Sawan Last Monday: सावन के आखिरी सोमवार को बनेंगे शुभ संयोग, इस शुभ मुहूर्त में करें जलाभिषेक

punjabkesari.in Monday, Aug 04, 2025 - 06:42 AM (IST)

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Last Sawan Somvar 2025: सावन का महीना तेजी से समापन की ओर बढ़ रहा है। आने वाली 4 अगस्त 2025 को सावन का आखिरी सोमवार व्रत रखा जाएगा। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। सौंदर्य और आकर्षण में वृद्धि होती है। आध्यात्मिक विकास बढ़ता है।

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आखिरी और चौथे सावन सोमवार 2025 का शुभ मुहूर्त
अमृत काल का आरंभ सुबह 5.44 से लेकर 7.25 तक रहेगा।
शुभ काल सुबह 9.06 से सुबह 10.46 तक है।
प्रदोष काल का समय शाम 5.29 से शुरु होकर रात 8.29 तक रहने वाला है।

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आखिरी सावन सोमवार 2025 शुभ संयोग
सावन के चौथे और आखिरी सोमवार पर शनि मीन राशि में विचरण करेंगे। मंगल कन्या राशि में ऊर्जावान संयोग बनाएंगे। इसके साथ-साथ बहुत ही दुर्लभ संयोगों की भरमार रहने वाली है जैसे सर्वार्थ सिद्धि, रवि योग और ब्रह्म योग का निर्माण होने वाला है।

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आखिरी और चौथे सावन सोमवार को इस विधि से करें जलाभिषेक
ताम्र पात्र में पंचामृत से स्व-नामांकित अभिषेक करें। यह एक गुप्त तांत्रिक प्रक्रिया है। पंचामृत में थोड़ा सा गुलाब जल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें और हर अर्घ्य के साथ अपना नाम लें जैसे: शिवाय नमः, (अपना नाम) की ओर से स्वीकृत हो। यह क्रिया आपकी ऊर्जा को शिव के साथ जोड़ देती है। इस विधि से जलाभिषेक करने से वाणी में तेज आता है और क्रोध पर नियंत्रण रहता है। जीवन में विष समान परिस्थितियों से भगवान शिव रक्षा करते हैं।

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रुद्राभिषेक पूजन के लाभ
हमारे शास्त्रों में विविध कामनाओं की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक के पूजन के निमित्त को बताया गया है। किसी खास मनोरथ की पूर्ति के लिए नीचे दी गई पूजन सामग्री और विधि से रुद्राभिषेक किया जाता है।

जल से रुद्राभिषेक करने पर वर्षा का आनंद प्राप्त होता है।

कुशा से रुद्राभिषेक करने से असाध्य रोगों पर विजय प्राप्त होती है।

दही से रुद्राभिषेक करने पर वाहन का सुख प्राप्त होता है।

गन्ने के रस, शहद और घी से रुद्राभिषेक करने पर धन लाभ की प्राप्ति होती है।

तीर्थों के जल से रुद्राभिषेक करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

इत्र वाले जल से रुद्राभिषेक करने पर रोगों से छुटकारा मिलता है।

दूध से रुद्राभिषेक करने वाले को संतान सुख मिलता है।

गाय के दूध से जो व्यक्ति रुद्राभिषेक करता है, उसकी संतान दीर्घायु होती है।

बर्फ के जल या गंगा जल से रुद्राभिषेक करने पर ज्वर शांत होता है।

सहस्त्रनाम जाप के साथ घी की धारा का रुद्राभिषेक करने पर वंश का विस्तार होता है।

दूध की धारा से रुद्राभिषेक करने पर प्रमेह रोग में शांति मिलती है।

शक्कर मिश्रित दूध से रुद्राभिषेक करने पर शत्रु पराजित होते हैं।

गाय का दूध और घी मिलाकर रुद्राभिषेक करने से आरोग्यता का वरदान मिलता है।
 
शक्कर मिश्रित जल से रुद्राभिषेक करने पर पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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