Shoes at Main Door: क्या आपके घर की तरक्की में जूते-चप्पल बन रहे हैं बाधा? आज ही सुधारें यह बड़ी गलती!
punjabkesari.in Wednesday, May 27, 2026 - 11:06 AM (IST)
Footwear Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में घर के हर कोने का अपना महत्व है लेकिन मुख्य द्वार (मेन गेट) को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, मुख्य द्वार केवल घर में आने-जाने का रास्ता नहीं है, बल्कि यह माता लक्ष्मी और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का सबसे पवित्र स्थान है। अक्सर हम अनजाने में इसी मुख्य द्वार के सामने जूते-चप्पलों का ढेर लगा देते हैं, जो हमारे जीवन में कई परेशानियों का कारण बन सकता है।

घर का मुख्य द्वार बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा होता है क्योंकि इस जगह से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। कहते हैं घर के मुख्य द्वार से ही मां लक्ष्मी का आगमन होता है। इसलिए हमेशा मुख्य द्वार पर साफ-सफाई और सुंदरता बनाकर रखनी चाहिए। जो व्यक्ति इस जगह पर जूते-चप्पल रखता है, उसके घर में मां लक्ष्मी प्रवेश नहीं करती।
हर जगह चप्पल उतारने की आदत बहुत ही बुरी होती है। घर पर जूते-चप्पल के लिए शू-रैक बनाएं। हमेशा जूते-चप्पल को व्यवस्थित करके शू-रैक में ही रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार जूते-चप्पल के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा सही मानी गई है।
घर छोटे होने की वजह से कई बार शू-रैक को बेडरूम में ही रख लेते हैं लेकिन वास्तु के अनुसार ये घर के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है। ऐसा करने से पति-पत्नी के वैवाहिक जीवन में खटास पैदा होती है और अक्सर लड़ाई-झगड़े का माहौल बना रहता है। ध्यान रखें- जिस अलमारी में पैसे रखते हैं, उसके नीचे कभी भी जूते-चप्पल नहीं रखने चाहिए। ऐसा करने से मां लक्ष्मी रूठ जाती है।

मुख्य द्वार सजाने से होगा धन लाभ
प्रवेश द्वार के ठीक सामने एक आदमकद दर्पण इस प्रकार लगाएं जिससे घर में प्रवेश करने वाले व्यक्ति का पूरा प्रतिबिंब दर्पण में बने। इससे घर में प्रवेश करने वाले व्यक्ति के साथ घर में प्रवेश करने वाली नकारात्मक ऊर्जा पलटकर वापस चली जाती है। द्वार के ठीक सामने आशीर्वाद मुद्रा में हनुमान जी की मूर्त अथवा तस्वीरें लगाने से भी दक्षिण दिशा की ओर मुख्य द्वार का वास्तुदोष दूर होता है। मुख्य द्वार के ऊपर पंचधातु का पिरामिड लगवाने से भी वास्तुदोष समाप्त होता।

लक्ष्मी के आगमन में आती है बाधा
मुख्य द्वार पर जूते-चप्पल होने से लक्ष्मी जी नाराज हो सकती हैं, जिसके कारण:
कमाई होने के बावजूद पैसा नहीं टिकता।
अचानक और अनावश्यक खर्चे बढ़ जाते हैं।
आर्थिक तंगी और दरिद्रता का माहौल बनने लगता है।

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