वाले के सुख को प्राथमिकता देना, न कि अपने लाभ को। जहां मेरे लिए की सोच हावी हो जाती है, वहां संबंध धीरे-धीरे स्वार्थ का रूप ले लेते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि आजकल कई रिश्ते शारीरिक आकर्षण, अकेलेपन के डर या भावनात्मक सहारे की जरूरत के कारण बनते हैं। लोग सुविधा और आकर्षण को ही प्रेम समझ बैठते हैं, जबकि शास्त्रों में इसे काम, राग और मोह कहा गया है। उनके मुताबिक, सच्चा प्रेम वही है जो आत्मिक स्तर पर जुड़ा हो और जिसमें कोई स्वार्थ या अपेक्षा न हो।
महाराज ने समझाया कि आज रिश्ते जल्दी टूटने का कारण भी यही है। जब अपेक्षाएं पूरी नहीं होतीं, तो लोग कहते हैं कि प्यार खत्म हो गया। जबकि सच्चाई यह है कि वह संबंध प्रेम पर नहीं, बल्कि एक भावनात्मक समझौते पर आधारित था।
अंत में उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे प्रेम और मोह के बीच का अंतर समझें। जहां अधिकार, डर, नियंत्रण और अपेक्षाएं हों, वहां प्रेम नहीं टिक सकता। सच्चा प्रेम समर्पण, त्याग और आत्मिक जुड़ाव से जन्म लेता है न कि मांग और शर्तों से।
