Shradh 2026 Dates: पूर्वजों के स्मरण का पर्व ‘श्राद्ध’ आज से शुरू, 10 अक्तूबर को होगा समापन
punjabkesari.in Saturday, Sep 26, 2026 - 09:01 AM (IST)
जालंधर (इंट): पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और उनके स्मरण का पर्व पितृपक्ष आज शनिवार के दिन पूर्णिमा को शुरू हो गया है। सर्वपितृ अमावस्या के साथ इस बार 10 अक्तूबर शनिवार को ही पितृपक्ष सम्पन्न होगा।
16 दिन का होगा श्राद्ध पक्ष
पंचांग में इस बार तिथि क्षय की स्थिति होने के बावजूद पितृपक्ष 16 दिनों का रहेगा। एक दिन दो तिथियां आने के कारण उस दिन दोनों तिथियों के श्राद्ध अलग-अलग निर्धारित समय में किए जा सकेंगे। यानी श्राद्ध की तारीख तय करते समय केवल दिन नहीं बल्कि उस दिन रहने वाली तिथि और उसके कालखंड को भी ध्यान में रखना होगा।

श्राद्ध के समय में तिथि की रहेगी अहम भूमिका
धार्मिक परम्परा में श्राद्ध के लिए कुतप काल और अपराह्न काल को महत्वपूर्ण माना गया है। इसी आधार पर तिथियों के अनुसार श्राद्ध का समय निर्धारित किया जाएगा। पंचमी और अष्टमी जैसी तिथियों के क्षय को लेकर पंचांग गणना में अंतर दिखाई दे सकता है, इसलिए संबंधित परिवारों को अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार श्राद्ध का समय तय करने की सलाह दी जाती है। इस बार पितृपक्ष के दौरान बुधादित्य योग और त्रिफलादश योग बनने की स्थिति भी बताई गई है।

पितृपक्ष में खरीदारी को लेकर क्या है मान्यता
पितृपक्ष को मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त समय नहीं माना जाता, लेकिन दैनिक जरूरत की वस्तुओं की खरीदारी पर सामान्य रूप से पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। आवश्यकता के अनुसार उपयोगी वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं। हालांकि नए मांगलिक कार्य, विवाह आदि के लिए परिवार अपनी परंपरा और धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हैं।

Shradh Dates 2026 List पितृ पक्ष 2026 श्राद्ध की संपूर्ण तिथियां
पितृ पक्ष के दौरान प्रत्येक तिथि का अपना एक विशेष महत्व होता है। आमतौर पर जिस तिथि को हमारे परिजनों का निधन हुआ होता है, उसी तिथि पर उनका श्राद्ध और तर्पण करने का विधान है। साल 2026 की सभी तिथियां निम्नलिखित हैं:
26 सितंबर, शनिवार – पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर, रविवार – प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर, सोमवार – द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर, मंगलवार – तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर, बुधवार – चतुर्थी श्राद्ध
1 अक्टूबर, गुरुवार – पंचमी श्राद्ध
2 अक्टूबर, शुक्रवार – षष्ठी श्राद्ध
3 अक्टूबर, शनिवार – सप्तमी और अष्टमी श्राद्ध (विशेष संयोग)
4 अक्टूबर, रविवार – नवमी श्राद्ध
5 अक्टूबर, सोमवार – दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर, मंगलवार – एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर, बुधवार – द्वादशी श्राद्ध
8 अक्टूबर, गुरुवार – त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर, शुक्रवार – चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर, शनिवार – सर्वपितृ अमावस्या (पितृ पक्ष का अंतिम दिन)

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