Sabarimala Temple: फिर सुर्खियों में सबरीमाला मंदिर, भगवान अयप्पा के द्वारपालक कौन हैं और मंदिर के पास कितना है सोना?
punjabkesari.in Wednesday, Jan 21, 2026 - 08:23 AM (IST)
Sabarimala Temple: केरल के घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित भगवान अयप्पा का प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह मंदिर से जुड़ा सोने का रहस्य और द्वारपालकों से जुड़ा मामला है, जिसने भक्तों और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। आस्था, परंपरा और सुरक्षा से जुड़े इस विषय ने एक बार फिर सबरीमाला को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

सबरीमाला मंदिर और सोने का रहस्य
सबरीमाला मंदिर की संपत्ति और वहां मौजूद सोने की मात्रा लंबे समय से रहस्य और जिज्ञासा का विषय रही है। इस मंदिर का प्रबंधन त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) करता है। बोर्ड से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, सदियों से श्रद्धालुओं द्वारा भगवान अयप्पा को चढ़ाया गया भारी मात्रा में सोना मंदिर की संपत्ति का हिस्सा है। इसमें सोने के आभूषण, स्वर्ण सिक्के, भक्तों द्वारा अर्पित अन्य कीमती वस्तुएं शामिल हैं।
नवंबर 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, सबरीमाला मंदिर से जुड़ी संपत्ति में लगभग 227 किलोग्राम सोना और 2,994 किलोग्राम चांदी होने का अनुमान लगाया गया था। हालांकि मंदिर प्रशासन की ओर से इसकी कोई आधिकारिक सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन माना जाता है कि यह संपत्ति करोड़ों रुपये मूल्य की है।

कौन हैं भगवान अयप्पा के द्वारपालक?
सबरीमाला मंदिर के प्रवेश मार्ग पर दो प्रमुख मूर्तियां स्थापित हैं, जिन्हें परंपरागत रूप से द्वारपालक कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ये द्वारपालक मंदिर और भगवान अयप्पा की संपत्ति की रक्षा करते हैं।
कुछ समय पहले यह खबर सामने आई थी कि इन द्वारपाल मूर्तियों पर चढ़ी सोने की परतें गायब हो गई हैं या फिर सोने की चोरी हुई है। इस खबर के सामने आते ही भक्तों में चिंता और आक्रोश फैल गया। यह सोने की परत न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण थी, बल्कि आर्थिक रूप से भी अत्यंत मूल्यवान मानी जाती है।
मामले के सामने आने के बाद मंदिर की सुरक्षा ऑडिट कराई गई और भक्तों की आस्था को ध्यान में रखते हुए द्वारपालकों पर दोबारा शुद्ध सोने की परत चढ़ाई गई। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को भी और सख्त किया गया।

सबरीमाला मंदिर में किस भगवान की होती है पूजा?
केरल के इस विश्वविख्यात मंदिर में भगवान अयप्पा की पूजा की जाती है। इन्हें अयप्पन, शास्ता और मणिकंदन के नाम से भी जाना जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान अयप्पा भगवान शिव और भगवान विष्णु के मोहिनी रूप के पुत्र हैं। इसी कारण उन्हें हरिहरपुत्र कहा जाता है।

41 दिन का व्रत और मकरविलक्कु का महत्व
सबरीमाला दर्शन से पहले भक्तों को 41 दिनों का कठोर व्रत, जिसे मंडलम व्रत कहा जाता है, रखना अनिवार्य होता है। इस दौरान संयम, ब्रह्मचर्य और नियमों का सख्ती से पालन किया जाता है।
मंदिर में मकर संक्रांति के दिन होने वाली मकरविलक्कु पूजा का विशेष महत्व है। इस अवसर पर प्रकट होने वाली मकर ज्योति के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु सबरीमाला पहुंचते हैं।

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