Premanand Ji Maharaj : पापी की मदद करना क्यों माना गया सबसे बड़ा पुण्य ? प्रेमानंद महाराज ने समझाया गहरा रहस्य

punjabkesari.in Saturday, Feb 07, 2026 - 03:21 PM (IST)

Premanand Ji Maharaj : समाज में यह माना जाता है कि अच्छे लोगों की सहायता करना ही पुण्य है और बुरे या पापी व्यक्ति से दूरी बना लेना ही धर्म है। लेकिन, भक्ति मार्ग के शिखर संत प्रेमानंद जी महाराज ने इस धारणा को एक नया आध्यात्मिक आयाम दिया है। महाराज जी के अनुसार, किसी पापी या राह से भटके हुए व्यक्ति की मदद करना केवल दया भाव नहीं, बल्कि ईश्वर की दृष्टि में सबसे बड़ा पुण्य है। महाराज जी इस रहस्य को समझाते हुए कहते हैं कि जो व्यक्ति पाप के अंधकार में है, वह वास्तव में एक मानसिक रोगी की भांति है जिसे तिरस्कार की नहीं, बल्कि करुणा और सही दिशा की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। जब हम किसी पुण्यात्मा की मदद करते हैं, तो हम केवल एक अच्छे कार्य को आगे बढ़ाते हैं, लेकिन जब हम किसी पापी को पतन की गर्त से बाहर निकालने का प्रयास करते हैं, तो हम साक्षात ईश्वर के करुणा स्वरूप का निर्वहन करते हैं। तो आइए जानते हैं महाराज जी ने पाप और पापी के भेद को स्पष्ट करते हुए मानवता और अध्यात्म के इस गहरे संबंध को कैसे उजागर किया है।

Premanand Ji Maharaj

पापी व्यक्ति सबसे अधिक बीमार है
महाराज जी समझाते हैं कि जिस प्रकार एक शारीरिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति को डॉक्टर की कम और एक गंभीर बीमार को डॉक्टर की ज्यादा जरूरत होती है, वैसे ही पापी व्यक्ति मानसिक और आध्यात्मिक रूप से बीमार है। वह काम, क्रोध, लोभ और मोह के वश में होकर गलत कार्य कर रहा है। ऐसे में उसे तिरस्कार की नहीं, बल्कि सुधार और करुणा की आवश्यकता है। उसे सही राह दिखाना ही सबसे बड़ी मानवता है।

आत्मिक एकता का सिद्धांत
प्रेमानंद जी के अनुसार, हम सभी एक ही परमात्मा के अंश हैं। जैसे एक पिता के दो पुत्र हों- एक आज्ञाकारी और एक कुमार्गगामी तो पिता कुमार्गगामी पुत्र को त्यागता नहीं बल्कि उसे सुधारने की चिंता अधिक करता है। इसी प्रकार, यदि हम किसी पापी की मदद उसे बुराई से बाहर निकालने के लिए करते हैं, तो यह सीधे ईश्वर की सेवा मानी जाती है।

Premanand Ji Maharaj

प्रारब्ध और करुणा का फल
महाराज जी कहते हैं कि यदि आप किसी डूबते हुए पापी को बचाते हैं या किसी अपराधी को पश्चाताप की राह पर लाते हैं, तो आपके हृदय में 'करुणा' का वास होता है। शास्त्रों में 'करुणा' को साक्षात नारायण का रूप माना गया है। जब आप किसी ऐसे व्यक्ति की मदद करते हैं जिसका कोई साथ नहीं देना चाहता, तो भगवान स्वयं आपके रक्षक बन जाते हैं।

क्या पापी की मदद करने से हमें पाप लगेगा ?
यह एक बड़ा प्रश्न है। महाराज जी स्पष्ट करते हैं कि यदि आप किसी के 'पाप कर्म' में सहभागी बनते हैं तो आप अपराधी हैं।लेकिन यदि आप उसके 'जीवन' की रक्षा करते हैं, उसे भोजन देते हैं या उसे सही रास्ता दिखाते हैं, तो यह पुण्य है।

महाराज जी का सूत्र: उसकी बुराई का समर्थन मत करो, लेकिन उसके अस्तित्व के प्रति दया भाव रखो। क्या पता आपकी एक मदद उसे महात्मा बना दे।

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Content Editor

Sarita Thapa

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