Sawan Shivratri 2026: सावन शिवरात्रि पर नहीं जा सकते मंदिर तो घर पर इस विधि से करें पूजा
punjabkesari.in Tuesday, Aug 11, 2026 - 01:39 AM (IST)
Sawan Shivratri 2026: हिंदू धर्म में सावन के महीने का विशेष महत्व है और इस दौरान आने वाली शिवरात्रि भक्तों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होती। वर्ष 2026 में सावन शिवरात्रि का महापर्व 11 अगस्त, मंगलवार को मनाया जाएगा। माना जाता है कि इस दिन महादेव की आराधना करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।

व्रत के दौरान क्या करें और क्या नहीं
सावन शिवरात्रि का व्रत केवल भूखा रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह मन की शुद्धता का पर्व है। सात्विक रहें, क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। व्रत के दौरान फलाहार लें। इसमें फल, दूध और पानी का सेवन किया जा सकता है। अनाज, नमक, प्याज, लहसुन और किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करें। इस व्रत में रात्रि पूजा और जागरण का अत्यधिक महत्व है। संभव हो तो रात के चारों प्रहर में भगवान शिव की आराधना करें।
पौराणिक कथा से जानें, क्यों खास है सावन शिवरात्रि
सावन का महीना महादेव और माता पार्वती को समर्पित है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। शास्त्रों के अनुसार, सावन शिवरात्रि का संबंध समुद्र मंथन की उस कथा से है जब विष निकलने पर पूरी सृष्टि में हाहाकार मच गया था। तब भगवान शिव ने हलाहल विष को अपने कंठ में धारण किया, जिससे उनका गला नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए। उस विष की जलन को शांत करने के लिए ही देवताओं ने महादेव पर जल अर्पित किया था, तभी से सावन में जलाभिषेक की परंपरा चली आ रही है।
सावन महीने में आने वाली शिवरात्रि माता पार्वती और शिव जी को बहुत ही प्रिय है क्योंकि इस शिवरात्रि पर दोनों का विवाह हुआ था। सावन के महीने में शिव जी के बहुत सारे भक्त कावड़ यात्रा पर भी जाते हैं। सावन महीने की शिवरात्रि पर बहुत सारे लोग अपनी मन की इच्छा पूरी करने के लिए इस दिन व्रत और विशेष पूजा भी करते हैं। वैसे तो सावन मास की शिवरात्रि पर मंदिर में शिवालय के समीप बैठकर पूजा करने के महत्व अन्य दिनों से अधिक है लेकिन अगर किसी कारणवश आप मंदिर नहीं जा सकते तो घर पर इस विधि से करें पूजा-

सावन शिवरात्रि पूजा विधि
घर में अगर शिवलिंग रखते हैं तो शिवपुराण में वर्णित इस बात को हमेशा ध्यान में रखें कि शिवलिंग अंगूठे के ऊपर वाले पोर से बड़ा न हो। घर में पारद शिवलिंग रखना शुभ होता है, जो चांदी और पारे से मिलकर बना हो। इसके अतिरिक्त स्फटिक शिवलिंग रखना सबसे उत्तम माना गया है। अगर शिवलिंग नहीं रखना चाहते हैं तो पार्थिव शिवलिंग का भी निर्माण कर सकते हैं।
सुबह स्नान-ध्यान से फ्री होकर व्रत करने का संकल्प लें और उसके बाद ज्यादा से ज्यादा ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।
फिर शाम को जिस जगह पूजा करनी है, उस स्थान को गंगाजल के साथ साफ करें। पूजा से पहले हाथ में एक रुद्राक्ष और बेलपत्र लेकर इस मंत्र का जाप करते हुए पूजन विधि की शुरुआत करें-
मंत्र: ममाखिलपापक्षयपूर्वकसलाभीष्टसिद्धये शिवप्रीत्यर्थं च शिवपूजनमहं करिष्ये
दूध, दही, शक्कर, शहद, घी, गंगाजल और गन्ने के रस से घर में मौजूदा शिवलिंग का अभिषेक करें।
अभिषेक करते समय महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। ये मंत्र इतना प्रभावशाली है कि इसका जाप करने से व्यक्ति के ऊपर से अकाल मृत्यु का संकट भी टल जाता है। शास्त्रों के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में अकाल मृत्यु के योग होते हैं, उन्हें भी इस मंत्र का जाप करने की सलाह दी जाती है।
महामृत्युंजय मंत्र को मृत संजीवनी मंत्र भी कहा जाता है- ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ
अभिषेक के बाद भस्म या पीले चन्दन के साथ महादेव को त्रिपुंड लगाएं और 11 बेलपत्र पर ॐ लिखकर भोलेनाथ को समर्पित करें और साथ इस मंत्र का उच्चारण करें।
मंत्र: त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुतम्। त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्॥
अंत में आरती के साथ पूजा का समापन कर भगवान से सुख-समृद्धि की कामना करें।

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