Shardiya navratri vrat vidhi: नवरात्रि व्रत रखने वाले पढ़ें शास्त्रीय विधि

punjabkesari.in Monday, Sep 26, 2022 - 08:29 AM (IST)

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Shardiya navratri: नवरात्रि का पर्व वर्ष में दो बार आता है, एक बार तो चैत्र नवरात्रि और दूसरी बार शारदीय नवरात्रि। इस बार यह शारदीय नवरात्रि आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को आरम्भ होंगे। यह तिथि अंग्रेजी महीने की 26 सितंबर 2022 दिन सोमवार को है। प्रतिपदा तिथि का आरम्भ 26 सितंबर 2022 को प्रातः 3 बजकर 26 मिनट पर होगा और समापन अगले दिन प्रातःकाल 3 बजकर 10 मिनट पर होगा। इस बार यह नवरात्र 26 सितंबर से आरम्भ होकर 4 अक्तूबर तक रहेंगे व 5 अक्टूबर 2022 को विजयदशमी के रूप में ये दिन मनाया जाएगा। अष्टमी का व्रत 3 अक्टूबर 2022 को सोमवार के दिन रहेगा और महानवमी 4 अक्टूबर 2022 को होगी। 

What are the 9 days of Navratri 2022: जानिए, किस दिन माता के किस स्वरूप की पूजा की जाएगी
26 सितंबर 2022 को प्रथम नवरात्रि के दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
27 सितंबर 2022 को दूसरे नवरात्रि के दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है।
28 सितंबर 2022 को तीसरे नवरात्रि के दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती हैं।
29 सितंबर 2022 को चौथे नवरात्र के दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है।
30 सितंबर 2022 को पांचवें नवरात्रि के दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है।
1 अक्टूबर 2022 को छठे नवरात्रि के दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है।
2 अक्टूबर 2022 को सातवें नवरात्रि के दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है।
3 अक्टूबर 2022 को आठवें नवरात्रि के दिन मां महागौरी की पूजा का विधान होता है। 
4 अक्टूबर 2022 को नौवें नवरात्रि के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से व माता का जागरण करवाने से माता की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। 

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hardiya navratri vrat vidhi: नवरात्रि व्रत रखने की शास्त्रीय विधि इस प्रकार है  
प्रातःकाल जल्दी उठकर व स्नान करने के पश्चात पूजा स्थान पर गंगा जल छिड़क कर स्थान को पवित्र व शुद्ध कर लें। पूजा स्थान में भगवान के समक्ष शुद्ध देसी घी का दीपक प्रज्वलित कर लें। मां दुर्गा का शुद्ध जल से स्नान करवाकर अभिषेक करें। मां को अक्षत, सिंदूर, लाल सुगंधित फूल अर्पण करें एवं प्रसाद के रूप में मिठाई, फल और यथाशक्ति दक्षिणा अर्पण करें। धूप, दीप जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और माता की आरती उतारें व मन में ही माता के व्रत का संकल्प धारण करें। माता को सात्विक खाद्य पदार्थ का भोग लगाएं। 

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माता के व्रत के दौरान माता को अर्पण की जाने वाली सामग्री इस प्रकार है 
लाल चुनरी, मौली, लाल रंग के वस्त्र, श्रृंगार का सामान, दीपक, घी, तेल, धूप, नारियल, चावल, कुमकुम, सुगंधित फूल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, सफेद बताशे या कोई मीठा पदार्थ जैसे कि मिश्री, कपूर, फल, मिठाई, कलावा, माता की प्रतिमा या चित्र इत्यादि। 

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Sanjay Dara Singh
AstroGem Scientist
LLB., Graduate Gemologist GIA (Gemological Institute of America), Astrology, Numerology and Vastu (SSM)

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Content Writer

Niyati Bhandari

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