Shiv Navratri Ujjain 2026 : शिव नवरात्रि के आठवें दिन उमा-स्वरूप में प्रकट होंगे महाकाल ! दर्शन मात्र से मिटेंगे कष्ट, खुलेगा खुशहाली का द्वार
punjabkesari.in Thursday, Feb 12, 2026 - 08:13 AM (IST)
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Shiv Navratri Ujjain 2026 :सनातन परंपरा में नवरात्रि को साधना, भक्ति और आंतरिक शक्ति के जागरण का विशेष पर्व माना जाता है। हालांकि देशभर में नवरात्रि वर्ष में चार बार मनाई जाती है, लेकिन उज्जैन की धार्मिक परंपराएं इसे एक अलग ही पहचान देती हैं। महाकाल की नगरी उज्जैन में नवरात्रि पांच बार मनाने की प्राचीन परंपरा है, जो इसे देश के अन्य तीर्थस्थलों से विशिष्ट बनाती है। यही कारण है कि यहां स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में केवल शिवरात्रि ही नहीं, बल्कि भव्य ‘शिव नवरात्रि’ का भी आयोजन होता है, जो श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत आध्यात्मिक और दिव्य अनुभव माना जाता है।
महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा के अनुसार, उज्जैन में हर धार्मिक उत्सव बड़े उल्लास और विधि-विधान के साथ मनाया जाता है। इन दिनों मंदिर में शिव नवरात्रि का आयोजन चल रहा है, जिसमें प्रतिदिन भगवान महाकाल को अलग-अलग स्वरूपों में सजाया जा रहा है। इसी कारण देशभर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में उज्जैन पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि शिव नवरात्रि के दौरान भगवान के दर्शन और पूजन करने से वही पुण्य प्राप्त होता है, जो महाशिवरात्रि पर मिलता है। इस क्रम में आठवें दिन भगवान महाकाल का ‘उमामहेश’ स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया जाएगा।
इस विशेष श्रृंगार में भगवान शिव के साथ माता पार्वती के दर्शन भी होंगे। धार्मिक मान्यता है कि शिव और शक्ति के संयुक्त स्वरूप के दर्शन करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कहा जाता है कि सच्चे मन से जो भी श्रद्धालु महाकाल के दरबार में आता है, वह निराश नहीं लौटता। शिव नवरात्रि के दौरान भगवान महाकाल विभिन्न अलौकिक रूपों में भक्तों को दर्शन दे रहे हैं, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है।
शिव नवरात्रि का महत्व विशेष रूप से उन भक्तों के लिए और बढ़ जाता है, जो शिवरात्रि पर व्रत या विशेष पूजा करते हैं। यदि वे इस अवधि में उज्जैन आकर भगवान महाकाल के दर्शन कर लें, तो उन्हें शिवरात्रि के समान फल प्राप्त होता है। इस प्रकार उज्जैन की शिव नवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गहन आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्वितीय उत्सव है।
