Sakat Chauth Vrat 2026: सकट चौथ क्यों मनाई जाती है? जानिए व्रत का महत्व, पूजा विधि और तिल दान का फल
punjabkesari.in Monday, Jan 05, 2026 - 12:18 PM (IST)
Sakat Chauth Vrat 2026: हिंदू पंचांग और शास्त्रों के अनुसार सकट चौथ व्रत को अत्यंत फलदायी माना गया है। इसे वक्रतुंडी चतुर्थी, माघी चौथ और तिलकुटा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि जिस श्रद्धा और कामना से कोई यह व्रत करता है, भगवान श्री गणेश उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण करते हैं।
शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि सकट चौथ पर जितने तिल दान किए जाते हैं, उतने युगों तक जीव को सौभाग्य और पुण्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत विशेष रूप से परिवार की सुख-शांति, धन-समृद्धि, मंगलमय भविष्य और संतान की उत्तम सेहत व बुद्धि के लिए किया जाता है।
सकट चौथ क्यों मनाई जाती है?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्री गणेश सभी विघ्नों को हरने वाले देवता हैं। जिस दिन श्रीगणेश का जन्म हुआ, वह चतुर्थी तिथि थी, इसी कारण इस तिथि को संकट चौथ के रूप में मनाया जाता है। वैसे तो गणेश चतुर्थी का व्रत प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जा सकता है लेकिन माघ, श्रावण, मार्गशीर्ष और भाद्रपद मास की चतुर्थी का विशेष महत्व बताया गया है।
सकट चौथ व्रत कैसे करें? (How to Observe Sakat Chauth Fast)
सकट चौथ के दिन प्रातः स्नान करके मन में व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान श्री गणेश की धूप, दीप, पुष्प, अक्षत और नैवेद्य से विधिवत पूजा करें। गणेश जी को तिल और खोए से बने लड्डुओं का भोग लगाएं। श्री गणेश स्तोत्र या मंत्रों का पाठ करें। दिन भर गणेश जी के नाम का स्मरण करें और चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्य देकर फलाहार करें।
सकट चौथ पर तिल दान का महात्म्य
इस व्रत में तिलों की पूजा और दान का विशेष विधान है। तिल के लड्डू, गच्चक, रेवड़ी और भुग्गा आदि का दान किया जाता है। इसी कारण कुछ स्थानों पर इसे भुग्गे वाला व्रत भी कहा जाता है।
सकट चौथ से जुड़ी परंपराएं
पंजाब और उत्तर भारत में मान्यता है कि बालक के जन्म या विवाह के अवसर पर तिल के लड्डुओं का थाल चढ़ाया जाता है। भगवान गणेश को सवा किलो या उससे अधिक तिल के लड्डुओं का भोग लगाकर वितरण किया जाता है।

सकट चौथ व्रत के लाभ
संतान को रोग, बाधा और संकट से रक्षा
परिवार में सुख-शांति और समृद्धि
मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा
भगवान गणेश की विशेष कृपा से विघ्नों का नाश




